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Workload Stress: वर्कलोड के कारण हो सकती हैं कई स्वास्थ्य समस्याएं, जानिए क्या कहता है शोध

Sun, 25 Aug 2024 06:00 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

परिवार के लिए समय न निकाल पाने के कारण आप मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह से परेशान होने लगती हैं। आपको कामकाजी जीवन और निजी जीवन में संतुलन बनाना काफी मुश्किल हो जाता है, जिस कारण रिश्तों में तनाव पनपना लगता है।
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Stress, Depression, Sad - फोटो : istock
सुमन अग्रवाल

काम का दबाव हर किसी के ऊपर है। तनाव भी हर किसी को है, लेकिन कब यह आपकी निजी जिंदगी को प्रभावित करने लगता है, आपको पता ही नहीं चलता है।

एक वक्त था, जब ऑफिस का काम ज्यादा होने के बाद भी वर्कलोड ज्यादा नहीं होता था। ऐसा इसलिए, क्योंकि उस समय ऑफिस वर्क बस ऑफिस तक ही सीमित होता था। मगर कोरोना के बाद से आलम कुछ ऐसा है कि ऑफिस वर्क लोगों की शारीरिक सेहत के साथ-साथ मानसिक सेहत पर भी अत्यधिक असर डाल रहा है। पुरुष हो या महिला, दोनों की जिंदगी में काम का तनाव इतना ज्यादा बढ़ गया है कि उनकी निजी जिंदगी इससे प्रभावित होने लगी है। वे ऑफिस वर्क को मैनेज नहीं कर पा रहे हैं, जिसकी वजह से उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत, दोनों खराब हो रही हैं। दफ्तर की नौ घंटे की स्ट्रेसफुल टाइमिंग, बॉस का दबाव, मैनेजमेंट की मुश्किल, समय-सीमा, ग्राहक का फीडबैक आदि दिक्कतों की वजह से ऑफिस स्ट्रेस बढ़ता ही जा रहा है। इस वर्क स्ट्रेस की वजह से लोग कई तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, जैसे कि तनाव, अवसाद, ब्लड प्रेशर की समस्या, डायबिटीज, मोटापा, थकान, नींद की कमी और दिल की बीमारियां आदि।

दफ्तर में बढ़ते काम का दबाव युवाओं में तनाव की गंभीर समस्या को जन्म दे रहा है। इस तनाव की वजह से सोचने और समझने की क्षमता कम हो रही है। साथ ही कार्यक्षमता और रचनात्मकता भी कम हो रही है। आपको जब भी तनाव होता है तो आप चिड़चिड़ी-सी हो जाती हैं। किसी से बात करने का मन नहीं करता, घर वालों और दोस्तों से ढंग से बात भी नहीं हो पाती। दफ्तर में लंबे समय तक काम करना, रात की शिफ्ट में काम करना, काम का दबाव और हमेशा बढ़ती मांगों के कारण आप तनाव में आ जाती हैं। तनाव का स्तर एक सीमा से ज्यादा बढ़ जाने पर यह दिमाग और शरीर को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है, जो ठीक नहीं है।

दफ्तर में तनाव बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिसका असर निजी जिंदगी पर दिखने लगता है। दफ्तर में बढ़ते तनाव के कारण कार्यक्षमता में कमी आ सकती है। पर्याप्त आराम न मिलने के कारण चीजों को लंबे समय तक याद रखने की क्षमता में गिरावट आती है और काम तथा व्यक्तिगत जीवन में संतुलन नहीं हो पाता है। इस वजह से परिवार के लिए समय न निकाल पाने के कारण आप मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह से परेशान होने लगती हैं। आपको कामकाजी जीवन और निजी जीवन में संतुलन बनाना काफी मुश्किल हो जाता है, जिस कारण रिश्तों में तनाव पनपना लगता है।
 
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Stress, Depression, Sad - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं शोध

बेंगलुरु की एक हेल्थकेयर कंपनी ने ‘कर्मचारियों की भावनात्मक स्वास्थ्य स्थिति’ विषय पर अपने ताजा सर्वे में पाया कि 21 से 30 साल के बीच के कर्मचारी सबसे ज्यादा तनावग्रस्त रहते हैं। पिछले महीने ही किए गए इस सर्वे में पांच हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें आईटी और विनिर्माण, परिवहन, स्टाफ भर्ती तकनीक, मीडिया, कानूनी सेवाओं, व्यवसाय परामर्श और अन्य सेवाओं के कई सेक्टर्स के कर्मचारी शामिल थे।

सर्वे के अनुसार, तनावग्रस्त कर्मचारियों में दूसरे नंबर पर 30 से 40 वर्ष की आयु के लोग हैं और फिर 41-50 वर्ष की आयु के लोग हैं। सर्वे में यह भी पाया गया कि कार्यस्थल पर महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक तनाव होता है। लगभग तीन-चौथाई या 72.2 प्रतिशत महिलाओं ने हाई टेंशन के बारे में बताया। इसकी तुलना में जब पुरुषों से यही सवाल पूछा गया तो उनमें से 53.64 प्रतिशत ने कहा कि वे हाई टेंशन का अनुभव करते हैं।

