फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इन आईपीएस की लोकप्रियता का ये है सबूत, गली के पानवाले और रेहड़ीवाले भी फोन पर करते थे बातचीत

Fri, 13 Jul 2018 11:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 6
आईपीएस आशुतोष पांडेय - फोटो : amarujala
लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। आशुतोष पांडेय की अपनी अलग पहचान रही है। उन्होंने राजधानी में पुलिस के लिए जमीनी नेटवर्क तैयार करने के साथ ही हाईटेक योजनाएं भी शुरू कीं।
विज्ञापन

2 of 6
डेमो
आशुतोष पांडेय राजधानी के लोकप्रिय एसएसपी में शुमार रहे। पुलिसकर्मियों को मुखबिर तंत्र का इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा तरीका सिखाने के साथ ही उन्होंने मोबाइल नंबर पर शिकायत दर्ज कराने का हाईटेक सिस्टम लॉन्च किया था। उनकी यह योजना जनता के बीच काफी लोकप्रिय हुई थी। आशुतोष पांडेय राजधानी के एसएसपी की कुर्सी पर दो बार आए। 
विज्ञापन

3 of 6
डेमो
पहली बार वह एसएसपी बने तो बसपा के कार्यकाल में डीआईजी/एसएसपी के तौर पर उनकी तैनाती रही। हर बार उन्होंने अपने कार्यकाल को सर्वश्रेष्ठ साबित किया। आशुतोष पांडेय की लोकप्रियता ही थी कि गली-गली के पानवाले और चाटवाले सहित रेहड़ीवाले सीधे उनसे फोन पर बातचीत करते थे। उनके मोबाइल फोन पर ऐसे ढेरों नंबर मौजूद थे और यही उनका मुखिबर तंत्र था।

4 of 6
- फोटो : डेमो
थानेदार की लोकेशन पता करने के लिए वह संबंधित थाना क्षेत्र के किसी भी पानवाले को फोन कर लेते थे। पानवाले से लोकेशन पूछकर वे थानेदार को फोन करते और बताते कि वह कहां किसके साथ खड़ा होकर क्या कर रहा है। उन्होंने फरियादियों के लिए एक मोबाइल नंबर भी शुरू किया था। इस नंबर पर कॉल करते ही शिकायत दर्ज करके फरियादी को रिफरेंस नंबर दिया जाता था। 
विज्ञापन

5 of 6
- फोटो : डेमो
उसकी शिकायत संबंधित थाने को भेज दी जाती थी। रिफरेंस नंबर से वह अपनी शिकायत पर होने वाली सारी कार्रवाई के बारे में पता कर सकता था। उनकी इस योजना की जनता के बीच काफी सराहना हुई थी। हालांकि, बाद में किन्हीं वजहों से योजना बंद हो गई। उनके कार्यकाल में कई खूंखार अपराधियों का मुठभेड़ में खात्मा भी किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
- फोटो : डेमो
एक वाहन की चेकिंग के लिए तय किया था 30 सेकंड का वक्त
आशुतोष पांडेय ने वाहन चेकिंग के जरिए पुलिस की प्रताड़ना की शिकायतों को काफी गंभीरता से लिया था। यही वजह थी उन्होंने एक वाहन की चेकिंग के लिए अधिकतम 30 सेकंड की सीमा तय कर दी थी। पुलिस उनके निर्देशों का पालन कर रही है या नहीं, यह जानने के लिए वह खुद ही वाहन चेकिंग के स्थल पर पहुंच जाते थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें