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World Brain Day 2024: 'मस्तिष्क के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा पिछले चार साल का समय', कई दशकों तक रह सकता है असर

Mon, 22 Jul 2024 12:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के कारण मस्तिष्क की समस्याएं - फोटो : istock
मस्तिष्क हमारे पूरे शरीर को नियंत्रित करता है। शरीर में सभी कार्यों के संचालन, भावनात्मक नियंत्रण के साथ किस अंग को कब क्या कार्य करना है, ये सभी मस्तिष्क द्वारा ही संचालित किया जाता है। मसलन, मस्तिष्क को शरीर का सेंट्रल कंप्यूटर कहा जा सकता है और शरीर ठीक तरीके से काम करता रहे इसके लिए जरूरी है कि आपका मस्तिष्क स्वस्थ रहे।

हालांकि अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि समय के साथ मस्तिष्क की बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। कम आयु के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। विशेषतौर पर कोरोना महामारी के बाद मस्तिष्क संबधित बीमारियों के मामले काफी ज्यादा देखे जा रहे हैं।

क्या वास्तव में कोरोना के कारण मस्तिष्क संबंधित विकार बढ़ गए हैं? अध्ययनकर्ताओं का जवाब है- हां। जब 2019 के अंत में महामारी शुरू हुई, तब डॉक्टरों को कोविड-19 के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उन्हें नहीं लगता था कि इसका असर दिमाग पर पड़ता है। पर समय के साथ ये स्पष्ट होता गया कि कोविड-19 कई तरह से दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके कारण न्यूरोलॉजिकल और मानसिक दोनों तरह की समस्याएं देखी जानी लगीं। 
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मस्तिष्क की बढ़ती बीमारियां - फोटो : istock
कोरोना और मस्तिष्क की समस्याएं

न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य विषयों पर सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के बारे में लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 22 जुलाई को विश्व मस्तिष्क दिवस मनाया जाता है। आइए समझते हैं कि कोरोना संक्रमण ने किस प्रकार से मस्तिष्क को क्षति पहुंचाई है और जो लोग इससे ठीक हो चुके हैं उनमें किस तरह की समस्याओं का खतरा हो सकता है?

टाइम मैगजीन में प्रकाशित एक रिपोर्ट में विशेषज्ञ कहते हैं, पिछले चार वर्ष, विशेषतौर पर कोरोना महामारी के बाद का समय मानव मस्तिष्क के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रहा है। कोविड-19 के कारण मस्तिष्क-तंत्रिकाओं को जो क्षति हुई है उसका असर आने वाले कई दशकों तक बना रह सकता है।
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मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं का जोखिम - फोटो : istock
कई तरह की मस्तिष्क विकारों का खतरा

कोविड-19 और इसके कारण मस्तिष्क को होने वाली समस्याओं को लेकर किए गए अध्ययन में पाया गया कि कोविड-19 हमारे मस्तिष्क में दीर्घकालिक परिवर्तनों का कारण बन गया है। कई लोगों में संक्रमण से ठीक होने के बाद लंबे समय तक ब्रेन फॉग, मानसिक थकान और स्मृति हानि जैसी संज्ञानात्मक समस्याएं बनी हुई हैं। इसके अलावा ये तंत्रिका संबंधी और मानसिक-स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी बढ़ाता देखा गया है।

 वैंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में ब्रेन डिसफंक्शन विशेषज्ञ डॉ. वेस एली के मुताबिक कोरोना वायरस ने कई लोगों के मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं और सहायक कोशिकाओं को क्षति पहुंचाई है जिससे दीर्घकालिक मस्तिष्क विकारों का जोखिम बढ़ गया है। 

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कोरोना का दिमाग पर असर - फोटो : istock
युवा भी देखे जा रहे हैं शिकार
 
अध्ययनों से पता चलता है कि फ्लू जैसे श्वसन संक्रमण भी संज्ञानात्मक समस्याओं या डिमेंशिया का जोखिम पैदा कर सकते हैं। हालांकि, इन शोध ने लोगों का उतना ध्यान आकर्षित नहीं किया है जितना कि कोविड-19 ने किया है। उम्र भी संज्ञानात्मक समस्याओं के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक। 30 और 40 की उम्र के लोग भी कोविड-19 के बाद न्यूरोकॉग्निटिव समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य विकारों का सामना कर रहे हैं।
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मस्तिष्क विकारों का खतरा - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं भले ही महामारी की रफ्तर अब काफी नियंत्रित है पर इसके कारण जो क्षति हुई है उसने चुनौतियां काफी बढ़ा दी हैं। जिन लोगों में कोरोना के बाद मस्तिष्क विकारों का निदान हुआ है उन्हें निरंतर उपचार प्राप्त करते रहना जरूरी है।

कोरोना वायरस से संक्रमितों में इंसेफेलाइटिस (दिमाग में सूजन) और इसके कारण भ्रम, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और याददाश्त की समस्याओं का जोखिम देखा जा रहा है। इसके अलावा कुछ लोगों में ये गंभीर अवसाद या चिंता जैसे मनोवैज्ञानिक विकारों को भी ट्रिगर करते पाया गया। इन समस्याओं का असर लंबे समय तक स्वास्थ्य पर बना रह सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
COVID-19 Is Linked to Detectable Brain Changes

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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