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अकेले होने का मतलब यह नहीं कि मैं चरित्रहीन हूं

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depression
मैं अखबार के मैट्रिमोनियल पेज पर अपने छोटे भाई के लिए दुल्हन ढूंढने के लिए एक विज्ञापन देख रही थी, तभी एक रिश्तेदार ने एक लाइन को लाल रंग से हाईलाइट किया, उस लाइन के शब्द थे 'उसकी एक बिनब्याही बड़ी बहन है।' उन्होंने तंज कसा, ''बड़ी बहन का अभी तक शादी न करना हमारे लड़के के लिए बेहतर लड़की तलाशने में बहुत मुश्किलें पैदा करेगा।'' उनके ये शब्द किसी तीर की तरह मेरे सीने पर लगे। मैं दर्द से भर गई और बहुत मुश्किल से मैंने अपने आंसुओं को रोका। मेरे अंदर गुस्से की आग भड़क रही थी। वे कैसे इस तरह की बातें कर सकते हैं?
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sad woman - फोटो : pexels.com
उनकी बातें सुनने के बाद मुझे लगा कि मेरा दम घुट रहा है, मुझे ऐसा लगा कि जैसे कोई अपने हाथों से मेरा गला दबा रहा हो। मैं जोर से चिल्लाना चाहती थी कि आखिर मेरा शादी ना करने का फैसला मेरे भाई को बेहतर लड़की मिलने की राह में रोड़ा कैसे बन सकता है। हालांकि उन हालातों में मेरा चुप रहना ही बेहतर था, और मैंने ऐसा ही किया। मैं उम्मीद कर रही थी कि मेरा भाई या मेरे पिता उस रिश्तेदार की बात का विरोध करेंगे, लेकिन उन्होंने भी बाकी रिश्तेदारों की तरह मेरे दुख से किनारा करना ही बेहतर समझा।
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sad woman
मेरी मां मेरे दिल की बात समझती थीं और कई बार वे इस तरह की दिल दुखाने वाली बातों को खत्म करनी नाकमयाब कोशिशें भी किया करती थी। हालांकि वे खुश थीं कि उनके बेटे की शादी होने जा रही है। एक वक्त था जब मेरे माता-पिता मेरी शादी के सपने भी देखा करते थे। दो भाई-बहनों में मैं बड़ी थी, इसलिए यह पहले से ही तय था कि मेरी शादी पहले होगी, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। यह ऐसा था, जैसे मैंने अपने माता-पिता को उस खुशी से वंछित कर दिया हो जिसका सपना वो हमेशा से देखते आए थे। इस वजह से पिछले कुछ सालों तक हमारे बीच बहुत ज्यादा तनाव हो गया था। कुछ इसी तरह की चिंताएं और सवाल मेरे रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच भी पैदा हो गई थीं।

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sad woman
कुछ दोस्तों की चिंताएं तो समझी जा सकती थीं लेकिन कुछ तो बिलकुल ही बिना सिर-पैर की थीं। जैसे, एक दिन मेरे स्कूल के दिनों के एक पुराने दोस्त ने मुझसे कहा, ''मैं जानता हूं कि तुम शादी नहीं करना चाहती लेकिन फिर भी तुम्हारी कुछ इच्छाएं तो जरूर होंगी, अगर तुम चाहो तो तुम्हारी उन इच्छाओं को पूरा करने में मैं मदद कर सकता हूं।'' उसने कहा कि उसे ऐसा करके खुशी होगी बशर्ते उसकी पत्नी और बच्चों को इस बारे में कुछ भी मालूम न पड़े। अपनेे दोस्त की इस बात को सुनकर मैं हैरान थी।
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हां, यह सच था कि मैं अपनी जरूरतों या इच्छाओं से अनजान नहीं थी, और उसके लिए मुझे एक पार्टनर की जरूरत भी थी, लेकिन इसका यह मतलब निकालना कि मैं किसी के लिए भी 'उपलब्ध' हूं, यह तो मैं कभी स्वीकार नहीं कर सकती थी। इससे ज्यादा हैरानी की बात यह थी कि इस तरह का प्रस्ताव मेरे पुराने दोस्त ने मुझे दिया, जिसके बारे में मैंने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था। मुझे लगता है कि उसके प्रस्ताव से मुझे उतना गुस्सा नहीं आया, लेकिन उसके मन में मेरे बारे में ऐसा ख्याल आया यह सोचकर मैं तनाव में जरूर चली गई। ऊपर से उसका इसे एक 'मदद' और 'सेवा' कहना तो बहुत ज्यादा ही बेहूदा था।
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उसकी इस बात ने हमारी दोस्ती में जो मासूमियत थी उसे पूरी तरह खत्म कर दिया। उससे मिलने के बारे में सोचकर ही मैं डरने लगी और आज भी मैं उससे बात करने से बचती हूं। जब लोगों को मेरे सिंगल होने के बारे में मालूम चलता, तो मेरे बारे में उनके विचार बदल जाते। मुझसे बात करने का उनका अंदाज पहले जैसा नहीं रहता, लेकिन इन बातों से मैं परेशान नहीं होती, यह सबकुछ मेरे लिए आम सी बात हो गई। मैं अपने फैसले खुद लेती हूं। अपनी 'पसंद' और 'नापसंद' का खुद ख्याल रखती हूं।
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depression - फोटो : pexels.com
आज मैं 37 साल की हूं और अकेले रहने के अपने फैसले पर मुझे कोई पछतावा नहीं है। मैं उस समय 25 साल की थी जब मैंने शादी न करने के अपने फैसले के बारे में सबसे पहले मां को बताया था। मैंने पैसा कमाना शुरू ही किया था और मैं चाहती थी कि मैं अपने सपनों को पूरा करूं, नई ऊचाइंयों को छुऊं। मुझे लगता है कि मेरी मां ने मेरे दिल की बात समझ ली थी लेकिन बाकी लोगों की तरफ से उठने वाले सवालों के आगे वो भी मजबूर थीं।