महिला कर्मचारियों ने बताया कि काम, जीवन संतुलन का अभाव, पहचान की कमी, लगातार कम मनोबल और हमेशा आलोचना का डर तनाव में वृद्धि के कुछ प्रमुख कारण हैं। निष्कर्ष में पाया गया कि पिछले कुछ सालों में उच्च और अत्यधिक तनाव के स्तर से पीड़ित कर्मचारियों की संख्या में 31 फीसदी की बढ़त हुई है।

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की वर्क एंड वेल विंग की ओर से एक अन्य शोध किया गया, जिसमें बताया गया कि ज्यादा तनाव लेने से दिमाग की नसें सिकुड़ने लगती हैं, दिमाग में काफी बदलाव आने लगते हैं और नर्वस सिस्टम में खराबी होने लगती है। दफ्तर में अगर आपके साथ गलत व्यवहार होता है या किसी भी तरह का शोषण होता है तो इसका सीधा असर आपके दिमाग पर पड़ता है। आपके कोर्टिसोल हार्मोन में बदलाव होने लगता है, वो डैमेज हो जाता है और आप डिमेंशिया या अल्जाइमर का शिकार हो सकती हैं। इसलिए आपको बढ़ते वर्कलोड से दिमाग को खराब होने से बचाने के लिए कुछ उपाय करने ही होंगे।
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Stress, Depression, Sad - फोटो : istock
कारणों की पहचान

दफ्तर में कौन-सी स्थिति आपको तनाव में डालती है, इसे पहचानने की कोशिश करें। किस बात से स्ट्रेस ट्रिगर हो रहा है, उसे जानने का प्रयास करें। चाहें तो रोज घर आकर एक डायरी में अपने दिन भर के आैर दफ्तर के अनुभवों को लिखें। इससे आपको तनाव के कारण को पहचानने में मदद मिलेगी और आप उससे निपटने में सक्षम हो पाएंगी।

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स्ट्रेस की समस्या - फोटो : freepik.com
सकारात्मक विचार

एक बार आपको तनाव का कारण पता चल जाए तो उस स्थिति से कैसे निपटना है, इसके लिए नकारात्मक रास्ता चुनने की जगह उससे कैसे सकारात्मक तरीके से निपटा जाए, इस बारे में सोचें। उदाहरण के लिए, अगर दफ्तर में किसी साथी से झगड़ा हो जाता है तो अगले दिन जाकर उससे शांति से बात करें। दोनों इस पर चर्चा करें कि आखिर झगड़े की स्थिति क्यों बनी और मिलकर रास्ता निकालें।
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Stress Woman - फोटो : Pexel
ब्रेक तो बनता है

काम करते-करते या मीटिंग के बीच में ब्रेक जरूर लें। कई बार हम काम को समय पर पूरा करने के चक्कर में ब्रेक लेना भूल जाते हैं, जिसकी वजह से हमें काफी परेशानी और तनाव होने लगता है। इसलिए जरूरी है खुद को ब्रेक देना। इससे मन और तन, दोनों शांत रहते हैं। आप चाहें तो इस बीच एक कॉफी पी सकती हैं या किसी सहकर्मी से बात कर सकती हैं। इससे दिमाग को थोड़ी देर के लिए शांति मिलेगी।
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Women - फोटो : Pexel
पर्सनल और प्रोफेशनल

निजी और कामकाजी जीवन में संतुलन बनाना सीखें। दोनों के बीच में एक अंतर रखें। दोनों को समय दें, दोनों की प्राथमिकता तय करें। साथ ही रोजाना मेडिटेशन जरूर करें। ध्यान करने से आपका दिमाग और मन शांत रहते हैं। आप सही ढंग से निर्णय ले पाती हैं, सही समय पर काम पूरा हो पाता है, जिससे कामकाजी जीवन आपके निजी जीवन को प्रभावित नहीं कर पाता।
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Diet, Foods, Eating - फोटो : istock
आहार में पौष्टिक खाद्य पदार्थ

काम के तनाव को हैंडल करने के लिए पौष्टिक आहार लेना बहुत जरूरी है, जैसे कि ओमेगा थ्री, फैटी एसिड, विटामिन्स और मिनरल्स। इसके साथ ही रोजाना व्यायाम करने से तनाव कम होता है।

निर्णय लेने में होती है कठिनाई

मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान, दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग में प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश कार्यस्थल पर तनाव का लंबे समय तक संपर्क शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन जैसे तनाव हार्मोनों के स्राव को बढ़ा सकता है, जो समय के साथ मस्तिष्क के रसायन और मूड नियमन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इससे सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन हो सकता है, जो चिंता और अवसाद जैसे मूड विकारों का कारण बनते हैं।

इसके अलावा लंबे समय तक तनाव से होने वाली संज्ञानात्मक हानि, जैसे कि स्मृति और निर्णय लेने में कठिनाइयां तथा मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। व्यायाम में मन न लगना भावनात्मक थकावट को चिह्नित करता है। लंबे समय तक काम संबंधी तनाव का एक अन्य परिणाम होता है, जो चिंता, अवसाद और कार्यक्षमता में कमी का कारण बन सकता है। ऐसी स्थिति में आपको खुद को काबू करने पर ध्यान देना चाहिए और तनाव को कम करने का प्रयास करना चाहिए, वरना आपको शारीरिक से लेकर मानसिक परेशानियों तक का सामना करना पड़ सकता है।
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