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खौफ का पर्याय था एनकाउंटर में मारा गया भाटी, डर से पीड़ित ने सरकार से मांगी थी इच्छामृत्यु, तस्वीरें

Mon, 23 Apr 2018 10:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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नोएडा में एसटीएफ के साथ एनकाउंटर में मारे गए दुर्दांत अपराधी बलराज भाटी की तलाश लखनऊ पुलिस को भी थी। कहा जाता है कि मुन्ना बजरंगी के साले पुष्पजीत और करीबी तारिक की हत्या में बलराज के सहयोगी सुंदर भाटी गैंग का हाथ था।

यूपी एसटीएफ को लंबे समय से बलराज की तलाश थी। पूर्वांचल के एक बाहुबली गिरोह के साथ मिलकर सुंदर भाटी और बलराज भाटी गैंग ने कई घटनाओं को अंजाम दिया। 2016 में हुई मुन्ना बजरंगी के साले पुष्पजीत और पिछले साल चिनहट में हुए तारिक के मर्डर में भी इस गिरोह पर ही आशंका जाहिर की गई थी, लेकिन पुलिस को न तो पक्के सुबूत मिले थे और न ही बलराज भाटी हाथ लगा था।

अब बलराज के मारे जाने पर दावा किया जा रहा है कि वह लखनऊ में दो अनसुलझी मर्डर मिस्ट्री में भी शामिल था और उस पर पूर्वांचल के एक विधायक का वरदहस्त था। बलराज भाटी न सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय था बल्कि उसके किस्से पड़ोसी राज्य हरियाणा और दिल्ली तक मशहूर थे। इन दोनों राज्यों की पुलिस ने भी उस पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। (एनकाउंटर के बाद खोखे दिखाता एसटीएफ का जवान, घेरे में भागता बलराज भाटी।)

अब अमर सिंह की तलाश
बलराज को ढेर करने के बाद अब एसटीएफ की लिस्ट में दूसरे नंबर पर दर्ज अमर सिंह की तलाश की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि एसटीएफ अब तेजी से खूंखार अपराधी अमर सिंह की तलाश कर रही है।
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बलराज भाटी के एनकाउंटर पर आईजी बोले-
उत्तर प्रदेश एसटीएफ के आईजी अमताभ यश का कहना है कि यूपी एसटीएफ और हरियाणा एसटीएफ के संयुक्त ऑपरेशन में कुख्यात अपराधी बलराज भाटी मारा गया। इस ऑपरेशन के दौरान क्रॉस फायरिंग में हरियाणा पुलिस के दो जवानों को भी गोली लगी है। बलराज भाटी पर हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने एक-एक लाख रुपये और यूपी पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
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भनक लगते ही भागा, लेकिन ढेर कर दिया गया
एसटीएफ ने सुबह करीब 11:20 बजे बलराज की कार का पीछा शुरू किया। भनक लगते ही बदमाशों ने भागने का प्रयास किया। इस कोशिश में दो बाइकों व एक एस्टीम कार में टक्कर मार दी। इससे उनकी कार अनियंत्रित होकर फुटपाथ पर चढ़ गई और उसका टायर फट गया। इसके बाद कार में से तीन बदमाश बाहर निकले और फायरिंग करते हुए सेक्टर-41 में प्रयाग अस्पताल की तरफ भागने लगे। बलराज आगाहपुर स्थित बीकानेर रेस्तरां के बगल के अहाते में घुस गया। एसटीएफ ने अहाते में बलराज को घेर लिया। फायरिंग में उसके पैर में एक गोली लगी। इसके बाद भी वह बांस की सीढ़ी से अहाते की छत पर पहुंच गया। एसटीएफ ने बीकानेर रेस्तरां की छत पर चढ़कर और नीचे से फायरिंग करते हुए करीब 20 मिनट में उसे मार गिराया।

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बलराज भाटी - फोटो : amar ujala
दबंगई के लिए लगाया था ‘भाटी’
कुख्यात बलराज सुंदर भाटी के गिरोह में शामिल हुआ तो अपने नाम के साथ ‘भाटी’ लगाने लगा। इसके पीछे उसका मकसद अपने नाम का खौफ कायम करना था। वह मानता था कि भाटी टाइटल लगाने के बाद बदमाशों में उसका रौब ज्यादा जमता। पुलिस अधिकारियों की मानें तो वह जाट था, लेकिन खुद को गुर्जर ही बताता था। जरायम की दुनिया में उसकी पहचान भाटी गिरोह के शार्प शूटर की थी। (घेरेबंदी करते एसटीएफ के जवान।)
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सोशल मीडिया पर पुलिस की तारीफ
सेक्टर-49 थाने से चंद मीटर की दूरी पर सोमवार को भीड़भाड़ वाले बाजार में एनकाउंटर से सोशल मीडिया पर लोगों ने हरियाणा और यूपी एसटीएफ की जमकर तारीफ की है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि इस तरह के एनकाउंटर से ही अपराध कम होता है। नोएडा पुलिस तो एनकाउंटर के नाम पर दिखावा कर रही है। सोशल मीडिया लोगों ने पोस्ट करके कहा कि ऐसी मुठभेड़ हों तो तभी भयमुक्त समाज का निर्माण होगा।
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बुलंदशहर में भी था बलराज का खौफ, डर से पीड़ित ने मांगी थी इच्छा मृत्यु
(बुलंदशहर)। साहब, पुलिस बलराज को नहीं मारती तो एक दिन वह मुझे जरूर मार देता। यह कहना है बेटे की हत्या के बाद जिंदा बचे एक मात्र गवाह जयपाल सिंह का। साल 2014 में बलराज भाटी ने ही उनके बेटे विपिन उर्फ लाला की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। चार साल से इस मामले में गवाही न हो पाने पर जयपाल ने बीते सितंबर माह में मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, डीएम को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी थी। आतंक का पर्याय बन चुके बलराज भाटी का एनकाउंटर में अंत होने की सूचना मिली तो बेटे की हत्या का दर्द कुछ कम हो गया। यूपी, हरियाणा व दिल्ली पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके गांव ढूंसरी, बुलंदशहर निवासी अपराधी बलराज भाटी का अंत सोमवार को यूपी एसटीएफ और हरियाणा पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में हो गया।
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