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हेल्थ अलर्ट: डेंगू में भूलकर भी न लें ये पेनकिलर वरना बढ़ सकता है ब्लीडिंग का खतरा, बरतें सावधानी

Fri, 23 Oct 2026 06:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Dengue Medicines To Avoid: डेंगू में एस्पिरिन, इबुप्रोफेन और नेप्रोक्सेन जैसी दवाएं रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं। बुखार के लिए डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामोल ली जा सकती है। पर्याप्त तरल पदार्थ लें और लक्षणों पर नजर रखें। 
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डेंगू की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
मानसून के दौरान और इसके बाद के कुछ महीनों में मच्छर जनित रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। अगस्त से लेकर अक्तूबर-नवंबर तक दिल्ली-एनसीआर सहित कई अन्य राज्यों में डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता है। इस महीने की शुरुआत में अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से दिल्ली से लेकर गुजरात-तमिलनाडु तक डेंगू का कहर देखा जा रहा है?

डेंगू एडीज इजिप्टी नाम के मच्छर के काटने से फैलता है। संक्रमण के कारण मरीजों को तेज बुखार, सिरदर्द, बदन और जोड़ों में दर्द के साथ कमजोरी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गंभीर स्थितियों में प्लेटलेट्स लो होने लग जाते हैं, जिसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों वाला माना जाता रहा है। डेंगू के लक्षणों से राहत पाने के लिए अक्सर लोग घर में मौजूद पेनकिलर या बुखार की दवाएं खुद ही लेने लगते हैं।

लेकिन डेंगू में हर दर्द निवारक दवा सुरक्षित नहीं होती। कुछ दवाएं खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं और रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। कई बार गलत दवाओं के कारण स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है, यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेंगू में दवाओं के सेवन को लेकर खास सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
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डेंगू के खतरे - फोटो : Freepik.com
डेंगू और इसके खतरे

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डेंगू की गंभीर स्थितियों में प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगते हैं और रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थों के लीक होने जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं। ऐसे में गलत दवा लेना जोखिम बढ़ा सकता है।

यह भी समझना जरूरी है कि डेंगू का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज नहीं है। इसके लक्षणों को ठीक करने के लिए शरीर में तरल पदार्थ बनाए रखने और समय-समय पर डॉक्टरी सलाह लेते रहना जरूरी है। डॉक्टर कहते हैं, डेंगू में दवाओं को लेकर सावधानी बरतते रहना बहुत जरूरी माना जाता है।

आइए जानते हैं कि डेंगू में कौन सी दवाएं लेना आपके लिए खतरे बढ़ाने वाला हो सकता है।
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दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी जरूरी - फोटो : Freepik.com
एस्पिरिन और इबुप्रोफेन से खतरे

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाएं नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) समूह में आती हैं। ये दर्द और बुखार कम करने में मदद करती हैं, पर इससे प्लेटलेट्स की संख्या और रक्तस्राव का जोखिम हो सकता है।
 
  • एस्पिरिन प्लेटलेट्स की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
  • इबुप्रोफेन और नेप्रोक्सेन जैसी एनएसएआईडी भी डेंगू में रक्तस्राव संबंधी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
  • कुछ सर्दी-जुकाम की संयुक्त दवाओं में भी ऐसे कंपाउंड्स हो सकते हैं। डेंगू का संदेह होने पर इन दवाओं को खुद से न लें। 
  • यदि आप पहले से किसी बीमारी के लिए एस्पिरिन या ब्लड थिनर ले रहे हैं, तो इस बारे में भी डॉक्टर से बात करना जरूरी है।

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डेंगू बुखार के मामले - फोटो : Adobe Stock
दर्द और बुखार होने पर क्या करें?

डेंगू में बुखार और दर्द के लिए पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इस बारे में भी डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। 
 
  • हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही पैरासिटामोल लें। एक साथ कई ऐसी दवाएं न लें जिनमें पैरासिटामोल मौजूद हो सकता है।
  • ऐसे में निर्धारित मात्रा से अधिक दवा लेने से लिवर को नुकसान पहुंच सकता है।
  • डेंगू में स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं भी खुद से शुरू न करें। 

एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से पैरासिटामोल की अधिकता के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई।
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डेंगू का खतरा - फोटो : Freepik.com
कब हो जाएं अलर्ट?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि डेंगू में खतरा कई बार तब शुरू होता है जब बुखार उतरने लगता है। कुछ मरीजों में इसी समय गंभीर जटिलताएं सामने आ सकती हैं। इसलिए लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहें और स्थिति बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

नाक या मसूड़ों से खून आ रहा हो या फिर उल्टी या मल में खून दिखाई तो अलर्ट हो जाएं और तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। पेट में तेज दर्द या लगातार उल्टी होने के साथ अत्यधिक सुस्ती, बेचैनी या सांस लेने में परेशानी होने पर भी अलर्ट हो जाएं और तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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