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Chaitra Navratri 2024: विदेशों में भी हैं देवी के शक्तिपीठ, जानिए दर्शन के लिए किन देशों की करनी होगी यात्रा

Thu, 04 Apr 2024 05:08 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

माता सती के अंग धरती पर कई जगहों पर गिरे, कुछ भारतीय सीमा से दूर विदेशों में विद्यमान हो गए, बाद में यहां मंदिरों की स्थापना हुई। इस लेख में जानिए विदेशों में स्थित देवी मां के शक्तिपीठों के बारे में।
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शक्तिपीठ - फोटो : सोशल मीडिया
Chaitra Navratri 2024 : इस वर्ष 9 अप्रैल 2024 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। नवरात्रि के मौके पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। इस दौरान लोग दुर्गा माता मंदिरों के दर्शन के लिए भी जाते हैं। भारत में कई  प्राचीन देवी मंदिर और शक्तिपीठ हैं, जिनकी कई धार्मिक मान्यताएं और प्राचीन कथाएं हैं। हालांकि देवी की महिमा केवल भारत में ही नहीं विदेशों तक है। देवी के 52 शक्तिपीठों में से कुछ भारत से बाहर स्थापित हैं। माता सती के अंग धरती पर कई जगहों पर गिरे, कुछ भारतीय सीमा से दूर विदेशों में विद्यमान हो गए, बाद में यहां मंदिरों की स्थापना हुई। इस लेख में जानिए विदेशों में स्थित देवी मां के शक्तिपीठों के बारे में।
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हिंगलाज मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया
पाकिस्तान में देवी के शक्तिपीठ

भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में कई प्राचीन हिंदू मंदिर हैं। यहां देवी शक्तिपीठ भी हैं। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंगुला शक्तिपीठ है, जहां माता हिंगलाज विराजमान हैं। मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का सिर गिरा था। इस प्राचीन शक्तिपीठ को नानी का मंदिर या नानी का हज कहा जाता है।
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लंका शक्तिपीठ - फोटो : facebook
श्रीलंका में शक्तिपीठ

श्रीलंका में इंद्राक्षी शक्तिपीठ स्थित है। यहां जाफना नल्लूर क्षेत्र में माता को इंद्राक्षी नाम से पुकारा जाता है। कहा जाता है कि यहां माता सती की पायल गिर गई थी। एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम और देवराज इंद्र ने इस शक्तिपीठ में पूजा की थी।

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नेपाल शक्तिपीठ - फोटो : facebook
नेपाल में तीन शक्तिपीठ
  • नेपाल में गंडक नदी के पास आद्या शक्तिपीठ स्थित है, जहां माता सती का बायां गाल गिरा था। यहां माता सती गंडकी रूप में पूजी जाती हैं।
  • नेपाल में ही दूसरा शक्तिपीठ पशुपतिनाथ मंदिर से कुछ दूरी पर बागमति नदी के किनारे स्थित है, जिसका नाम गुहेश्वरी शक्तिपीठ है। कहते हैं कि यहां माता सती के दोनों जानु यानी घुटने गिरे थे।
  • तीसरा शक्तिपीठ बिजयापुर गांव में हैं, जहां दन्तकाली शक्तिपीठ में माता सती के दांत गिरे थे।
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मनसा शक्तिपीठ, तिब्बत - फोटो : facebook
तिब्बत में स्थित शक्तिपीठ

भारत के पास ही तिब्बत स्थित है, जहां मानसरोवर नदी के तट पर माता सती की दाईं हथेली गिरी थी। बाद में इस स्थान पर मनसा देवी शक्तिपीठ की स्थापना हुई।
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बांग्लादेश शक्तिपीठ - फोटो : facebook
बांग्लादेश में पांच शक्तिपीठ
  • भारत के बाद सबसे ज्यादा शक्तिपीठ बांग्लादेश में स्थापित हैं। यहां माता के पांच शक्तिपीठ हैं। पहला उग्रतारा शक्तिपीठ है, जहां माता सती की नाक गिरी थी।
  • दूसरा अपर्णा शक्तिपीठ है, जहां माता सती के बाएं पैर की पायल गिरी थी।
  • सिलहट जिले में शैल नाम के स्थान पर श्रीशैल शक्तिपीठ है, जहां माता सती का गला गिरा था।
  • इसके अलावा बांग्लादेश के चिट्टागोंग जिले में सीताकुंड स्टेसन के पास चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर छत्राल में भी शक्तिपीठ है। इस प्राचीन मंदिर का नाम चट्टल भवानी शक्तिपीठ है, जहां माता सती की दायीं भुजा गिरी थी।
  • पांचवां शक्तपीठ यशोरेश्वरी माता शक्तिपीठ है, जहां माता की बाई हथेली गिरी और एक शक्तिपीठ सिलहट जिले के खासी पर्वत पर भी बताया जाता है, जो जयंती शक्तिपीठ के नाम से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां माता सती की बाईं जांघ गिरी थी।
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