प्राणवायु वाहक लाल रक्त कण
रक्त का 55 फीसदी भाग तरल प्लाज्मा और 45 फीसदी भाग कोशिकीय (सेल्स) होता है। कोशिकीय भाग में 99 फीसदी लाल रक्त कण और मात्र एक फीसदी सफेद रक्त कण और प्लेटलेट्स होते हैं। लाल रक्त कण और सफेद रक्त कण जीवित संपूर्ण कोशिकाएं होती हैं, जबकि प्लेटलेट्स कोशिका के टुकड़े होते हैं।
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आपके शरीर में प्रति सेकंड 24 लाख नए लाल रक्त कण बनते हैं, इतने ही प्रति सेकंड नष्ट भी हो जाते हैं। आपके रक्त में एक क्यूबिक मिली लीटर (एक बूंद का छोटा हिस्सा) में करीब पांच लाख लाल रक्त कण होते हैं। हर लाल रक्त कण कोशिका में एक जैविक स्टॉप वाच होती है, जो निश्चित समयोपरांत बंद हो जाती है।
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लाल रक्त कणों के बनने की प्रक्रिया का नियंत्रण किडनी में होता है। किडनी खराब होने पर अल्परक्तता एनीमिया रोग इसी कारण होता है। आपको जीवित रखने के लिए प्रति क्षण लाखों लाल रक्त कोशिकाएं अपना जीवन उत्सर्ग करती हैं। लाल रक्त कणों की उत्पत्ति लाल अस्थि मज्जा (रेड बोन मैरो) में होती है।
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लाल रक्त कण ऑक्सीजन से भरी कोशिकाएं होती हैं, लेकिन अपनी ऊर्जा की आवश्यकता के लिए वे ऑक्सीजन का उपयोग नहीं करती हैं। लाल रक्त कण ही शरीर की वे कोशिकाएं हैं, जिनमें केंद्रक ही नहीं, माइटोकोंड्रिया भी नहीं होते हैं। लाल रक्त कणों में केंद्रक (न्यूक्लियस) नहीं होता है। लाल रक्त कणों के उत्पत्ति की प्रारंभिक अवस्था में उनमें केंद्रक होता है, जिसे बाहर निकाल दिया जाता है, ताकि प्राणवायु वाहक हीमोग्लोबिन के लिए स्थान हो। एक लाल रक्त कण में ऑक्सीजन के लिए 28 करोड़ हीमोग्लोबिन मॉल्युकूल्स होते हैं।
माइटोकोंड्रिया ऑक्सीजन का उपयोग कर कोशिकाओं को ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं। लाल रक्त कण बिना उनके, बिना ऑक्सीजन के ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। केंद्रक नहीं होने के कारण उनमें वायरस नहीं घुसते। वायरस कोशिका के अंदर ही जीवित रह सकते हैं। मलेरिया के परजीवी (पैरासाइट) का मानव-हीमोग्लोबिन प्रिय भोजन होता है, मलेरिया लाल रक्त कणों का रोग होता है।