लखनऊ में शुक्रवार को बचाव के बाद बरती गई लापरवाही से बीमार मगरमच्छ की जान चली गई। मगरमच्छ सुबह शहीद पथ स्थित इकाना अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास गोमती नदी के किनारे जंगली झाड़ियों में दिखा था।
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मगरमच्छ
- फोटो : amarujala
सूचना के बाद पहुंची निजी संस्था और वन विभाग की टीम ने उसे पकड़ कर काबू तो कर लिया, लेकिन कुकरैल पहुंचने के बाद इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इकाना क्रिकेट स्टेडियम केपास नदी से सटे जंगली इलाकों में शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने झाड़ियों में मगरमच्छ देखा।
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बचाव कार्य करती टीम
- फोटो : amarujala
मगरमच्छ नदी के किनारे की झाड़ियों में लंबे समय तक बिना हरकत के ही पड़ा हुआ था। उसके पास पहुंचे ग्रामीणों को उसके पास से काफी दुर्गंध भी आ रही थी। इलाकाई लोगों ने इसकी सूचना पुलिस और वन विभाग को दी। डीएफओ अवध मनोज सोनकर ने बताया कि मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम और निजी संस्था टर्टिल सर्ववाइवल एलायंस (टीएसए) की टीम ने मिलकर मगरमच्छ का बचाव कार्य शुरू किया।
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बचाव कार्य करती टीम
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संकरी सर्विस रोड के किनारे झाड़ियों में दुबके मगरमच्छ को निकालने में रेंजर सीएल गुप्ता, आरके सिंह, राम धीरज यादव समेत 12 लोगों से अधिक की टीम को मशक्कत करनी पड़ी। जाल डालकर मगरमच्छ को पकड़ा जा सका।
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बचाव कार्य करती टीम
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टीम के मुताबिक जब मगरमच्छ को पकड़ा गया उस समय उसके शरीर के कई हिस्से संक्रमण से ग्रस्त दिख रहे थे, कुछेक जगह ऊपरी खाल तक सड़ चुकी थी। बचाव कार्य के बाद दोपहर पौने तीन बजे टीम उसे लकर कुकरैल के टीएसए सेंटर पहुंची। जहां उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
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बचाव कार्य करती टीम
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डीएफओ मनोज सोनकर ने बताया कि मगरमच्छ करीब 6 फीट से अधिक लंबा था। उसकी उम्र चार से छह साल के बीच बताई जा रही है।हो सकता है कि ये कहीं से बहकर नदी में आ गया रहा हो। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मुख्य पशुचिकित्साधिकारी की अगुवाई में बनी टीम ने उसका पोस्टमार्टम किया, रिपोर्ट आने पर ही सही कारण पता चल सकेगा।
रेस्क्यू स्टाफ के मुताबिक मगरमच्छ में संक्रमण का कारण गोमती नदी का प्रदूषण भी हो सकता है। ये भी हो सकता है कि उसे कोई घाव हुआ हो और उससे संक्रमण हुआ हो। इसको लेेकर भी विचार करने की जरूरत है।