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Yoga Tips: गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकती है थायरॉइड की समस्या, ये योगासन आपके लिए मददगार

Thu, 24 Nov 2022 12:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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थायरॉइड विकारों से बचाव के लिए क्या करें? - फोटो : istock
थायरॉइड विकारों की समस्या वैश्विक स्तर पर बढ़ती हुई रिपोर्ट की जा रही है, यह शरीर में कई प्रकार की जटिलताओं को बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया है कि थायरॉइड कुछ स्थितियों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन सकती है, ऐसे में इससे बचाव के उपाय करते रहना सभी के लिए आवश्यक है। लाइफस्टाइल और आहार में बदलाव करके थायरॉइड विकारों से बचा जा सकता है। थायरॉइड, गले में स्थित तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो शरीर के लिए आवश्यक ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) और थायरोक्सिन (T4) जैसे हार्मोन्स का उत्पादन करती है। 

अध्ययनों में पाया गया है कि थायरॉइड विकारों में शरीर का वजन बढ़ने या कम होने का दिक्कत हो सकती है, कुछ गंभीर स्थितियों में इसके कारण कोमा जैसे मामले भी विकसित होते देखे गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि दिनचर्या में योगासनों को शामिल करके थायरॉइड विकारों और इसकी जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

योगासन, थायरॉइड ग्रंथि के कार्य को बेहतर करने और हार्मोन्स के स्राव को नियंत्रित रखने में मददगार हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि इसके लिए किन योगासनों के अभ्यास की आदत लाभकारी हो सकती है।
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सेतुबंधासन योग से होने वाले फायदे - फोटो : Pixabay
सेतुबंधासन योग से मिलता है लाभ

सेतुबंधासन, जिसे ब्रिज पोज के नाम से भी जाना जाता है यह थायरॉइड विकारों, विशेषकर हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायरॉइड) के लिए एक प्रभावी योग है। यह गर्दन को स्ट्रेच करने के साथ थायरॉइड ग्रंथि में रक्त परिसंचरण को सुधारने में सहायक है। सेतुबंधासन योग के अभ्यास से थायरॉइड रोग की जटिलताओं को कम करने में लाभ मिल सकती है। यह मुद्रा अस्थमा और सिरदर्द की समस्या को कम करने और मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए भी प्रभावी है।
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हलासन योग से शरीर को होने वाले लाभ - फोटो : Pixabay
हलासन योग का करिए अभ्यास (प्लो पोज)

हलासन योग के दौरान गर्दन की बेहतर स्ट्रेचिंग हो जाती है, यह थायरॉइड ग्रंथि को उत्तेजित करने में मददगार अभ्यास है। हालांकि, यह मुद्रा हाइपरथायरायडिज्म वाले लोगों को नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह हार्मोन के स्राव को बढ़ा देता है। तंत्रिका तंत्र को आराम देने के साथ-साथ पेट को कम करने और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में भी इस योग के नियमित अभ्यास की आदत से मदद मिलती है।
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मत्स्यासन योग से होने वाले स्वास्थ्य लाभ - फोटो : istock
मत्स्यासन (फिश पोज) से थाइरॉइड में लाभ

मत्स्यासन या फिश पोज के दौरान शरीर की बनी स्थिति थायरॉयड ग्रंथि में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में मदद करती है। गर्दन की स्ट्रेचिंग के साथ थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित करने में भी इससे लाभ पाया जा सकता है। सिर को उल्टा करने के दौरान यह थायरॉयड ग्रंथि में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने वाला अभ्यास है जो हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों के लिए अच्छा माना जाता है। यह मुद्रा पेट की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखने में मदद करती है। 



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नोट:
यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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