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एक कमरे से निकली चार लाशें, तड़प उठी लोगों की रूह, मां बोली- मेरे लाल को न ले जाओ

Thu, 30 May 2019 03:54 PM IST
ishwar ashish विष्णु मोहन/अमर उजाला,बाराबंकी
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एक ही परिवार के चार लोगों की मौत - फोटो : अमर उजाला
बाराबंकी में रामनगर इलाके के रानीगंज गांववासी छोटेलाल के घर के बाहर का मंजर बहुत दर्दनाक था। पेशे से सफाईकर्मी छोटेलाल के परिवार पर कहर टूट पड़ा था। उनके घर के बाहर गमगीन लोगों का जमावड़ा था, दो जवान बेटों की लाश रखी थी। एक दरोगा सफेद कपड़ा लाकर लाशों को लपेटने लगा। बदनसीब मां से ये देखा नहीं गया। दहाड़े मारकर शव से लिपट गईं और दरोगा को ऐसा करने से रोकने लगी। रोते बिलखते उनकी आवाज बैठ गई। बार-बार बस यही कह रहीं थीं ‘मेरे लाल को न ले जाओ’।
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एक ही परिवार के चार लोगों की मौत - फोटो : अमर उजाला
छोटेलाल के घर का एक छोटा सा दालान, एक कोठरी और उसके पीछे आंगन का कुछ हिस्सा छाया हुआ है जिसमें वे पत्नी, छह बेटों, एक बहू और दो पोतियों के  साथ रहते थे। सोमवार को दिन तक सब कुछ सामान्य था। रोजाना की तरह छोटेलाल काम से वापस लौटकर आए। बड़ा बेटा रमेश (42) भी सफाईकर्मी है और जिस स्कूल में वह काम करता है वहां छुट्टी होने की वजह से वह भी घर पर था।
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जहरीली शराब - फोटो : अमर उजाला
बाकी के दो बेटे मुकेश (35) और सोनू (30) भी वहां मौजूद थे। पिता और तीनों बेटों ने घर से कुछ दूर मुख्य सड़क पर देशी शराब के सरकारी ठेके से शराब की दो बोतलें खरीदीं। वे पहले भी कई बार ऐसा कर चुके थे, लिहाजा उन्हें किसी अनहोनी की आशंका नहीं थी। शराब पीने के कुछ देर बाद इन चारों को चक्कर आने लगे और पेट दर्द होने लगा।

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एक ही परिवार के चार लोगों की मौत - फोटो : अमर उजाला
सोमवार शाम से मंगलवार सुबह तक इस परिवार में एक-एक कर चार लोगों का सांसें थम गईं। सबसे पहले रमेश और छोटेलाल की हालत गंभीर हुई और कुछ ही देर में उसकी सांस उखड़ गई। इसके बाद रमेश की दशा बिगड़ी। उसे लोग पास के अस्पताल तक ले गए पर वहां पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया था।
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सोनू (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार सुबह तक मुकेश और सोनू ने भी दम तोड़ दिया। एक ही परिवार में एक साथ चार लोगों की मौत होने पर गांव में अफरातफरी मच गई। आसपास के लोग वहां एकत्र हो गए। सभी के जेहन में बस एक ही सवाल था कि अब परिवार का क्या होगा?
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मुकेश (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार दोपहर तक छोटेलाल और रमेश के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए पर मुकेश और सोनू के शव घर के दलान में ही रखे हुए थे। छोटेलाल की पत्नी मालती हादसे से बेसुध थी। लोगों के बार-बार कहने पर भी वह बेटों की लाशों के पास से हटने को तैयार नहीं थी। रमेश की पत्नी रामावती का भी बुरा हाल था।
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छोटे लाल ( फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
उसकी दो बेटियां हैं। संध्या (11) और शिवांशी (सात माह)। मां की हालत देख लगातार रो रही शिवांशी को गोद में लेकर चुप कराने की कोशिश कर रही संध्या के आंसू भी थमने का नाम नहीं ले रहे थे। घर के बाहर मौजूद लोगों में चर्चा थी कि क्या पता था कि सरकारी ठेके से भी जहरीली शराब बेची जा रही है।
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एक ही परिवार के चार लोगों की मौत - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को दोपहर करीब ढाई बजे एक दरोगा सफेद कपड़ा लेकर वहां पहुंचे और लाशों को लपेटने की मशक्कत शुरू हो गई पर बेटों के शवों के सिरहाने बैठी मालती लाशों को छोड़ने को तैयार नहीं थी। इस बुजुर्ग महिला का विलाप वहां मौजूद अन्य महिलाओं की भी आंखों में बरबस आंसू ला रहा था। छोटेलाल के बाकी के तीन बेटे मोनू (18) आकाश (14) और विकास (12) मां को संभालने की कोशिश कर रहे थे।
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