वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी के चलते लोगों में स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की गंभीर समस्याएं देखने को मिली हैं। वायरस ने श्वसन तंत्र के साथ फेफड़े, हृदय, मस्तिष्क, मानसिक स्वास्थ्य जैसी कई जटिलताओं को काफी बढ़ा दिया है। संक्रमण के साथ-साथ, ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक बनी रहने वाली लॉन्ग कोविड की समस्याएं, स्वास्थ्य संगठनों और चिकित्सकों के लिए मुसीबत बढ़ा रही हैं। मौजूदा समय में दुनियाभर में कोरोना के ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। भारत में भी इन वैरिएंट्स ने एक बार फिर से संक्रमण के आंकड़ों को बढ़ा दिया है।
कोरोना महामारी की शुरुआत में जहां वायरस को मुख्यरूप से श्वसन से संबंधित माना जा रहा था वहीं इसके नए स्ट्रेन्स के कारण शरीर के कई अन्य अंगों पर दुष्प्रभाव बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। कोरोना वायरस का संक्रमण न्यूरोलॉजिकल विकारों को बढ़ाने के साथ मस्तिष्क, फेफड़े और हृदय के गंभीर रोगों को बढ़ाता हुआ भी देखा जा रहा है। अध्ययन में शोधकर्ताओं का कहना है कि संक्रमण के दौरान और ठीक होने के बाद भी लोगों को लक्षणों की विशेष निगरानी करते रहना चाहिए।
सर्दी-जुकाम, नाक बहने, गले में खराश, बुखार, कमजोरी और सिरदर्द को वैसे तो कोविड-19 का सामान्य लक्षण माना जाता रहा है, हालांकि कुछ लोगों में संक्रमण की स्थिति में कई तरह की विचित्र समस्याएं भी देखी जा रही हैं। आइए आगे ऐसी ही कुछ समस्याओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।