42 वर्ष की उम्र में लगातार साढ़े 11 घंटे बिना रुके 76 किमी दौड़कर अंजली चौरसिया ने यह साबित कर दिया कि जज्बा हो तो कुछ भी मुमकिन है। यह उपलब्धि हासिल करते ही वाणिज्य कर विभाग, बाराबंकी में असिस्टेंट कमिश्नर पद पर कार्यरत अंजली का नाम अल्ट्रा रनर के रूप में दर्ज हो गया। ऐसा एक एथलीट के 50 किमी से अधिक की दौड़ पूरी करने पर दिया जाता है।
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अंजली चौरसिया
- फोटो : अमर उजाला
35वीं वाहिनी पीएसी के सिंथेटिक ट्रैक पर अंजली ने सुबह साढ़े चार बजे दौड़ शुरू की और शाम चार बजे 75.65 किमी तक की दूरी तय करने के बाद इसे पूरा किया। इस दौरान मांसपेशियों में खिंचाव से बचने के लिए उन्होंने तीन से चार बार स्ट्रेचिंग ब्रेक लिया।
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अंजली चौरसिया
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दो साल पहले ही शुरू किया दौड़ना
सफलता से बेहद उत्साहित अंजली चौरसिया ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में बताया कि उन्होंने दो साल पहले फिटनेस के रूप में दौड़ना शुरू किया था। कुछ समय बाद यह उनके रूटीन में शामिल हो गया।
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अंजली चौरसिया
- फोटो : अमर उजाला
पिछले साल एक-दो मैराथन में भाग लेकर उन्होंने क्षमता को आंका। इस दौरान उन्हें लगा कि वह मैराथन (42 किमी) से ज्यादा दूरी तय कर सकती है। यह सोचकर ट्रेनिंग शुरू की और 75.65 किमी दौड़ने में सफल रही।
उम्र को नहीं होने दिया जज्बे पर हावी
अंजली ने कहा कि दौड़ने से पहले उन्हें खुद पर विश्वास था। शुरुआत मेें शरीर को ढलने में थोड़ा समय लगा, लेकिन बाद में सब सामान्य हो गया। बताया कि दौड़ से आई थकान से उबरने में कम से कम दो दिन का समय लगेगा। यह भी कहा कि मैंने कभी अपनी उम्र को जज्बे पर हावी नहीं होने लिया। इसका नतीजा मुझे अल्ट्रा रनर के खिताब के रूप में मिला। यह भी कहा कि मैं आगे भी इसी तरह दौड़ती रहूंगी।