मशहूर शायर मुनव्वर राना के खिलाफ हिंदू आस्था व दलित समाज के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में सामाजिक सरोकार फाउंडेशन के उपाध्यक्ष पीएल भारती ने हजरतगंज थाने में शुक्रवार को मुकदमा दर्ज कराया है। इसकी जांच शुरू हो गई है। एसीपी हजरतगंज राघवेंद्र मिश्रा के मुताबिक शुक्रवार दोपहर में सामाजिक सरोकार फाउंडेशन के उपाध्यक्ष पीएल भारती ने तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया कि मुनव्वर राणा ने भगवान वाल्मीकि की तुलना तालिबानियों से की है। यह हिंदू आस्था व दलितों का अपमान है। मुनव्वर राना ने कहा था कि तालिबान भी दस साल बाद वाल्मीकि होंगे। वह एक लेखक थे। हिंदू धर्म में तो किसी को भी भगवान कह देते हैं। राना ने यह टिप्पणी कर न सिर्फ हिंदू धर्म पर हमला नहीं बोला है बल्कि दलित समाज, वाल्मीकि के अनुयायियों और भगवान वाल्मीकि के खिलाफ जहर उगला है। एसीपी हजरतगंज के मुताबिक मुनव्वर राना के खिलाफ धार्मिक भावना भड़काने, सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध करने व एससीएसटी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
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munawwar rana
- फोटो : amar ujala
वहीं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा युवा और हिंदू महासभा ने भी तहरीर दी है। आपको बता दें कि हाल ही में शायर मुनव्वर राना ने तालिबान का समर्थन किया था।
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- फोटो : अमर उजाला
उनका कहना था कि तालिबानी लड़ाकों ने किसी मुल्क पर हमला नहीं किया बल्कि उन्होंने अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में अपनी सैन्य ताकत के बलबूते जो सरकार बनाई गई थी उसे ही उखाड़ फेंका है। इस तरह तालिबान ने तो अपने मुल्क को आजाद कराया है।
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मुनव्वर राना का कहना था कि रही बात कट्टरपंथ की तो अफगानिस्तान में शरीयत कानून तो पहले भी था। जिसे कुछ लोग पसंद नहीं करते थे। अमेरिका ने सैन्य ताकत के बल पर अफगानिस्तान में जो सरकार बनाई थी उस पर पूरी तरह से नियंत्रण भी उसी का था।
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तालिबान ने अमेरिका और उसके द्वारा बनाई गई सरकार से अपने मुल्क को आजाद कराया है। उन्होंने कहा कि जब हिंदुस्तान अंग्रेजों का गुलाम था तो देशवासियों ने उसे आजाद कराया गया था। उसी तरह तालिबान ने भी अपना मुल्क आजाद करा लिया तो क्या दिक्कत है।
मुनव्वर राना का कहना है कि जिस किस्म की क्रूरता अफगानिस्तान में है, उससे ज्यादा क्रूरता तो हमारे यहां भी है। पहले रामराज था, मगर अब काम राज है। भगवान राम से काम है तो ठीक है। उन्होंने कहा कि जितनी एके-47 तालिबान के पास नहीं होंगी, उतनी तो हिंदुस्तान के माफियाओं के पास हैं। तालिबानी तो हथियार छीनकर और मांगकर लाते हैं, मगर हमारे यहां तो माफिया खरीदते हैं।