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अरोमा थैरेपी: सिरदर्द से लेकर स्ट्रेस कम करने तक, कारगर है यह खुशबू भरा इलाज

Sun, 22 Aug 2021 05:58 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरोमा तेरपी की सामग्रियां - फोटो : Pixabay
डॉ. ऋषि मिश्रा, 
एमडी, पीएचडी (पंचकर्म),आयुर्वेद
भोपाल


बहुत पहले हमारी दादी- नानी के जमाने से कुछ चीजें चली आ रही हैं जो आज भी कारगर हैं। इनमें से एक है कहानियां और दूसरी है प्राकृतिक औषधियां। कहानियों की बात फिर कभी। फिलहाल करते हैं खुशबू भरे प्राकृतिक इलाज यानी अरोमाथेरैपी के बारे में बात।

क्या है अरोमाथेरैपी?: 
सरल शब्दों में समझा जाये तो यह पौधों व फूलों के अर्क से इलाज करने की एक विधि है। जिसका एक रूप एसेंशियल ऑइल के तौर पर भी आजकल बहुत उपयोग में लाया जा रहा है। इसके अंतर्गत लैवेंडर, रोज़, जैस्मीन, आदि जैसी सैकड़ों खुशबुओं का प्रयोग किया जाता है। तेल के अलावा बाम, लोशन, पावडर, क्ले मास्क, बेदिंग सॉल्ट, फेशियल स्टीमर्स, क्रीम आदि के रूप में भी यह उपलब्ध होते हैं। 
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तनाव और सिरदर्द में फायदेमंद है थेरपी - फोटो : stress
इन समस्यों में हैं फायदेमंद 
अरोमाथैरेपी का प्रयोग दिमाग और शरीर दोनों की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए किया जाता है। इसे कई समस्याओं के समाधान के लिए उपयोग में लाया जाता है, जैसे कि-
  • सिर, माइग्रेन या बदन दर्द
  • अनिद्रा या नींद से जुड़ी अन्य समस्या
  • स्ट्रेस, एंग्जायटी या मानसिक तनाव
  •  जोड़ों का दर्द
  •  कीमोथैरेपी के साइड इफेक्ट्स को कम करने में
  •  डिलीवरी के दौरान तकलीफ को कम करने में
  •  रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी और पाचन क्षमता बढ़ाने में 
  •  विभिन्न संक्रमणों को दूर करने में

चंदन का लेप और टीका
आयुर्वेद के अनुसार हमारे आस-पास प्रकृति में ऐसे कई औषधीय गुणों वाले पौधे और वनस्पति हैं जो बहुत कारगर हैं। आज आयुर्वेद पर बकायदा रिसर्च हो रही है और कई गम्भीर बीमारियों में भी आयुर्वेदिक दवाइयां काम आ रही हैं। असल में इन दवाओं का प्रयोग तो पुराने जमाने किया जा रहा है। उदाहरण के लिए आप चंदन को ही लीजिए। दिमाग में तरावट और ठंडक लाने के लिए माथे पर चंदन का टीका लगाने की सलाह दी जाती थी। आयुर्वेद में कुल ग्यारह इंद्रियों का जिक्र है। इसमें ग्यारहवीं इंद्री है उभयइन्द्री या मन। और सुगन्धों के जरिये मन को प्रफुल्लित करने के उपाय किए जाते हैं क्योंकि स्वस्थ मन मतलब सकारात्मक विचार, जो कि आज के समय मे सबसे अधिक जरूरी है। वहीं त्वचा सम्बन्धी समस्याओं के लिए चंदन का लेप लगाने को कहा जाता था। इसी तरह चंदन की खुशबू को लोबान या धूप बत्ती के रूप में भी इस्तेमाल करने का प्रचलन रहा है। 
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अरोमा थेरपी है कई मामलों में लाभकारी - फोटो : Pixabay
खुशबूदार तेल और इत्र
जब अरोमाथेरेपी को यह नाम नहीं मिला था उसके सालों पहले से परम्परागत रूप से खुशबूदार तेलों तथा इत्र का प्रयोग सामान्य स्किन डिजीज से लेकर मालिश आदि तक के लिए किया जा रहा है। गुलाब, केवड़ा, चमेली जैसे खुशबूदार अर्क हमारे यहां राजा- महाराजाओं के समय से उपयोग में लाए जा रहे हैं और तब तो वैद्य और आयुर्वेद ही प्रचलन में थे। वहीं सिरदर्द और हल्की सर्दी के लिए बाम का प्रयोग तो आपने अब तक घरों में होते देखा है। इसी तरह हवन और यज्ञ में विभिन्न धूप और सुगन्धों का उपयोग में और वातावरण को शुद्ध बनाने के लिए किया जाता रहा है। 

ध्यान रखने वाली बात
खास बात यह है कि अन्य कई थेरेपी की ही तरह अरोमाथैरेपी का उपयोग भी किसी विशेषज्ञ की जानकारी के बाद ही करना चहिए। खासकर जब आप लंबे समय तक इसका उपयोग करने वाले हों। विशेषज्ञ आपको सही तेल या अर्क, उसकी सही मात्रा और इसको इस्तेमाल करने के सही तरीके के बारे में बता सकते हैं। साथ ही अगर आपको कोई एलर्जी है तो भी वह आपको सही मार्गदर्शन दे सकते हैं। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति यदि शीत प्रकृति का है। उसने चंदन के लेप आदि का प्रयोग लम्बे समय तक किया तो चंदन के शीत गुण के कारण उसको अधिक तकलीफ हो सकती है। इसलिए अपने मन से किसी भी चीज का उपयोग न करें, वरना फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है।
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