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Janmashtami 2021: भगवान कृष्ण की ये हैं वो चार बातें, जिन्हें अपनाकर आपका जीवन भी हो सकता है सफल

Mon, 30 Aug 2021 12:34 AM IST
Abhilash Srivastava लाइफ स्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी (फाइल फोटो) - फोटो : Social media
भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु का अवतार माना जाता है। पृथ्वी को पाप से मुक्त करने के लिए भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में मानव का अवतार लिया था। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, इसी कारण से हर साल इस तिथि को विशेष पूजन-अर्चन के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस साल 30 अगस्त को यह तिथि है, पूरे देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की विशेष मान्यताएं हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की पूरा जीवन मानव जाति के लिए विशेष शिक्षाप्रद है। सुदामा के साथ मित्रता हो या अर्जुन को गीता का ज्ञान देना, भगवान कृष्ण के जीवन का हर पल कुछ न कुछ जरूर सिखाता है। धर्म विशेषज्ञ कहते हैं कि श्रीकृष्ण के बताए मार्ग पर यदि चला जाए तो जीवन की सारी कठिनाइयां दूर हो सकती हैं। श्रीकृष्ण के जीवन की कुछ बातों को अपने जीवन में प्रयोग में लाकर सफल हुआ जा सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं जिन्हें हर किसी को जरूर पालन करना चाहिए।
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श्री कृष्णा (फाइल फोटो) - फोटो : Social media
मुश्किल में लोगों के साथ खड़े रहें
भगवान कृष्ण के जीवन से सभी लोगों को यह शिक्षा जरूर लेनी चाहिए कि भले ही आप किसी के सुख का हिस्सा न बन जाएं, पर उनके मुश्किल समय में जरूर साथ रहें। चाहे सुदामा के दुख में खड़े रहने की बात हो या कौरवों से मुकाबले के समय अपने पांडव मित्रों के साथ देने की, भगवान कृष्ण हमेशा अपने मित्रों के दुख में उनके साथ दिखाई देते हैं।
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कृष्ण सुदामा की मित्रता - फोटो : Social media
दिल से दोस्त बनाएं, हैसियत देखकर नहीं
भगवान कृष्ण द्वारका के राजा थे, लेकिन जब गरीबी की स्थिति में उनके बचपन के मित्र सुदामा उनसे मिलने आए तो श्रीकृष्ण ने न सिर्फ उनका विशेष आदर सत्कार किया, साथ ही अपने आंसुओं से उनके चरण धोए। श्रीकृष्ण एक राजा थे और सुदामा भिक्षु ब्राह्मण, पर उन्होंने इन सबसे ऊपर बचपन की मित्रता को रखा।

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अर्जुन के सारथी बने कृष्ण - फोटो : mahabharat
धर्म का मार्ग पर चलें
भगवान कृष्ण हमेशा से धर्म के मार्ग पर चले और अन्य लोगों को भी इसी मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। महाभारत के युद्ध में विशाल कौरव सेना से मुकाबला करने के लिए पांच पांडव के साथ भगवान कृष्ण खड़े रहे, क्योंकि पांडव हमेशा धर्म के मार्ग पर चलने वाले थे। आखिर में इस भयंकर युद्ध में जीत धर्म की ही हुई। यही कारण है कि सभी ग्रंथ लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
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शांति के परिचायक श्री कृष्ण - फोटो : freepik
शांति के लिए अंत तक करते रहें प्रयास
भगवान कृष्ण के जीवन से सीखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात है कि किसी भी विवाद में पड़ने की बजाय शांति का प्रयास अंत तक करते रहें। महाभारत के युद्ध से पहले भगवान कृष्ण स्वयं कौरवों के पास पांडवों का शांतदूत बनकर गए और युद्ध के बजाय शांति से निपटारे का सुझाव दिया, हालांकि अधर्म के मार्ग पर चलने वाले कौरवों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। नतीजतन कौरवों का सर्वनाश हो गया। 
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