फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेरियाट्रिक सर्जरी के दो साल बाद करें बच्चे की प्लानिंग, नहीं तो झेलनी पड़ेगी परेशानी

Sat, 01 Feb 2020 04:40 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 6
डॉ अमित और डॉ मंदाकिनी - फोटो : अमर उजाला
अब अल्ट्रासाउंड तकनीक एडवांस हो गई है। इससे पांच सप्ताह के भ्रूण की स्थिति की जांच की जा सकती है। समस्या है तो दवाओं से ठीक भी किया जा सकेगा। इससे प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं कम होंगी। यह कहना है लॉस एंजिल्स से आईं डॉ. अपर्णा श्रीधर का। वह स्मृति उपवन में चल रहे 63वें ऑल इंडिया ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी (एआईसीओजी 2020) के तीसरे दिन शुक्रवार को हैंड जोन सिमुलेटर कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।

 
विज्ञापन

2 of 6
डॉ अपर्णा श्रीधर - फोटो : अमर उजाला
डॉ. अपर्णा ने बताया कि ट्रांस एब्डॉमिनल और ट्राब्स वजाइनल अल्ट्रासाउंड तकनीक में लगातार विकास हो रहा है। अभी तक 15 से 20 सप्ताह में अल्ट्रासाउंड से शिशुओं की बीमारियों की पहचान हो पाती थी। इस दौरान हैंड जोन सिमुलेटर कार्यशाला की अध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि  विशेषज्ञों ने विदेशों में अपनाई जा रही तकनीक की जानकारी दी। इस दौरान संयोजक के रूप में डॉ. तृप्ति बंसल और डॉ. मोनिका अग्रवाल मौजूूद रहीं।
विज्ञापन

3 of 6
डॉ महेश - फोटो : अमर उजाला
इनोवेशन से रोका पोस्टपार्टम हैमरेज
प्रसव के बाद रक्तस्राव से बचने के लिए टेक्नीक विकसित की गई है, जिसे सीओएमओसी एमजी टेक्नीक नाम दिया है। वर्ष 2012 में इसका पेटेंट कराया। इसमें जिस स्थान पर दबाव से रक्तस्राव होता है, वहां टांका लगा देते हैं। इसी तरह यूटेरिन आटरी में भी टांका लगा दिया जाता है। इससे रक्तस्राव की आशंका खत्म हो जाती है। खास बात यह है कि इस डिवाइड के ऊपर क्यूआर कोड दिया गया है, जिसे स्कैन करते ही मोबाइल में इसे लगाने का वीडियो चलने लगता है। करीब 55 मरीजों पर इसका प्रयोग किया गया है। -डॉ. महेश गुप्ता, गुजरात

 

4 of 6
डॉ अमित - फोटो : अमर उजाला
बेरियाट्रिक सर्जरी के दो साल बाद करें बच्चे की प्लानिंग
मोटापा घटाने के लिए कुछ युवतियां बेरियाट्रिक सर्जरी कराती हैं, लेकिन इस सर्जरी के दो साल बाद ही बच्चे की प्लानिंग करनी चाहिए। इस सर्जरी के साल भर बाद गर्भधारण कराने वाली 80 फीसदी महिलाओं को समय से पहले प्रसव कराना पड़ा, क्योंकि इस सर्जरी के चलते गर्भ में पल रहे शिशु को पूरी डाइट नहीं मिल पाती है। उसके शरीर का विकास प्रभावित होता है। बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद खानपान में नियंत्रण जरूरी है। एक्सरसाइज भी होना चाहिए अन्यथा दोबारा मोटापा हो सकता है। युवतियों को शुरुआत से ही मोटापा पर काबू रखना चाहिए। -डॉ. अमित पाटकी, मुंबई

 
विज्ञापन

5 of 6
डॉ चंद्रावती - फोटो : अमर उजाला
पोषक तत्वों की कमी भी गर्भपात की बड़ी वजह
भारतीय महिलाओं के खानपान में पोषक तत्वों की कमी है। संतुलित भोजन नहीं होने की वजह से दुनियाभर में करीब 15 फीसदी गर्भपात होते हैं। इसमें भारतीय महिलाओं का आंकड़ा करीब 32 फीसदी है। 7.5 फीसदी मामलों में तो बार-बार गर्भपात होता है। खानपान में मौसमी फल, हरी सब्जियों, दूध और दूध से बने पदार्थ, मांस और अड्डे को अलग-अलग दिन लिया जाना चाहिए। इसके अलावा ओरल डाइड्रोजेस्टेरोन भी दिया जाता है। यह गर्भपात को रोकता है और गर्भधारण करने की क्षमता बढ़ाता है। - डॉ. चंद्रावती आयोजन समिति अध्यक्ष

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
डॉ मंदाकिनी - फोटो : अमर उजाला
जांच से पता चलेगा...बीपी बढ़ेगा या नहीं
करीब 10 फीसदी गर्भवती महिलाओं को बीपी की शिकायत होती है, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों को मुश्किलों का सामना करना पड़ जाता है। गर्भवती महिलाओं को आमतौर पर 20 हफ्ते बाद बीपी की शिकायत होती है, लेकिन, ब्लड टेस्ट के जरिये बीपी की समस्या को पहले ही पकड़ा जा सकता है। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में होने वाले ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित किया जा सकता है। जिन महिलाओं का ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है, उन्हें भी गर्भधारण करने अथवा उससे पहले पीएलजीएफ ब्लड टेस्ट कराना चाहिए। - डॉ. मंदाकिनी प्रधान, एसजीपीजीआई
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें