कातिल केशव व पिता दिनेश
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नशा नहीं मिलने पर उसे बेचैनी, घबराहट और अनिद्रा की शिकायत होने लगती है। साथ ही, स्वभाव गुस्सैल हो जाता है। ऐसे में नशापान करने में कोई रुकावट बनता है तो वह उसे रास्ते से हटाने की सोचने लगता है। नशे ने केशव को भी इस कदर कैद में जकड़ लिया कि उसने परिजनों को ही मौत के घाट उतार दिया।