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कोरोना से जंग: यह दो चीजें जाइकोब-डी वैक्सीन को बनाती हैं 'सबसे अलग-सबसे खास', यहां जानिए विस्तार से

Sun, 22 Aug 2021 12:50 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना की वैक्सीन- जायकोब-डी (सांकेतिक) - फोटो : PTI
कोरोना संक्रमण से मुकाबले के लिए भारत अपनी शक्ति में लगातार इजाफा करने की कोशिशों में लगा हुआ है। इसी क्रम में देश की छठवीं वैक्सीन जायकोब-डी को भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (डीसीजीआई) से आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिल चुकी है। देश में इससे पहले पांच वैक्सीनों को आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी थी, इसमें दो स्वदेशी वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन के साथ रूस की स्पूतनिक-वी, अमेरिका की माडर्ना और  जॉनसन एंड जॉनसन शामिल है। तमाम अध्ययनों में जायकोब-डी को भारत के लिए काफी खास वैक्सीन माना जा रहा है।
जायकोब-डी दुनिया की पहली डीएनए आधारित कोरोना की वैक्सीन है। देश की तीसरी स्वदेशी वैक्सीन ज़ायकोब-डी, अहमदाबाद स्थित फार्मास्युटिकल प्रमुख कंपनी जायडस कैडिला द्वारा विकसित की गई है। भारत के लिहाजे से इस वैक्सीन को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह देश की पहली वैक्सीन है, जिसे 12-18 आयु वर्ग के लोगों के लिए भी इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। आइए आगे की स्लाइडों में ज़ायकोब-डी वैक्सीन सी जुड़ी खास बातों को जानते हैं।
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बच्चे भी लगवा सकते हैं जायकोब-डी के टीके - फोटो : पीटीआई
किशोरों को भी मिल सकेगी कोरोना से सुरक्षा
देश में अब तक सिर्फ 18 साल से अधिक आयु के लोगों के लिए कोरोना के टीके उपलब्ध हैं, ऐसे में इससे कम उम्र के लोगों में कोरोना का खतरा बरकरार माना जा रहा है। इस बड़ी समस्या को दूर करने में देश की तीसरी स्वदेशी वैक्सीन को काफी कारगर माना जा रहा है। कंपनी द्वारा ड्रग नियामक को सौंपे गए डेटा के मुताबिक कोरोना के खिलाफ इस वैक्सीन की प्रभाविकता 66.6 फीसदी से अधिक की मानी जा रही है। अध्ययनों में इस वैक्सीन को कोरोना के नए और अधिक संक्रामक वैरिएंट्स के खिलाफ भी असरदार पाया गया है। किशोरों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षा देने में इसे बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।
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कोरोना की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन (सांकेतिक) - फोटो : iStock
वैक्सीन की खास बात 1:  कोरोना की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन
जायकोब-डी को इसकी डीएनए आधारित तकनीक सबसे खास बनाती है। जायकोब-डी एक प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन है जो प्लास्मिड नामक डीएनए अणु के गैर-प्रतिकृति वर्जन का उपयोग करके तैयार की गई है। यह शरीर में सार्स-सीओवी-2 वायरस के मेंब्रेन पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन का एक हानिरहित वर्जन तैयार करने में मदद करेगी, जिससे भविष्य में संक्रमण के खिलाफ आसानी से सुरक्षा प्राप्त की जा सकेगी। वैज्ञानिकों को वैक्सीन के नैदानिक परीक्षणों में प्रभावशाली परिणाम देखने को मिले हैं। कंपनी ने अब तक देश के 50 से अधिक केंद्रों में वैक्सीन का सबसे बड़ा क्लिनिकल परीक्षण किया है। 

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बिना निडिल की ही लग सकेगी वैक्सीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
वैक्सीन की खास बात 1:  कोरोना की पहली निडिल-फ्री वैक्सीन
जायकोब-डी कोरोना की पहली निडिल-फ्री वैक्सीन भी है, यानी कि शरीर में इसे इंजेक्ट करने के लिए अन्य वैक्सीनों की तरह निडिल की जरूरत नहीं होगी। निडिल की बजाय जेट इंजेक्टर के माध्यम से इसके टीके दिए जाएंगे। जेट इंजेक्टर एक विशेष प्रकार का उपकरण है जिसमें गैस या स्प्रिंग से बने दवाब के माध्यम से त्वचा में इसके टीके दिए जाते हैं। इस माध्यम से लगने वाले टीकों में दर्द का अनुभव नहीं होगा। 
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कोरोना टीके की प्रभाविकता जानिए - फोटो : पिक्साबे
कितनी असरदार है यह वैक्सीन
कंपनी की ओर से जारी किए गए डेटा के अनुसार वैक्सीन के तीसरे चरण में 28,000 से अधिक लोगों पर अध्ययन किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने वैक्सीन के 66 फीसदी से अधिक प्रभावी होने का दावा किया है। कंपनी का कहना है कि वह सितंबर तक इस वैक्सीन को लोगों तक उपलब्ध करा देगी। जायडस कैंडिला के प्रबंध निदेशक डॉ शरविल पटेल कहते हैं,  हमारी योजना सितंबर तक वैक्सीन की 30-40 लाख खुराक की आपूर्ति करने की है। दिसंबर तक आपूर्ति को 3 करोड़ से 4 करोड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य है। देश के टीकाकरण अभियान को तेज करने में यह वैक्सीन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


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नोट: यह लेख वैक्सीन की निर्माता कंपनी जायडस कैडिला द्वारा साझा की गई जानकारियों के अलावा तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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