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आज का योग: पीलिया की समस्या होगी दूर, बस रोजाना इन योगासनों का करें अभ्यास

Fri, 01 Oct 2021 12:17 PM IST
Abhilash Srivastava लाइफ-स्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीलिया में होने वाली समस्याएं - फोटो : iStock
लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। रक्त में रासायनिक स्तरों को नियंत्रित करने के साथ लिवर, पित्त का उत्पादन करता है। इसके अलावा शरीर से तमाम प्रकार के अपशिष्टों को बाहर निकालने में भी लिवर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लिवर में होने वाली किसी भी तरह की समस्या का असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है, लिवर में होने वाली ऐसी ही एक समस्या के कारण ही लोगों को पीलिया की बीमारी होती है। रक्त में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाने के कारण पीलिया की समस्या होती है। लिवर के ठीक से अपशिष्ट पदार्थ को बाहर करने की क्षमता में आई कमी के कारण यह समस्या होती है। पीलिया में लोगों की आंखें, त्वचा और नाखूनों में असामान्य रूप से पीलापन आ जाने की समस्या होती है। 

विशेषज्ञों की मानें तो नियमित रूप से योग करने वाले लोगों में पीलिया की समस्या होने का खतरा कम होता है। इसके अलावा कई प्रकार के प्राणायाम, लिवर को स्वस्थ रखने के साथ पीलिया के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकते हैं। आइए ऐसे ही कुछ प्राणायामों के बारे में जानते हैं। 
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कपालभाति प्राणायाम के फायदे - फोटो : Pixabay
कपालभाति प्राणायाम 
योग गुरु के मुताबिक कपालभाति प्राणायाम लिवर को मजबूती देने के साथ उसे कई प्रकार की बीमारियों से सुरक्षित रखने में सहायक होता है। लिवर संबंधी बीमारियों के कम होने से पीलिया से भी छुटकारा मिलता है। इस आसन को करने के लिए भी सबसे पहले शरीर को एकदम से सीधा रखते हुए ध्यानपूर्वक में बैठ जाएं । इसके बाद एक गहरी श्वास लें। अब इसे नाक से तेजी से छोड़ें, इसमें झटके से पेट को अंदर की ओर ले जाएं। सांस छोड़ते समय नाक से छक की आवाज़ होगी। इस क्रिया को कम से कम 10 मिनट तक करते रहें। 
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प्राणायाम करने के लाभ - फोटो : iStock
भस्त्रिका प्राणायाम से मिलता है लाभ
जिन लोगों को पीलिया की शिकायत होती है, स्वास्थ्य विशेषज्ञ उन्हें भस्त्रिका प्राणायाम करने की सलाह देते हैं। लिवर को स्वस्थ रखने के साथ भस्त्रिका प्राणायाम, पीलिया के लक्षणों को कम करने में भी सहायक माना जाता है। इस आसन को करने के लिए भी सबसे पहले शरीर को एकदम से सीधा रखते हुए ध्यानपूर्वक में बैठ जाएं । हाथों को ज्ञान मुद्रा बनाकर दोनों घुटनों पर रखें। कोहनी और कंधों को ढीला छोड़ दें। अब धीरे-धीरे लम्बी और गहरी श्वास लें और छोड़ें। इस योग को रोजाना 5-10 मिनट तक कर सकते हैं। 
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अनुलोम-विलोम प्राणायाम के लाभ - फोटो : iStock
अनुलोम विलोम प्राणायाम
अनुलोम विलोम को सेहत के लिए सबसे फायदेमंद प्राणायामों में से एक माना जाता है। लिवर के साथ फेफड़े और हृदय के स्वास्थ्य में भी इस प्राणायाम की मदद से सुधार किया जा सकता है। रोजाना इस आसन को करने से इम्यूनिटी भी बढ़ती है। इस आसन को करने के लिए भी सबसे पहले शरीर को एकदम से सीधा रखते हुए ध्यानपूर्वक में बैठ जाएं। बाएं हाथ से ज्ञान मुद्रा बनाकर दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से श्वास भरें। अब बाई नासिका बंद करें और दाईं नासिका से श्वास छोड़ें। इस क्रिया को अब दूसरी नाक से दोहराएं। इस योग को रोजाना 5-10 मिनट तक कर सकते हैं। 


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नोट:
यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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