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जैसे-जैसे मेरा करियर ऊपर उठने लगा वैसे-वैसे ही मेरे लिए लड़के की तलाश तेज होने लगी। लोग मेरे माता-पिता को कहते थे कि शादी करने से सुरक्षा मिलती है, लेकिन उनकी बातों के उलट मैं सुरक्षा के लिए किसी से शादी नहीं करना चाहती थी। मुझे पता था कि मेरे माता-पिता के दिलो-दिमाग में क्या चल रहा है, उनकी बेटी शादी की उपेक्षित उम्र को पार करने वाली है और अभी भी उन्ही के घर में रह रही है। मेरे पिता चाहते थे कि मैं जल्दी से जल्दी 'सेटल' हो जाऊं, और इसीलिए मैंने एक-दो नहीं बल्की पूरे 15 लड़के देखे।

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depression
मैं अपने पिता की चिंताओं को समझती थी और उनकी कद्र भी करती थी, इसलिए मैं उन लड़कों से मिलने के लिए तैयार हो गई, लेकिन मुझे एक भी पसंद नहीं आया। वैसे एक तरह से इस अनुभव के बाद मेरे लिए यह बात समझानी आसानी हो गई कि आखिर मैं शादी क्यों नहीं करना चाहती। मेरे माता-पिता भी इस बात को समझ गए लेकिन बाकी लोग मेरे बारे में अलग-अलग राय बनाते रहे। उन्हें लगता कि मैं बहुत ज्यादा ही नखरे दिखा रही हूं। मुझे घमंडी, आवारा, अपने माता-पिता की इच्छाओं की कद्र नहीं करने वाली, बेवकूफ, असभ्य और किसी तरह के भ्रम की शिकार लड़की की संज्ञाएं दी जाने लगीं। मुझे समझ नहीं आता था कि लोगों को मेरे बारे में इस तरह की बातें करके क्या आनंद मिलता था? और जब इन सबसे भी उनका जी नहीं भरता तो वे मेरे चरित्र पर बातें करने लगते, लेकिन मेरे विचार बिलकुल स्पष्ट थे।

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girl freedom
किसी तरह का प्रेम संबंध रखना या लिव-इन रिलेशनशिप में रहना कोई बुराई नहीं होती। दुनिया इस तरह के विचारों से कई कदम आगे बढ़ चुकी है। जिन चीजों को करने से मुझे आनंद मिलता है, वो मैं जब चाहूं कर सकती हूं। महिलाएं अब किसी पिंजरें में कैद होकर नहीं रह सकतीं। मैं बस आजाद होकर जीना चाहती हूं, शादी मुझे एक तरह का बंधन लगती है। मैं आसमान में उड़ने वाले पंछी की तरह बनना चाहती हूं, जैसा मेरा दिल करे वैसी ज़िंदगी जीना चाहती हूं। मन करे तो पूरा दिन घर पर रहूं या मन करे तो पूरी रात बाहर गुजार दूं।

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free soul
क्लब, डिस्को, मंदिर, पार्क जहां मन करे वहां चली जाऊं। जब मन करे घर के तमाम काम करूं ना मन करे तो खाना भी न बनाऊं। मैं ऐसी जिंदगी नहीं चाहती जहां मुझे सुबह-सुबह अपनी सास के लिए चाय बनाने, पति के लिए नाश्ता तैयार करने या बच्चों को स्कूल भेजने की चिंता सताती रहे। मुझे अकेले रहना पसंद है। मुझे अपनी आजादी से प्यार है और यह बात मैं उतनी बार दोहरा सकती हूं जितनी बार किसी को समझाने के लिए दोहरानी पड़े। मैंने ऐसी बहुत सी शादीशुदा महिलाओं को देखा है जिनके बड़े परिवार हैं, बच्चे हैं लेकिन फिर भी वे अकेलापन महसूस करती हैं। जबकि मैं वो अकेलापन महसूस नहीं करती, मेरा परिवार और दोस्त दोनों हैं। मैं उन्ही रिश्तों को तरजीह देती हूं जिसमें मुझे आनंद मिलता है।
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free soul
हमारे समाज में एक बिनब्याही लड़की को किसी बोझ की तरह देखा जाता है, लेकिन मैं कभी भी बोझ नहीं बनी। मैंने दुनिया भर की सैर की, मैं खुद पैसे कमाती हूं और उन्हें किस तरह खर्च करना है यह फैसला भी पूरी तरह मेरा ही होता है। मैंने अपने काम से अपनी पहचान बनाई है और मेरी तारीफों में कई लेख भी लिखे जा चुके हैं। वे अखबार जो शुरुआत में मेरे शादी न करने के फैसले का मजाक बनाया करते थे आज मेरे सिंगल वुमेन होने पर तारीफें करते हैं।

मेरे माता-पिता को आज मुझ पर गर्व है और उनके दोस्त अपनी बेटियों को मुझ जैसा कामयाब बनने का उदाहरण देते हैं। अंत में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई मेरी पंसद के बारे में क्या सोचता है। मैंने यह फैसला खुद के लिए लिया है और उसे सही साबित भी किया।
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