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फाइजर: पूर्ण इस्तेमाल की मंजूरी पाने वाली दुनिया की पहली वैक्सीन, क्या भारत में भी होगा उपयोग?

Tue, 24 Aug 2021 03:23 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन) 


पिछले साल दिसंबर में ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बना था, जिसने फाइजर/बायोएनटेक की कोरोना वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी थी और अब इस वैक्सीन ने अपनी प्रभावकारिता इस तरह साबित की है कि इसे अमेरिका में पूर्ण इस्तेमाल की मंजूरी भी मिल गई है। अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर और उसके जर्मन साझेदार बायोएनटेक द्वारा विकसित की गई कोरोना वैक्सीन के पूर्ण इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इसी के साथ यह दुनिया की पहली ऐसी कोरोना वैक्सीन बन गई है, जिसे किसी देश में आपातकालीन इस्तेमाल के बाद पूर्ण रूप से मंजूरी मिली है। फिलहाल फाइजर की वैक्सीन का इस्तेमाल ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों में किया जा रहा है और करोड़ों लोग इस वैक्सीन को लगवा चुके हैं। हालांकि भारत में अब तक इस वैक्सीन को मंजूरी नहीं मिली है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
कैसे काम करती है फाइजर की वैक्सीन? 
  • यह एक नई तरह की एमआरएनए वैक्सीन है, जिसे बनाने में कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के छोटे टुकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए शरीर को तैयार करते हैं। दरअसल, इस वैक्सीन को जब शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, तो ये प्रतिरक्षा तंत्र को कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाने और साथ ही टी-सेल को सक्रिय कर संक्रमित कोशिकओं को नष्ट करने के लिए कहती है। 
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
कैसे मिली पूर्ण इस्तेमाल की मंजूरी? 
  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फाइजर की वैक्सीन को पूर्ण इस्तेमाल की मंजूरी देने से पहले एफडीए द्वारा पहले उसके नौ महीने के डेटा का विश्लेषण किया गया। वैक्सीन के प्रभाव को लेकर करीब 40 हजार लोगों पर अध्ययन किया गया। साथ ही वैक्सीन के साइड-इफेक्ट को भी देखा गया। उसके बाद इसे मंजूरी दे दी गई। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भारत में अब तक नहीं मिली मंजूरी 
  • भारत में अब तक फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी नहीं मिल पाने का सबसे बड़ा कारण इसका रखरखाव है। दरअसल, इस वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। ऐसे में दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में तो इसका रखरखाव थोड़ा आसान है, लेकिन दूरदराज के इलाकों तक इस वैक्सीन को लेकर जाना संभव नहीं है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
नए वैरिएंट पर कितनी प्रभावी फाइजर की वैक्सीन 
  • ब्रिटेन में किए गए एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन कोरोना के खतरनाक डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ काफी सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन समय के साथ उसकी प्रभावशीलता कम हो जाती है। यह अध्ययन ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और देश के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के शोधकर्ताओं ने किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, फाइजर वैक्सीन शुरू में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की तुलना में अधिक सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता भी तेज गति से घटती है। यही वजह है कि वैक्सीन की तीसरी खुराक को लेकर भी अध्ययन चल रहे हैं। 
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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