फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Republic Day 2024: देश के इस गांव में है खुद का संसद और संविधान, यहां नहीं चलता भारतीय कानून

Fri, 26 Jan 2024 07:43 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
मलाणा गांव - फोटो : अमर उजाला
Republic Day 2024: प्रतिवर्ष 26 जनवरी को भारत अपना गणतंत्र दिवस मनाता है। आजाद भारत के इतिहास में यह बहुत ही गौरवशाली दिन है। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान आधिकारिक रूप से लागू किया गया था। इसी के साथ भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बन गया। देश का संविधान कानून व्यवस्था के सुचारू संचालन का आधार होता है। भारत में भी संविधान के आधार पर पूरे देश की कानून व्यवस्था चलती है। प्रत्येक नागरिक को भारतीय संविधान के मुताबिक कुछ अधिकार दिए गए है, वहीं उनके कुछ कर्तव्य भी बताए गए हैं, जिनका अनुसरण कर वह एक आदर्श नागरिक बनते हैं। 

वैसे तो पूरा देश ही भारतीय संविधान और कानून के दायरे में आता है लेकिन भारत में एक ऐसा गांव भी है, जहां देश का कानून लागू नहीं होता। इस गांव का अपना संविधान है। यहां के लोगों की अपनी न्यायपालिका है, व्यवस्थापिका और कार्यपालिका है। गांव के लोगों का अपनी संसद है, जहां उनके द्वारा चयनित सदस्य होते हैं। ये गांव किसी पड़ोसी देश की सीमा पर नहीं, ना ही केंद्र शासित प्रदेश के अंतर्गत आता है। भारत का हिस्सा होते हुए भी खुद का कानून और संविधान लागू करने वाले इस गांव का इतिहास और यहां का रहन-सहन बहुत रोचक है। अगली स्लाइड में जानिए देश के इन अजीबोगरीब गांव और यहां के संविधान के बारे में।
विज्ञापन

2 of 5
मलाणा गांव - फोटो : अमर उजाला
विविधताओं वाले देश भारत में कई अजब-गजब जगहे हैं, उन्हीं में से एक मलाणा गांव है। यह गांव हिमाचल प्रदेश में स्थित है। इस गांव का अपना संविधान और संसद है। यहां भारतीय कानून नहीं चलता। गांव के लोगों के अपने नियम हैं, जिनका वह पालन करते हैं और नियम उल्लंघन पर उनकी खुद की तय की गई सजा दी जाती है। गांव में खुद की संसद है, जो सारे फैसले लेती है। 

कहां हैं मलाणा गांव 

मलाणा गांव हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के दुर्गम इलाके में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए कुल्लू से महज 45 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। इसके लिए मणिकर्ण रूट से कसोल से होते हुए मलाणा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट के रास्ते जा सकते हैं। हालांकि यहां पहुंचना आसान नहीं है। इस गांव के लिए हिमाचल परिवहन की सिर्फ एक बस ही जाती है, जो कि कुल्लू से दोपहर तीन बजे रवाना होती है।

 
विज्ञापन

3 of 5
मलाणा गांव - फोटो : istock
पर्यटकों के बीच लोकप्रिय मलाणा गांव

यह गांव पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है। जो भी इस गांव की खासियत, यहां के इतिहास और नियमों के बारे में सुनता है, वह मलाणा गांव जाना चाहता है और घूमना चाहता है। हालांकि उन्हें गांव के अंदर ठहरने की अनुमति नहीं है। 

4 of 5
मलाणा गांव के बाहर लगा चेतावनी बोर्ड। - फोटो : अमर उजाला
मलाणा गांव के नियम

मलाणा गांव के कई नियमों में से एक ये है कि बाहर से आने वाले लोग गांव में ठहर नहीं सकते हैं लेकिन इसके बावजूद यात्री मलाणा गांव आते हैं और गांव के बाहर ही टेंट लगाकर रुकते हैं। 

गांव के कुछ नियम काफी अजीब हैं। इसमें से एक नियम है कि गांव की दीवार को छूने की मनाही है। गांव की बाहरी दीवार को कोई भी बाहर से आने वाला व्यक्ति छू नहीं सकता और न ही पार कर सकता है। अगर वह नियम तोड़ते हैं तो उन्हें जुर्माना देना पड़ सकता है। पर्यटकों को गांव के बाहर ही टेंट में ठहरना होता है, ताकि वह गांव की दीवार तक को छू न सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मलाणा गांव - फोटो : अमर उजाला
मलाणा गांव का कानून

भारत का अंग होने के बाद भी हिमाचल प्रदेश के इस गांव की खुद की न्यायपालिका है। गांव की अपनी संसद है, जिसमें दो सदन है- पहली ज्योष्ठांग (ऊपरी सदन) और दूसरी कनिष्ठांग (निचला सदन)। 

ज्येष्ठांग में कुल 11 सदस्य हैं, इनमें से तीन कारदार, गुरु व पुजारी होते हैं, जो कि स्थाई सदस्य हैं। बाकि के आठ सदस्यों को ग्रामीण मतदान करके चयनित करते हैं।  कनिष्ठांग सदन में गांव के हर घर से एक सदस्य प्रतिनिधि होता है। संसद भवन के तौर पर यहां एक ऐतिहासिक चौपाल है, जहां सारे विवादों के फैसले होते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें