दुनिया में हजारों तरह की बीमारियां हैं, जिनमें से कुछ कम खतरनाक हैं तो कुछ बेहद ही खतरनाक और जानलेवा हैं, जैसे- कैंसर, टीबी आदि। कुछ बीमारियां तो लाइलाज भी हैं, जिनमें इंसान के जिंदा बचने की संभावना बेहद ही कम होती है। इन बीमारियों में मोटर न्यूरॉन, स्टोनमैन सिंड्रोम, एक्सरोडरमा पिग्मेंटोसम, एपीडर्मोडीस्प्लासिया वेरूसीफॉर्मिस यानी ट्री मैन सिंड्रोम आदि शामिल हैं। इसके अलावा बहुत ही ऐसी भी बीमारियां हैं, जिनके बारे में लोगों को कोई जानकारी ही नहीं है। ऐसी ही एक बीमारी है सेप्सिस, जिसे 'रहस्यमय बीमारी' भी कहा जाता है, क्योंकि अधिकतर लोग इसके बारे में जानते ही नहीं हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनियाभर में लाखों लोग इस बीमारी के शिकार होते हैं और उनमें से हजारों लोगों की मौत हो जाती है। आइए जानते हैं कि यह बीमारी है क्या और इसके लक्षण क्या-क्या हो सकते हैं?
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क्या है सेप्सिस?
सेप्सिस एक ऐसी बीमारी है, जिसकी शुरुआत शरीर में किसी प्रकार के संक्रमण से होती है, जैसे- शरीर के किसी हिस्से में खरोंच लगना या कट जाना या कीड़े के काट लेने से। इसलिए किसी छोटी सी खरोंच या फिर कीड़े के काटने को नजरअंदाज बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।
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कितनी खतरनाक है यह बीमारी?
इस बीमारी में रोग प्रतिरोधक प्रणाली अधिक सक्रिय हो जाती है। अगर संक्रमण शरीर में तेजी से फैलने लगता है तो उसे रोकने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली भी तेजी से काम करना शुरू कर देती है। इस वजह से शरीर का कोई अंग काम करना बंद कर सकता है, सेप्टिक हो सकता है, यहां तक कि मरीज की मौत भी हो सकती है।
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इस बीमारी के लक्षण क्या हैं?
शरीर में तेज कंपकपाहट या मांसपेशियों में दर्द
दिन भर पेशाब का न आना
सांस लेने में अधिक कठिनाई
त्वचा का बेजान पड़ जाना
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विशेषज्ञ कहते हैं कि यह बीमारी बच्चों को भी हो सकती है। उनमें शरीर का पीला पड़ जाना, बेजान दिखना, बहुत सुस्ती, जागने में मुश्किल, शरीर का ठंडा पड़ जाना, तेज सांसें और शरीर का अकड़ जाना, जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
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