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Valmiki Jayanti 2023: बच्चों को बताएं कैसे दिखते थे भगवान राम, वाल्मीकि ने किया है वर्णन

Thu, 26 Oct 2023 12:30 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

बच्चों को श्रीराम की कहानी सुनाएं, ऋषि वाल्मीकि के बारे में बताएं और वाल्मीकि रामायण के मुताबिक प्रभु राम कैसे दिखते थे, ये समझाएं। आइए जानते हैं ऋषि वाल्मीकि की नजरों से कि भगवान श्री राम कैसे दिखते थे।
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Lord Ram - फोटो : Social Media
Valmiki Jayanti 2023 : भगवान विष्णु के अवतार अयोध्या नरेश प्रभु श्रीराम को आदर्श बेटा, भाई, पति और राजा माना जाता है। इस कारण उन्हें पुरुषोत्तम राम कहा जाता है। इतना ही नहीं राम की छवि भी बहुत सुंदर और मनमोहक बताई जाती है। जो उन्हें एक बार देखता, वह उनके रूप में ही खो जाता और उनका होकर रह जाता। युगों युगों के बाद आज भी उनकी छवि का जो वर्णन हमने सुना, उससे उनका धुंधला सा स्वरूप मन में बना रखा है।

हालांकि क्या आपको पता है कि सच में श्रीराम मानव स्वरूप में कैसे दिखते थे? उनकी आंखें, मुंह, केश और आवाज कैसी थी? धनुर्धारी राम के स्वरूप की कल्पना तो कर सकते हैं लेकिन रामायण में ऋषि वाल्मीकि ने भगवान राम के मानव स्वरूप का वर्णन किया है, जिसे पढ़कर मन में बनी उनकी धुंधली छवि बिल्कुल साफ हो जाएगी। 28 अक्तूबर को ऋषि वाल्मीकि की जयंती है। बच्चों को श्रीराम की कहानी सुनाएं, ऋषि वाल्मीकि के बारे में बताएं और वाल्मीकि रामायण के मुताबिक प्रभु राम कैसे दिखते थे, ये समझाएं। आइए जानते हैं ऋषि वाल्मीकि की नजरों से कि भगवान श्री राम कैसे दिखते थे।
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Sri Ram - फोटो : social Media
सिर और केश

भगवान श्रीराम का एक नाम त्रिशीर्षवान है। रामायण में त्रिशीर्षवान का अर्थ सिर में तीन आवृत से बताया गया है, यानी तीन लक्षणों से युक्त होना। इसके अलावा वाल्मीकि रामायण के अनुसार, श्रीराम के केश लंबे और घने थे।
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भगवान राम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
मुख और आंखें

भगवान राम के मुख बेहद ओजस्वी और कोमल बताया जाता है। वाल्मीकि रामायण में श्रीराम की सुंदरता का वर्णन मिलता है। वाल्मीकि जी ने राम की सुंदरता के लिए शुभानन शब्द उपयोग किया। वह कोमल, सुंदर थे। उनके चेहरे की उपमा चंद्र ज्योत्सना और बाल चंद्र से की गई है।

ऋषि वाल्मीकि ने श्रीराम की नेत्रों की तुलना कमल से की। राम जी की आंखें कमल की तरह विशाल थीं। आंखों के कोणों के ताम्र रंग को ताम्राक्ष और लोहिताश के रूप में व्यक्त किया है।

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भगवान राम और भजन
नाक और कान

वाल्मीकि रामायण में भगवान राम को महानासिका वाला कहा गया है। इससे अभिप्राय उन्नत और दीर्घ नासिका से है। राम के कानों के लिए चतुर्दशसमद्वन्द और दशवृहत् शब्द का प्रयोग किया है। इसका अर्थ है कानों का सम और बड़ा होना। वहीं वाल्मीकि ने उनके कानों के लिए शुभ कुंडलों का प्रयोग भी किया है।
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Sri Ram Chandra - फोटो : Social Media
हाथ और चरण

कहते हैं कि प्रभु रामचंद्र के हाथ के अंगूठे में चारों वेदों की प्राप्ति सूचक रेखा थी, जिससे उन्हें चतुष्फलक कहा जाता है। राम के चरणों के लिए चतुर्दशसमद्वन्द्व और दशपदम विश्लेषण का प्रयोग हुआ है यानी श्रीराम के चरण सम और कमल के समान बताए गए हैं।
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