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अध्ययन में दावा: ऐसे लोगों के लिए वैक्सीन की केवल एक डोज ही काफी, दूसरे की जरूरत नहीं

Sat, 01 May 2021 06:26 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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वैक्सीन एंटीबॉडीज बढ़ाने में मदद करती हैं - फोटो : PTI
कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए विशेषज्ञ टीकाकरण को सबसे प्रभावी और दीर्घकालिक सुरक्षा का उपाय मानते हैं। भारत में कोरोना वायरस की दो वैक्सीन- कोवैक्सीन और कोविशील्ड उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीके की पहली डोज के 28 दिनों के बाद इसकी दूसरी डोज लेना आवश्यक है, शरीर में तभी पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज बन पाती हैं। यानी कि आपको वायरस से सुरक्षित रहने के लिए इसके दो खुराक की आवश्यकता होती है।
इसके विपरीत पेन इंस्टीट्यूट ऑफ इम्युनोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में बताया है कि जो लोग कोरोना वायरस से संक्रमित रह चुके हैं उन्हें वैक्सीन के दूसरे डोज की आवश्यकता नहीं है, ऐसे लोगों के लिए इसकी एक खुराक ही काफी है। आइए इस अध्ययन के मायने समझते हैं।
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संक्रमित रह चुके लोगों के लिए कोरोना की एक टीका ही काफी - फोटो : PTI
'साइंस इम्युनोलॉजी' में छपे अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण हो चुका हो उनमें पहली डोज के बाद ही एंटीबॉडीज बढ़ जाती हैं, जबकि दूसरी डोज के बाद एंटीबॉडीज की मात्रा में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला है। अमेरिका में कई लोगों पर किए गए अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं।
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भारत में लोगों को दी जा रही है वैक्सीन की दो खुराक - फोटो : Social Media
एंटीबॉडीज कैसे देती हैं सुरक्षा?
इस अध्ययन को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि एंटीबॉडीज आपको किसी वायरस के प्रति कैसे सुरक्षा देती हैं? शरीर में दो तरह की एंटीबॉडीज होती हैं। पहली टी किलर कोशिकाएं जो वायरस को मारती हैं और दूसरी बी कोशिकाएं जो भविष्य में वायरस के दोबारा हमले के समय उसे पहचानकर उसके खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने का काम करती हैं। 

 

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कोरोना वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज दीर्घकालिक फायदा देती हैं - फोटो : iStock
अध्ययन में शोधकर्ता बताते हैं कि अमेरिका में कोविड संक्रमित रह चुके लोगों में पहली डोज के बाद एंटीबॉडी रिस्पॉन्स बहुत अच्छा दिखा। अध्ययन के लेखक ई जॉन वेरी कहते हैं कि यह नतीजे शॉर्ट और लांग टर्म वैक्सीन एफिकेसी के लिए प्रोत्साहित करने वाले हैं। सामान्य तौर पर लोगों में वैक्सीन की पहली डोज एंटीबॉडीज बनाने और दूसरी डोज उन्हें बूस्ट करने में मदद करती है। वहीं जिन लोगों को पहले से संक्रमण हो चुका है उनमें वैक्सीन की पहली डोज ही बूस्टर के तौर पर काम करती है। 
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कई देश संक्रमित रह चुके लोगों को सिर्फ एक डोज दे रहे हैं - फोटो : Social Media
कई देश संक्रमितों को दे रहे हैं केवल एक डोज
इस अध्ययन के अलावा कई अन्य अध्ययन भी इस दावे को पुख्ता करते हैं कि संक्रमितों के लिए वैक्सीन की केवल एक डोज ही काफी है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस, स्पेन, इटली और जर्मनी जैसे कुछ देशों ने कोरोना संक्रमित रह चुके लोगों को वैक्सीन की एक ही डोज देने की स्ट्रेटजी बनाई है। इसके अलावा न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी एक अध्ययन कहती है कि जो लोग पहले संक्रमित रह चुके हैं और उन्होंने वैक्सीन का एक डोज ले लिया है ऐसे लोगों के शरीर में बनी एंटीबॉडी उन लोगों से भी ज्यादा होती है, जिन्होंने इसके दो डोज लिए हैं।
 
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भारत में कोरोना के दो टीके उपलब्ध हैं - फोटो : Social media
भारत में क्या हैं इस अध्ययन के मायने?
भारत में चूंकि अभी तक ऐसा अध्ययन नहीं हुआ है इसलिए इस विषय को लेकर वैज्ञानिक कुछ भी कहने से बच रहे हैं। यहां सभी लोगों को वैक्सीन की दो डोज दी जा रही है। हालांकि यह अध्ययन उन देशों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जो इस समय वैक्सीन की कमी का सामना कर रहे हैं। भारत में भी वैक्सीन की कमी की खबरें सुनने को मिल रही हैं।

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स्रोत और संदर्भ: 
SARS-CoV-2 genome-wide T cell epitope mapping reveals immunodominance and substantial CD8+ T cell activation in COVID-19 patients
https://immunology.sciencemag.org/content/6/58/eabf7550

अस्वीकरण नोट:  यह लेख साइंस इम्युनोलॉजी में छपे अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अमर उजाला राउटर्स के इस रिपोर्ट को लेकर कोई दावा नहीं करता है।
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