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चिंताजनक: पैक्ड फूड-बोतलों से शरीर में पहुंच रहे हैं 3600 से अधिक रसायन, कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा

Sun, 22 Sep 2024 12:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शरीर में पहुंच रहे हैं हानिकारक रसायन - फोटो : amarujala.com
दुनियाभर में बढ़ती क्रोनिक बीमारियां गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। पिछले दो-तीन दशक के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि 90 के दशक में जिन स्वास्थ्य समस्याओं को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कतों को रूप में जाना जाता था, वह आज के समय में युवाओं और बच्चों में भी देखी जा रही हैं।

इस संबंध में किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि कई तरह के पर्यावरणीय और आहार में गड़बड़ी वाले कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि हम सभी खान-पान के माध्यम से रोजाना जाने-अनजाने कई प्रकार के रसायनों को निगल रहे हैं, जिनसे सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।

एक हालिया रिपोर्ट में शोधकर्ताओं की टीम ने चेताया है कि खान-पान की चीजों के माध्यम से हमारे शरीर में दैनिक रूप से कई प्रकार के हानिकारक तत्व प्रवेश कर रहे हैं। मुख्यरूप से पैक्ड फूड वाली प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों, कंटेनर और प्लास्टिक बैग के माध्यम से रसायन और माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में पहुंच रहे हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि इनमें से कई कैंसर, स्थाई आनुवंशिक परिवर्तन, प्रजनन प्रणाली में गड़बड़ी और शरीर में विषाक्तता बढ़ाने वाले हो सकते हैं। 

वैज्ञानिकों ने कहा, हम इन चीजों से इस किदर घिरे हुए हैं कि खतरे को समझते हुए भी इनसे दूरी नहीं बना पा रहे हैं, ये भविष्य के लिए निश्चित ही बहुत समस्याकारक स्थिति हो सकती है।
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हानिकारक रसायनों का पता चला - फोटो : istock
14,000 से अधिक रसायनों की पहचान

जर्नल ऑफ एक्सपोजर साइंस एंड एनवायरमेंटल एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने भोजन के संपर्क में आने वाले 14,000 से अधिक अलग-अलग रसायनों-यौगिकों की पहचान की है। नए अध्ययन से पता चला है कि उनमें से करीब 3,601 मानव शरीर में पाए गए हैं। इसे फूड कॉन्टैक्ट कैमिकल (एफसीसी) का करीब 25 फीसदी माना जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि इनमें से अधिकांश रसायनों के बारे में बहुत ज्यादा पता भी नहीं है कि ये हमारे शरीर को किस-किस तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं? ज्यादातर ज्ञात रसायनों को कैंसर कारक और प्रजनन विकारों के लिए जिम्मेदार पाया गया है।
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पैक्ड खाद्य पदार्थ - फोटो : istock
कई पर लगाया जा चुका है प्रतिबंध

वैज्ञानिकों ने बताया कि इन हानिकारक रसायनों और तत्वों में बिस्फेनॉल ए (BPA) को प्रमुख रूप से हाइलाइट किया गया है। अध्ययनों में इसके कई दुष्प्रभावों के बारे में पता चलता है। इससे होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण कई जगहों पर इसे प्रतिबंधित किया जा चुका है। मुख्यरूप से कंटेनरों और शिशु की बोतलों में इस कैमिकल की पहचान की गई थी। इतना ही नहीं उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को निर्देश भी दिया गया है कि वह स्पष्ट करें कि ये बीपीए फ्री हैं या नहीं?

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पैक्ड फूड्स के माध्यम से शरीर में जा रहे हैं रसायन - फोटो : istock
अधिकतर रसायनों के बारे में अब भी जानकारियों की कमी

शोधकर्ताओं ने प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों, कंटेनर के माध्यम से शरीर में कई प्रकार के मेटेल, कीटनाशक और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक भी पाए जो सांस के साथ शरीर में जा सकते हैं। इसके अलावा फथलेट्स रसायन को लेकर भी चिंता जताई गई है जिनका उपयोग प्लास्टिक, परफ्यूम-डियोड्रेंट और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों को बनाने के लिए किया जाता है। 

टीम ने इंसानों के शरीर में पाए जाने वाले एफसीसी के बारे में जानने की कोशिश की तो पता चला कि कई रसायनों और यौगिकों के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारियों का अभाव है।
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शरीर को हो सकते हैं कई नुकसान - फोटो : istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

शोधकर्ताओं ने बताया, मनुष्यों में एफसीसी का पता लगाने के लिए रक्त, मूत्र, त्वचा और स्तन के दूध के सैंपलों की जांच की गई है।

खाद्य पैकेजिंग फोरम में वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्ययन के प्रमुख लेखक बिरगिट ग्यूके कहते हैं, ये शोध खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाले रसायनों और इसके मानव स्वास्थ्य पर जोखिम के बीच संबंध स्थापित करने में मदद करता है। इनमें से कई के खतरनाक प्रभाव हो सकते हैं और अभी भी कई रसायन-यौगिक हैं जिनका परीक्षण होना बाकी है। ये दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देने वाली समस्या हो सकती है। इन्हें प्रतिबंधित करना जरूरी है। 



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स्रोत और संदर्भ

Evidence for widespread human exposure to food contact chemicals

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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