लखनऊ में जयदीप सरकार हत्याकांड पुलिस के लिए पहेली बन गया है। सीन क्रिएट करने और काफी कोशिशों के बाद भी मामला सुलझ नहीं सका है।
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महानगर में डॉ. जयदीप सरकार की हत्या के मामले में पुलिस और फोरेंसिक टीम ने शनिवार दोपहर वारदात को खुदकुशी मानते हुए घटना का नाट्य रूपांतरण किया।
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डॉ. सरकार की जगह उनके भतीजे कान्हा को छत पर बैठाया गया। उसके बायें हाथ में पिस्टल पकड़ाकर पहले बायीं कनपटी और फिर माथे के बीच निशाना साधने का बारीकी से निरीक्षण किया गया। पिस्टल पकड़ने, गोली चलाने और फिर पिस्टल माथे के बीच लगाने के दौरान हाथों की गतिविधियों को देखा गया।
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नाट्य रूपांतरण के बाद फोरेंसिक एक्सपर्ट्स यह अंदाजा लगा रहे हैं कि डॉ. सरकार ने पहले बायीं कनपटी पर गोली मारी, फिर माथे पर निशाना लगाया। हालांकि, एक गोली सिर के आरपार होने के छह-सात सेकंड बाद दूसरी गोली माथे पर मारने की गुत्थी सुलझ नहीं सकी।
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डॉ. जयदीप सरकार के पिता डॉ. एआर सरकार को नहीं पता था कि फोरेंसिक और पुलिस की टीम घटना का नाट्य रूपांतरण करने आई है। उन्होंने कमरे में बेटे डॉ. सुदीप और पोते कान्हा को नहीं देखा तो ढूंढने लगे। इसी बीच छत पर टीम की मौजूदगी देखकर वह वहां आ गए। बेटे जयदीप की जगह पोते कान्हा को पूरा घटनाक्रम दोहराते हुए देखा तो उनकी आंखें नम हो गईं। वह खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। किसी तरह उन्हें समझाकर अपने कमरे में भेजा गया।
डॉ. सरकार के घर फोरेंसिक टीम आने की जानकारी पाकर आसपास के लोग भी मौके पर जुट गए। इलाकाई लोगों ने कहा कि फोरेंसिक टीम ने अगर सही जांच की तो डॉ. सरकार की मौत का राज सामने आ जाएगा। सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच में बहुत सावधानी बरतनी होगी।