फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेहत की बात: आखिर क्यों कम नहीं होता बेली फैट? कौन सी आदतें बन रही हैं सबसे बड़ी रुकावट, यहां जानिए

Tue, 29 Sep 2026 06:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बेली फैट बढ़ने के पीछे सिर्फ ज्यादा खाना जिम्मेदार नहीं होता।  शारीरिक गतिविधियों में कमी, हाई कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ, नींद की कमी और तनाव भी भूमिका निभा सकते हैं। पेट के अंदर जमा विसरल फैट स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। कुछ बीमारियां और दवाएं भी वजन बढ़ा सकती हैं।
विज्ञापन
1 of 5
बेली फैट के कारण होने वाले नुकसान - फोटो : Amarujala.com
अधिक वजन और मोटापे को सेहत के लिए सबसे बड़े खतरे के तौर पर देखा जाता है। डायबिटीज से लेकर हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से लेकर कैंसर तक, मोटापा इन सभी समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को कम  उम्र से ही वजन को बढ़ने से रोकने के लिए प्रयास करते रहने की सलाह देते हैं।

जब बात अधिक वजन की होती है तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ पेट की चर्बी पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से  पेट के आसपास जमा चर्बी आपमें दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है? 

शरीर का वजन कम करना तो फिर भी आसान है पर  पेट की चर्बी कम करना बहुत से लोगों के लिए सबसे मुश्किल काम हो सकता है। इसके लिए कई लोग खाना कम कर देते हैं, सुबह-शाम टहलना शुरू कर देते हैं फिर भी कमर की चौड़ाई कम नहीं होती।

अगर आप भी इससे परेशान हैं तो आइए जान लेते हैं कि आखिर बेली फैट कम क्यों नहीं होता है?
विज्ञापन

2 of 5
बेली फैट की समस्या - फोटो : Freepik.com
बेली फैट बढ़ने की समस्या

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बेली फैट का कारण सिर्फ ज्यादा खाना नहीं होता। नींद की कमी, दिनभर बैठे रहना, मीठे पेय और जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाली चीजों का सेवन भी इसे बढ़ाने वाला हो सकता है। लगातार तनाव जैसी रोज की आदतें भी वजन घटाने की कोशिशों को प्रभावित कर सकती हैं।
 
  • पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी केवल आपके लुक को खराब नहीं करती है। पेट के अंदर मौजूद विसरल फैट यानी अंगों के आसपास जमा चर्बी शरीर में सूजन और मेटाबॉलिज्म के लिए भी मुश्किलों का कारण बन सकती है। 

आइए जानते हैं कि किन आदतों के कारण बेली फैट को कम करना मुश्किल हो सकता है?
विज्ञापन

3 of 5
ज्यादा बैठे रहने की आदत - फोटो : Freepik.com
दिनभर बैठे रहना नुकसानदायक

अगर आपका काम ऐसा है जिसमें घंटों कुर्सी पर बैठना पड़ता है और दिनभर में चलना-फिरना बहुत कम है, तो यह पेट की चर्बी बढ़ने की एक वजह हो सकती है।
 
  • शरीर जितनी कैलोरी बर्न करता है, उससे ज्यादा कैलोरी लगातार लेते रहने से ये शरीर में चर्बी के रूप में जमा हो सकती है। शारीरिक गतिविधियों में कमी इस समस्या को बढ़ाने वाली हो सकती है।
  • इसलिए सिर्फ 30 मिनट व्यायाम करके बाकी दिन लगातार बैठे रहना पर्याप्त नहीं है।

4 of 5
आहार पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
खाने की मात्रा से ज्यादा गुणवत्ता पर ध्यान दें

चिप्स, मिठाई, फास्ट फूड और मीठे पेय जैसी हाई कैलोरी वाली चीजें अगर आपकी डाइट में शामिल हैं तो वजन कम करना मुश्किल हो सकता है। खासकर एक-दो केन मीठे पेय से भी शरीर में जरूरत से ज्यादा कैलोरी जा सकती है।
 
  • वेट लॉस करना चाह रहे हैं तो सिर्फ खाना कम करने से काम नहीं चलेगा। आहार में सब्जियां-फल, साबुत अनाज और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों को जरूर शामिल करने पर ध्यान देना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
थायरॉइ़ड का वजन पर असर - फोटो : Adobe Stock
इन गलतियों में भी करें सुधार

अगर आप लगातार 7 घंटे से कम सोते हैं तो भूख और पेट भरने से जुड़े हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं। नींद की कमी से भूख बढ़ती है और ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ खाने की इच्छा भी बढ़ सकती है।
 
  • देर रात तक मोबाइल चलाना और फिर अगले दिन ज्यादा खाना, दोनों मिलकर वजन घटाने की कोशिश को प्रभावित कर सकते हैं।
  • लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ सकता है। इससे कुछ लोगों में ज्यादा खाने तथा चर्बी जमा होने की समस्या बढ़ सकती है।
  • थायरॉइड की समस्या, पीसीओएस, कुछ दवाएं भी वजन बढ़ने का कारण बन सकती हैं। इसलिए अगर लगातार कोशिश के बावजूद वजन या बेली फैट नहीं कम हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर कारणों का पता लगाने के लिए जांच कराएं। 

--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें