depression
मैं अपने पिता की चिंताओं को समझती थी और उनकी कद्र भी करती थी, इसलिए मैं उन लड़कों से मिलने के लिए तैयार हो गई, लेकिन मुझे एक भी पसंद नहीं आया। वैसे एक तरह से इस अनुभव के बाद मेरे लिए यह बात समझानी आसानी हो गई कि आखिर मैं शादी क्यों नहीं करना चाहती। मेरे माता-पिता भी इस बात को समझ गए लेकिन बाकी लोग मेरे बारे में अलग-अलग राय बनाते रहे। उन्हें लगता कि मैं बहुत ज्यादा ही नखरे दिखा रही हूं। मुझे घमंडी, आवारा, अपने माता-पिता की इच्छाओं की कद्र नहीं करने वाली, बेवकूफ, असभ्य और किसी तरह के भ्रम की शिकार लड़की की संज्ञाएं दी जाने लगीं। मुझे समझ नहीं आता था कि लोगों को मेरे बारे में इस तरह की बातें करके क्या आनंद मिलता था? और जब इन सबसे भी उनका जी नहीं भरता तो वे मेरे चरित्र पर बातें करने लगते, लेकिन मेरे विचार बिलकुल स्पष्ट थे।