सभ्यता की शुरुआत से ही युद्ध मानवता के लिए विनाशकारी रहा है। बीती सदी में मनुष्य सभ्यता दो महायुद्धों की विभीषिका की साक्षी रही है। युद्ध ना केवल मनुष्यता को नेस्तनाबूद करता है बल्कि पीढ़ियों को तबाह कर देता है। बच्चों की सुनहरी ख्वाबों की बगिया और जिंदगी के सपने देखने वाली युवाओं की दुनिया को युद्ध की काली छाया कब धीरे-धीरे निगल जाती है पता ही नहीं चलता।
इन दिनों पूरी दुनिया तीसरे महायुद्ध की प्रलयंकारी छाया के बीच है। यूक्रेन और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक विवाद की परिणीति युद्ध के रूप में हुई है। अपने कड़े तेवर, लंबे राजनीतिक अनुभव और विश्व पटल पर एक अलग रसूख रखने वाले रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन का यूक्रेन पर हमले का निर्णय इस समय विश्व राजनीति के दिग्गज विश्लेषकों, पंडितों और पूरे यूरोप को सकते में डाल चुका है।
मौजूदा दौर में यूूूूूक्रेन के भीतर भयावह हालात हैं। युद्ध अपनी विभीषिका की काली छाया के साथ पसरा रहा है। यदि विश्व राजनीति में संयम ना दिखा तो दुनिया तीसरे महायुद्ध में उलझ सकती है। जाहिर है इसे रोकने की जरूरत है और उम्मीद है कि कुछ ही दिनों में युद्ध थम जाए क्योंकि जैसा कि होता आया है, युद्ध, जान, माल की हानि करते हैं और मृत्यु का भयावह और विभत्स तांडव खड़ा करते हैं, सो वही हो रहा है।