दुनियाभर में बढ़ती क्रोनिक बीमारियां गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। पिछले दो-तीन दशक के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि 90 के दशक में जिन स्वास्थ्य समस्याओं को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कतों को रूप में जाना जाता था, वह आज के समय में युवाओं और बच्चों में भी देखी जा रही हैं।
इस संबंध में किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि कई तरह के पर्यावरणीय और आहार में गड़बड़ी वाले कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि हम सभी खान-पान के माध्यम से रोजाना जाने-अनजाने कई प्रकार के रसायनों को निगल रहे हैं, जिनसे सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।
एक हालिया रिपोर्ट में शोधकर्ताओं की टीम ने चेताया है कि खान-पान की चीजों के माध्यम से हमारे शरीर में दैनिक रूप से कई प्रकार के हानिकारक तत्व प्रवेश कर रहे हैं। मुख्यरूप से पैक्ड फूड वाली प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों, कंटेनर और प्लास्टिक बैग के माध्यम से रसायन और माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में पहुंच रहे हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि इनमें से कई कैंसर, स्थाई आनुवंशिक परिवर्तन, प्रजनन प्रणाली में गड़बड़ी और शरीर में विषाक्तता बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने कहा, हम इन चीजों से इस किदर घिरे हुए हैं कि खतरे को समझते हुए भी इनसे दूरी नहीं बना पा रहे हैं, ये भविष्य के लिए निश्चित ही बहुत समस्याकारक स्थिति हो सकती है।