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विशेषज्ञ से जानिए: अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों में क्या हो सकते हैं वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स?

Sat, 10 Jul 2021 06:56 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
Medically reviewed by-
डॉ शुचिन बजाज
निदेशक
उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स 


कोरोना की तीसरी लहर और इससे होने वाले संभावित खतरों को कम करने के लिए देशभर में वैक्सीनेशन अभियान को तेज कर दिया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है, उन्हें कोरोना के गंभीर संक्रमण और इससे होने वाली मौत के खतरे से काफी हद तक सुरक्षित माना जा सकता है। कई रिपोर्टस में बताया जा रहा है कि लोगों के मन में कोविड वैक्सीन को लेकर अब भी डर का माहौल है। वैक्सीनेशन के कारण होने वाले साइड-इफेक्ट्स के कारण अब भी कई लोग टीकाकरण कराने से कतरा रहे हैं। कुछ रिपोर्टस में यह भी दावा किया जा रहा है कि इसी डर के कारण पुरुषों की तुलना में महिलाएं वैक्सीनेशन सेंटर पर कम आ रही हैं।
लोगों के मन में एक सवाल यह भी है कि क्या कोरोना की वैक्सीन पुरुषों और महिलाओं पर अलग-अलग तरह से असर करती है? क्या महिलाओं को साइड-इफेक्ट्स होने का खतरा पुरुषों से ज्यादा होता है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि अलग-अलग आयु वाले लोगों में वैक्सीनेशन के क्या साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं?
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वैक्सीनेशन के दुष्प्रभाव (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : social media
वैक्सीनेशन के कारण होने वाले सामान्य साइड-इफेक्ट्स
विशेषज्ञों के मुताबिक टीके के साइड-इफेक्ट्स लिंग, उम्र और वैक्सीन के प्रकार के आधार पर भी भिन्न हो सकते हैं। माना जाता है कि युवाओं को बुजुर्गों की तुलना में अधिक तीव्रता वाले दुष्प्रभावों का अनुभव हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीनेशन के कारण होने वाले साइड-इफेक्ट्स सामान्य तौर पर एक से दो दिनों में स्वत: ठीक हो जाते हैं। इससे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। दर्द और बुखार को कम करने के लिए पैरासीटामोल लिया जा सकता है।
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बुजुर्गों में कोरोना वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स - फोटो : iStock
बुजुर्गों में होने वाले वैक्सीनेशन के साइड-इफेक्ट्स
माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती जाती है। शरीर में वैक्सीन के इंजेक्ट होते ही प्रतिरक्षा कोशिकाएं प्रतिक्रिया में लग जाती हैं। वृद्धावस्था में सामान्यतौर पर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया धीमी होती है, यही कारण है कि ज्यादा उम्र वाले लोगों में वैक्सीनेशन के अधिक तीव्र प्रभाव देखने को नहीं मिलते हैं। 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों पर किए गए परीक्षण में वैज्ञानिकों को यह बातें जानने को मिली हैं। अनुसंधान के मुताबिक वृद्ध लोगों में वैक्सीनेशन के कारण इंजेक्शन लगे स्थान पर दर्द, लालिमा, सूजन, शरीर में दर्द और थकान की समस्या हो सकती है। ज्यादा उम्र के लोगों में वैक्सीनेशन के बाद बुखार की शिकायत कम देखी गई है।

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युवाओं में वैक्सीनेशन के प्रभाव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
युवा पुरुषों में वैक्सीनेशन के साइड-इफेक्ट्स
विशेषज्ञों के मुताबिक युवावस्था में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत और सक्रिय रहती है। यही कारण है कि 65 साल वाले लोगों की तुलना में युवाओं में वैक्सीनेशन के साइड-इफेक्ट्स काफी हद तक अधिक प्रभावी हो सकते हैं। वैक्सीनेशन के बाद युवाओं को मुख्यरूप से थकान, हल्का बुखार, ठंड लगने, जोड़ों और पीठ दर्द के साथ बुखार की समस्या हो सकती है। वैक्सीन से होने वाले दुष्प्रभावों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने आहार और जीवन शैली को बेहतर कर लें। टीकाकरण के एक दिन पहले अच्छी नींद लें।
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महिलाओं में कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभाव - फोटो : iStock
महिलाओं में वैक्सीनेशन के साइड-इफेक्ट्स
डॉक्टरों के मुताबिक वैक्सीनेशन के कारण कुछ महिलाओं में वैक्सीनेशन के कारण अपेक्षाकृत थोड़े गंभीर साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं, हालांकि ये साइड-इफेक्ट्स भी आसानी से एक से दो दिनों में ठीक हो जाते हैं। महिलाओं को वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स के रूप में बुखार के साथ उल्टी और मितली आने की दिक्कत हो सकती है। युवा महिलाओं में टीकाकरण के बाद  पेट में दर्द, ऐंठन और मासिक धर्म चक्र में अस्थायी परिवर्तन जैसी समस्या भी हो सकती है।  वैक्सीन लेने से पहले और बाद में अच्छा और पौष्टिक आहार लेने से भी थकान और कमजोरी जैसे साइड-इफेक्ट्स को नियंत्रित किया जा सकता है। 

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नोट: यह लेख उजाला सिग्नस के डायरेक्टर डॉ शुचिन बजाज से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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