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जानिए कौन थी शिव की पत्नी पार्वती? कैसे हुई थी शादी और कौन लेकर गया भोलेनाथ के पास विवाह का प्रस्ताव

Mon, 04 Mar 2019 12:08 AM IST
मोना नारंग लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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mahashivratri - फोटो : social media
इस साल महाशिवरात्रि 4 मार्च सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस खास दिन को मनाने की पीछे की मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। कहते हैं महाशिवरात्रि के दिन पूजा करने से भगवान आपकी सभी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। इस दिन शिवभक्त मंदिर जाकर बेलपत्र,दूध चढ़ाकर भोलेनाथ को प्रसन्न करते हैं, तो कुछ लोग उपवास रखते हैं और रात भर जागरण करते हैं। वैसे तो शिवरात्रि मनाने के बारे में अलग-अलग पौराणिक मान्यताएं हैं। लेकिन जो सबसे खास है वह है शिव-पार्वती के विवाह की। आइए जानते हैं कौन है माता पार्वती और कैसे उन्होंने शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की।
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Mahashivratri 2019 - फोटो : अमर उजाला
शिव पुराण के मुताबिक भोलेनाथ की पत्नी पार्वती का जन्म राजा हिमवान के घर में हुआ था। उनकी माता का रानी मैनावती था। राजा हिमवान को कोई कन्या नहीं थीं। राजा के बहुत पूजा-पाठ के बाद उनके घर में एक कन्या पैदा हुई जिसका नाम पार्वती रखा गया। पार्वती अर्थात् पर्वतों की रानी। दरअसल, पार्वती के अनेक रूप हैं और उन्हें उमा गौरी,शैलपुत्री और पहाड़ों वाली रानी भी कहा जाता है। पार्वती शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थी। भोलेनाथ को पाना इतना आसान नहीं था। लेकिन पार्वती ने ठान लिया था शिव ही मेरे पति बनेंगे। शिव को पाने के लिए वह वन में कठिन तपस्या करने चली गई।  
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MAHASHIVRATRI - फोटो : social media
जब भगवान शिव को इस बारे में पता चला तब उन्होंने पार्वती की परीक्षा लेने के लिए के लिए सप्तऋषियों को भेजा। पार्वती के पास जाकर उन्हें हर तरह से यह समझाने का प्रयास किया कि शिव औघड़, अमंगल वेषभूषाधारी और जटाधारी है। तुम तो महान राजा की पुत्री हो तुम्हारे लिए शिव योग्य वर नहीं है। उनके साथ विवाह करके तुम्हें पूरे जीवन में कभी सुख की प्राप्ति नहीं होगी। तुम उसे पति के रूप में पाने की इच्छा छोड़ दो। उनके लाख समझाने के बाद भी पार्वती अपने जिद्द पर अड़ी रही। 

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shivratri - फोटो : social media
पार्वती की दृढ़ता को देखकर सप्तऋषि अत्यंत खुश हुए। उन्होंने पार्वती को सफल होने का आशीर्वाद दिया। सप्तऋषियों ने शिव और पार्वती के विवाह का लग्न मूहूर्त निकाल दिया। विवाह के शुभ दिन शिवजी बारात लेकर हिमालय के घर पहुंचे। भोलेनाथ बैल पर सवार थे। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में डमरू था। 
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shiv parvati - फोटो : social media
उनकी बारात में समस्त दैत्य और देवताओं के साथ उनके गण भूत, प्रेत, पिशाच आदि भी शामिल थे। सभी बाराती नाच-गा रहे थे। यह बारात बहुत ही अलग तरह की थी। इस तरह शुभ घड़ी और शुभ मुहूर्त में शिव और पार्वती का विवाह संपन्न् हो गया और माता-पिता के आशीर्वाद लेने के बाद  पार्वती को साथ लेकर शिवजी अपने धाम कैलाश पर्वत पर चले गए। 
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महाशिवरात्रि - फोटो : social media
भोलेनाथ की शादी का प्रस्ताव लेकर गए पुरोहित और नाई को भेंट में भोलेनाथ ने विभूति प्रदान की। नाई गुस्से में आकर विभूति को रास्ते में फेंक दिया। जबकि पुरोहित उसे संभालकर घर ले आए और उससे पुरोहित का घर धन-धान्य से भर गया। उसकी सारी परेशानियां दूर हो गई। जब नाई को इस बात का पता चला तब वह पुरोहित से आधा धन मांगने की इच्छा जताई। पुरोहित ने कहां इसके लिए तुम्हें शिव के पास जाना होगा। 
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महाशिवरात्रि - फोटो : फाइल फोटो
इधर नाई ने राजा से शिव के गरीबी और अभाव के बारे में बताया था। जिसके बारे में जानने के बाद राजा हिमवान ने शिव को संदेश भेजवाया था कि बारात में सभी देवी-देवताओं को लेकर आना होगा। इस बात को जानकर भोलेनाथ हंस दिए क्योंकि विवाह से पूर्व उन्होंने अपनी शक्ति को दिखाया था। 

तथ्य और उद्धरण-शिवपुराण
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