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न्यूमोनिक प्लेग: फेफड़ों के इस गंभीर संक्रमण को लेकर अलर्ट, जानिए क्यों खतरनाक मानी जाती है ये बीमारी

Tue, 06 Oct 2026 06:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pneumonic Plague Russia: न्यूमोनिक प्लेग, येरसिनिया पेस्टिस बैक्टीरिया से होने वाला गंभीर संक्रमण है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसमें तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी और सीने में दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके तेजी से गंभीर होने का खतरा रहता है, इसलिए लक्षण दिखते ही तत्काल जांच और इलाज जरूरी है।
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फेफड़ों में संक्रमण - फोटो : Amarujala.com/AI
न्यूमोनिक प्लेग बीमारी को लेकर पिछले कुछ दिनों से चर्चा काफी तेज हो गई है,  वजह है रूस आई एक डराने वाली खबर। अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने रूस के साइबेरिया में प्लेग पर रिसर्च करने वाले संस्थान की 28 वर्षीय महिला कर्मचारी की अज्ञात संक्रमण से मौत की जानकारी दी थी। कुछ रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि उसकी मौत संभवत: न्यूमोनिक प्लेग के कारण हुई, हालांकि इसकी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

स्वतंत्र रूसी समाचार संगठन ल्यूदी बैकाल की रिपोर्ट के मुताबिक 25 सितंबर को लैब टेक्नीशियन महिला के हाथ से, प्लेग का कारण बनने वाली बैक्टीरिया रखने वाली टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। इससे संक्रमण फैलने की आशंका जताई गई। हालांकि बाद में रूस की केंद्रीय स्वास्थ्य एजेंसी ने इस खबर को भी खारिज कर दिया। महिला के मौत के कारणों की अभी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

स्थानीय रिपोर्ट्स में निमोनिया से मौत की चर्चा है, पर क्या ये प्लेग के कारण होने वाला निमोनिया था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। इस खबर के सामने आने के बाद से लोगों के मन में ये सवाल है कि आखिर प्लेग क्या है और न्यूमोनिक प्लेग को इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है?
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न्यूमोनिक प्लेग की समस्या - फोटो : Adobe Stock
पहले प्लेग के बारे में जान लीजिए

प्लेग एक गंभीर और जानलेवा संक्रामक बीमारी है जो येर्सिनिया पेस्टिस नाम के बैक्टीरिया से होती है। यह मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और अन्य छोटे जीवों के शरीर पर रहने वाले पिस्सुओं के काटने से फैलता है। न्यूमोनिक प्लेग इसका एक खास और बहुत खतरनाक रूप है जो फेफड़ों को संक्रमित करता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकलने वाली सांस की बूंदों (रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स) से यह दूसरों तक पहुंचता है।
 
  • न्यूमोनिक प्लेग, प्लेग बीमारी का एक अत्यंत गंभीर रूप है। 
  • यह प्लेग के तीन रूपों में से सबसे घातक और तेजी से फैलने वाला रूप है। प्लेग के अन्य दो रूप ब्यूबोनिक और सेप्टिसेमिक हैं। 
  • ब्यूबोनिक प्लेग मुख्य रूप से लिम्फ नोड्स को प्रभावित करता इसके विपरीत न्यूमोनिक प्लेग सीधे फेफड़ों में संक्रमण फैलाता है और सांस लेने में तकलीफ पैदा करता है।
  • सेप्टिसेमिक खून में होने वाला संक्रमण माना जाता है। इसे आम भाषा में 'ब्लड पॉइजनिंग' भी कहा जाता है। 
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फेफड़ों में संक्रमण की समस्या - फोटो : Adobe Stock
जानवरों से इंसानों में फैलती है बीमारी

प्लेग एक जूनोटिक बीमारी है, जिसका मतलब है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसके बैक्टीरिया आमतौर पर छोटे जंगली जानवरों और उनके पिस्सुओं में पाए जाते हैं। साइबेरिया में प्लेग के बैक्टीरिया (येरसिनिया पेस्टिस) वहां के छोटे जंगली जानवरों और उनके पिस्सुओं में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। हालांकि, आम लोगों में इस बीमारी का होना बहुत दुर्लभ है।
 
  • न्यूमोनिक प्लेग विशेष रूप से चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकलने वाली सांस की बूंदों के जरिये एक इंसान से दूसरे इंसान में भी सीधे फैल सकता है। संक्रमित पालतू जानवरों (जैसे बिल्लियों) या जंगली स्तनधारियों के संपर्क में आने से भी इसका खतरा होता है।
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न्यूमोनिक प्लेग के लक्षण हो सकते हैं गंभीर - फोटो : Adobe stock
न्यूमोनिक प्लेग में क्या दिक्कतें होती हैं?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि संक्रमण के संपर्क में आने के 1 से 4 दिनों के भीतर न्यूमोनिक प्लेग के लक्षण तेजी से उभरने लगते हैं। इसके कारण लोगों के तेज बुखार और ठंड लगने,  सिरदर्द, अत्यधिक कमजोरी, छाती में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। कुछ लोगों को संक्रमण के कारण लगातार खांसी और खूनी बलगम या खून की उल्टी भी हो सकती है।
 
  • न्यूमोनिक प्लेग में संक्रमण के शुरुआती 24 घंटों के भीतर एंटीबायोटिक दवाएं शुरू हो जाएं तो बीमारी के गंभीर रूप लेने का खतरा कम हो सकता है। इलाज न मिलने पर यह घातक हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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