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Swami Vivekananda Death Anniversary: स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी ये रोचक बातें, हर किसी के लिए हैं प्रेरणा

Mon, 04 Jul 2022 11:55 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्वामी विवेकानंद की रोचक बातें - फोटो : amar ujala
Swami Vivekananda Death Anniversary: आज स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि है। स्वामी विवेकानंद का जीवन हर किसी के लिए आदर्श है। इसी आदर्श को हमेशा याद रखने के लिए 4 जुलाई को आज के दिन हर साल स्वामी विवेकानंद स्मृति दिवस के तौर पर मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद ने महज 25 साल की उम्र में ईश्वर और ज्ञान की प्राप्ति के लिए सांसारिक मोह माया त्याग कर सन्यास ले लिया था। उसके बाद गुरु रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बनने के बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। इसी ज्ञान को हर किसी के जीवन में आत्मसात करने के लिए विवेकानंद ने जीवन के सत्य और प्रेरणादायक संदेशों को प्रेषित करना शुरू किया। स्वामी विवेकानंद ने न केवल देश के युवाओं को बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता का मूल मंत्र दिया लेकिन 39 साल की अल्पायु में ही अपना जीवन त्याग दिया। भारत के आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी ऐसी कई रोचक बातें हैं, जो हर किसी के लिए बन सकता है सफलता का मूलमंत्र।
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स्वामी विवेकानंद रोचक बातें - फोटो : amar ujala
धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद का भाषण 

11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो शहर में धर्म संसद का आयोजन हुआ, जिसमें भारत की ओर से स्वामी स्वामी विवेकानंद शामिल हुए। इस धर्म सम्मेलन में विवेकानंद ने भाषण की शुरुआत हिंदी में 'अमेरिका के भाइयों और बहनों' के साथ की। उनके भाषण के बाद पूरा हाॅल पूरे दो मिनट तक तालियों से गूंजता रहा। उनके भाषण की मुख्य बातें जान लें।

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स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन - फोटो : amar ujala
स्वामी विवेकानंद के भाषण की मुख्य बिंदु

-भाषण की शुरुआत में विवेकानंद ने कहा- 'अमेरिका के मेरे भाइयों और बहनों' मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के सताए लोगों को शरण में रखा है।'

- विवेकानंद ने आगे कहा, 'मैं आपको अपने देश की प्राचीन संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं। मैं आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से भी धन्यवाद देता हूं और सभी जाति, संप्रदाय के लाखों, करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आभार व्यक्त करता हूं। मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से फैला है।'

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स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक संदेश - फोटो : amar ujala
एक फकीर ने बचाई थी विवेकानंद की जान

अगस्त 1890 में स्वामी विवेकानंद हिमालय यात्रा पर थे। उनके साथ स्वामी अखंडानंद नैनीताल से पैदल अल्मोड़ा की तरफ चले। यहां काकड़ीघाट में एक पीपल के पेड़ के नीचे स्वामी विवेकानंद तपस्या में लीन हो गए। इसी जगह पर उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। फिर दोनों पैदल अल्मोड़ा के लिए निकल पड़े। अल्मोड़ा से कुछ दूर करबला कब्रिस्तान के पास स्वामी विवेकानंद भूख और थकान के कारण अचेत हो गए। एक फकीर ने उन्हें खीरा खिलाया, जिससे वह चेतना में लौटे।
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स्वामी विवेकानंद रोचक बातें - फोटो : amar ujala
स्वामी विवेकानंद को मृत्यु का हो गया था आभास 

स्वामी विवेकानंद जब काशी में थे, तो उन्हें आभास हो गया था कि अब उनकी मृत्यु होने वाली है। अपनी मृत्यु का आभास होने के बाद वह आखिरी बार काशी आए थे। उसके बाद 4 जुलाई 1902 को स्वामी विवेकानंद महासमाधि में लीन हो गए। काशी में एक माह प्रवास करने के दौरान उन्होंने शिकागो जाने का निर्णय लिया। उनका यह निर्णय इतिहास में दर्ज हो गया जब उन्होंने धर्म संसद में भाषण दिया। 
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