Medically Reviewed by-
डॉ विक्रमजीत सिंह
(डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन)
आकाश हेल्थकेयर, दिल्ली
कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ टीकाकरण को सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए देश में टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया गया है। अब 18 साल के ऊपर के सभी लोगों को कोरोना की वैक्सीन दी जा रही है। हालांकि वैक्सीनेशन को लेकर हाल ही में हुए एक अध्ययन ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन (जिसे भारत में कोविशील्ड के नाम से जाना जाता है) रक्त का थक्का बनने का कारण बन सकती है। हालांकि ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिले हैं। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील भी की है कि सिर्फ इसी आधार पर टीकाकरण अभियान को रोका नहीं जाना चाहिए।
इस अध्ययन ने लोगों के मन में तमाम तरह से डर का माहौल बना दिया है। चूंकि देश के ज्यादातर हिस्सों में कोविशील्ड वैक्सीन की ही उपलब्धता है, ऐसे में यह डर भी लाजमी है। इस लेख में हम जानेंगे कि वैक्सीनेशन के बाद शरीर में दिखने वाले किन परिवर्तनों के आधार पर ब्लड क्लाटिंग की पहचान की जा सकता है?
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रक्त का थक्का बनने की समस्या (प्रतीकात्मक चित्र)
- फोटो : Pixabay
क्या कहता है अध्ययन
ब्लड क्लाटिंग के लक्षणों को जानने से पहले आइए जानते है कि वैक्सीनेशन और ब्लड क्लाटिंग के बीच वैज्ञानिकों को क्या संबंध देखने को मिला है? ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के अनुसंधानकर्ताओं के नेतृत्व में हुए अध्ययन में पाया गया कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के कारण लोगों के रक्त में प्लेटलेट्स की कमी और थक्का बनने की समस्या हो सकती है। हालांकि ऐसे मामले बहुत ही कम देखने को मिले हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह स्थिति प्रति 10 लाख खुराक में करीब 11 मामलों में हो सकती है। इसके अलावा 65 से 70 साल की आयु वाले लोगों (जिन्हें पहले से ही दिल की बीमारी, मधुमेह या किडनी की बीमारी हो) में इसका खतरा अधिक देखने को मिला है।
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थक्का बनने के कारण हृदय संबंधी समस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
रक्त का थक्का बनने के कारण हृदय संबंधी समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक रक्त का थक्का बनने के कारण हृदय संबंधी समस्याओं के लक्षण देखने को मिल सकते हैं। इसमें सामान्य तौर पर लोगों को चक्कर आने और सांस की तकलीफ का अनुभव हो सकता है। ब्लड क्लाटिंग की समस्या यदि हृदय में हो रही है तो इसके कारण छाती में दर्द और भारीपन का अनुभव भी हो सकता है। हृदय में थक्कों की संख्या ज्यादा हो जाने पर दिल का दौरा पड़ने का भी डर रहता है।
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त्वचा के रंग में बदलाव को न करें नजरअंदाज
- फोटो : iStock
त्वचा के रंग में बदलाव
रक्त के थक्के के कारण यदि नसें बंद हो रही हैं तो ऐसी स्थिति में त्वचा के रंग में परिवर्तन हो सकता है। सामान्य तौर पर त्वचा का रंग नीला या लाल हो जाने को ब्लड क्लाटिंग के संभावित लक्षण के रूप में देखा जा सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों को पैर या हाथ में होने वाली ब्लड क्लाटिंग की समस्या के कारण अंगों में अचानक दर्द, सूजन और रंग में बदलाव महसूस हो सकता है।
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पेट में दर्द और सूजन की समस्या
- फोटो : Pixabay
पेट में दर्द या सूजन
रक्त का थक्का बनने की समस्या यदि पेट में हो रही है तो इसके कारण पेट में दर्द या सूजन महसूस हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि अगर पेट में खून का थक्का विकसित हो रहा है तो इसके कारण गंभीर रूप से मितली या उल्टी का अनुभव भी हो सकता है। हालांकि याद रखें कि नैदानिक परीक्षण के बाद ही इसकी पुष्टि की जा सकती है।
वैक्सीनेशन अभियान को बिल्कुल न रोकें
- फोटो : Pixabay
वैक्सीनेशन को लेकर क्या है विशेषज्ञ की राय
अमर उजाला से बातचीत के दौरान डॉ विक्रमजीत सिंह (डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन) बताते हैं कि फिलहाल न तो लोगों को इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए, न ही वैक्सीनेशन के कारण रक्त के थक्का बनने के मामलों पर। जिस अध्ययन के आधार पर ब्लड क्लाटिंग की समस्या के बारे में आगाह किया गया है इसके आंकड़े काफी कम हैं। इस छोटे से आंकड़े के आधार पर किसी भी वैक्सीन की प्रभाविकता या उससे होने वाले साइड-इफेक्ट्स का निर्धारण नहीं किया जा सकता है। इस तरह की रिपोर्ट पर ध्यान न देते हुए सभी लोगों को वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। संभावित तीसरी लहर से बचाने में वैक्सीनेशन को ही सबसे प्रभावी उपाय माना जा सकता है।
------- नोट: यह लेख डॉ विक्रमजीत सिंह (डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन, आकाश हेल्थकेयर दिल्ली) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में कोविशील्ड वैक्सीन पर हुए अध्ययन को भी संलग्न किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।