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जानना जरूरी: डेंगू में प्लेटलेट्स लो होने की पूरी कहानी समझें, जानिए कब शुरू होता है असली खतरा

Tue, 29 Sep 2026 05:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डेंगू में प्लेटलेट्स बीमारी के दौरान तेजी से लो हो सकते हैं। बुखार उतरने के बाद भी तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, खून आना, सांस लेने में परेशानी या बहुत ज्यादा कमजोरी जैसे संकेतों पर तुरंत डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
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डेंगू के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
मानसून और इसके बाद के महीनों में डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में पहले से इन बीमारियों को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है। अमर उजाला में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से उत्तर से लेकर दक्षिण तक हर तरफ डेंगू-मलेरिया का खतरा देखा जा रहा है।

डेंगू के ज्यादातर मामले वैसे तो सामान्य दवाओं और आराम के साथ ठीक हो जाते हैं, लेकिन कई बार ये गंभीर बीमारी का खतरा भी बढ़ाने वाली हो सकती है। इसमें प्लेटलेट्स लो होने का भी खतरा रहता है, जिससे ब्लीडिंग की दिक्कत हो सकती है। लेकिन डेंगू में सिर्फ प्लेटलेट्स देखकर ही बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती। 

आइए जानते हैं कि डेंगू कब गंभीर रूप ले सकता है और कब प्लेटलेट्स कम होने का खतरा बढ़ जाता है?
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डेंगू बुखार के खतरे - फोटो : Freepik.com
डेंगू और इसके खतरे

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार डेंगू की बीमारी की गंभीर स्थिति आमतौर पर बीमारी शुरू होने के करीब 3 से 7 दिन के बीच देखी जाती है। खास बात यह है कि इस समय बुखार कम हो सकता है, इसलिए बुखार उतरने को हमेशा डेंगू के पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। 
 
  • डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से लो सकती है, लेकिन डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति देखकर ही जोखिमों का आकलन करते हैं। इसलिए रिपोर्ट में सिर्फ प्लेटलेट्स के नंबर से घबराने के बजाय पूरी स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। 
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खून की जांच - फोटो : Freepik.com
प्लेटलेट्स लो होने का खतरा

डेंगू के शुरुआती दिनों में ब्लड टेस्ट के आधार पर स्थिति का आकलन किया जाता है। आमतौर पर बीमारी के 3 से 7वें दिन का समय विशेष निगरानी वाला माना जाता है।
 
  • डेंगू में प्लेटलेट्स कम होना आम है। इसके साथ डॉक्टर आमतौर पर मरीज के लक्षण, ब्लड प्रेशर, शरीर में हाइड्रेशन की स्थिति और हेमेटोक्रिट यानी खून में लाल रक्त कोशिकाओं का अनुपात जैसे संकेतों को भी देखते हैं।
  • गंभीर डेंगू में प्लाज्मा लीकेज, ब्लीडिंग और शरीर के दूसरों अंगों पर भी असर होने का खतरा रहता है।
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डेंगू में बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
बुखार उतरने के बाद बरतें ज्यादा सावधानी 

डेंगू में बुखार कम होने के आसपास ही क्रिटिकल फेज देखा जाता है इसलिए बुखार उतरने के बाद डेंगू को खत्म नहीं मानना चाहिए। 
 
  • इसी दौरान पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, सांस तेज चलने यामसूड़ों या नाक से खून आने जैसे संकेत दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। ये लो प्लेटलेट्स और ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है।
  • अगर आपको बहुत ज्यादा कमजोरी, बेचैनीा या पेशाब कम होने की दिक्कत भी है तो ये लक्षण गंभीर स्थिति की ओर इशारा हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
  • डेंगू में समय पर सहायक उपचार मिलने से दूसरे अंगों पर होने वाले खतरे को कम किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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