जब सिनेमा नहीं हुआ करता था, तब लोगों के मनोरंजन का साधन रंगमंच हुआ करता था। आज सिनेमा ने अपनी शाखाओं को बड़ी कुशलता से फैला लिया है लेकिन आज भी एक तबका ऐसा है जिसके लिए रंगमंच पूज्यनीय है क्योंकि इनका मानना है कि रंगमंच न सिर्फ मनोरंजन का साधन है बल्कि ये लोगों को सामाजिक और भावात्मक रूप से जगाने का भी साधन है। रंगमंच सीखने वाला कलाकार बनने के साथ ही एक अच्छा इंसान भी बनता है। नाटक कलाकार और दर्शक दोनों के ही मन पर अपनी अलग छाप छोड़ता है। नाटक की इस विधा को जीवित रखने के लिए और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए ही विश्व रंगमंच दिवस मनाया जाता है। अगली स्लाइड्स से जानिए इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी।