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वैक्सीन एक-काम अनेक: कोरोना के साथ अन्य वायरस से मुकाबले के लिए एक ही वैक्सीन विकसित करने की तैयारी

Mon, 23 Aug 2021 04:32 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना से मुकाबले के लिए वैक्सीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
दुनियाभर में पिछले डेढ़ साल से जारी कोरोना का संक्रमण स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। लोगों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए दुनियाभर में कई तरह की वैक्सीन बन चुकी हैं, जिन्हें तमाम अध्ययनों में बेहद असरदार बताया गया है। देश में फिलहाल कोरोना से सुरक्षा देने के लिए 6 वैक्सीनों को आपातकालीन उपयोग को मंजूरी मिल चुकी है। जिनमें से तीन स्वदेशी वैक्सीन कोवाक्सिन, कोविशील्ड और जाइकोब-डी के साथ रूस की स्पूतनिक-वी तथा अमेरिका की माडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन शामिल है। दुनिया के कई देशों में कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए विशेषज्ञ सभी लोगों से जल्द से जल्द टीकाकरण कराने की अपील कर रहे हैं।
कुछ अध्ययन में वैज्ञानिकों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में कोरोना जैसे कई और वायरस का प्रकोप देखने को मिल सकता है। इससे बचाव के लिए लोगों को अपनी इम्यूनिटी को मजबूत करने वाले प्रयास लगातार करते रहने चाहिए। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए देश में ऐसे वैक्सीन के निर्माण के बारे में विचार किया जा रहा है, जिससे कोरोना के साथ भविष्य के संभावित अन्य वायरस के गंभीर खतरों को एक साथ लक्षित किया जा सके। आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं।
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देश में कोरोना से मुकाबले के लिए कई वैक्सीन उपलब्ध (सांकेतिक) - फोटो : पीटीआई
एक ही वैक्सीन से अनेक संक्रमण से सुरक्षा की योजना
क्या एक ही वैक्सीन से कोरोना के साथ कई अन्य गंभीर वायरल संक्रमणों से सुरक्षा मिल सकती है? इस बारे में देश के वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं। भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ रेणु स्वरूप कहती हैं, देश में कोरोना संक्रमण और नए वैरिएंट्स के खतरे को कम करने के लिए कोविड की वैक्सीनों का परीक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा वैज्ञानिक पैन-कोरोना भी एक वैक्सीन को विकसित करने की संभावनाओं पर शोध कर रहे हैं, जिससे भविष्य में यदि कोरोना की तरह अन्य कोई वायरस आता है तो यह वैक्सीन उससे भी मुकाबला कर सके। वैज्ञानिक ऐसी संभावनाओं के बारे में अध्ययन कर रहे हैं।
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कोरोना वैक्सीन साबित हो रही हैं असरदार (सांकेतिक) - फोटो : iStock
भारत में कोरोना से मुकाबले के लिए मौजूद हैं असरदार टीके
देश में वैक्सीन की स्थिति और उनकी प्रभाविकता को लेकर डॉ रेणु स्वरूप कहती हैं, हमारे पास कोरोना के टीकों की एक पाइपलाइन है। हाल ही में कोविड की डीएनए वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी मिली है, इसके अलावा हमारे अपने एमआरएनए वैक्सीन के जल्द ही तीसरे चरण के परीक्षण में जाने की संभावना है। इसके अलावा बायोलॉडिकल ई कैंडिडेट सितंबर के अंत तक अनुमोदन के लिए ड्रग नियामक में आवेदन कर सकते हैं। नेजल वैक्सीन को भी दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण की मंजूरी मिल चुकी है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि भारत कम समय में ही कोरोना से मुकाबले के लिए मजबूत स्थिति में है।

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पहली डीएनए कोविड वैक्सीन को हाल ही में मिली है मंजूरी (सांकेतिक) - फोटो : पिक्साबे
कोरोना की पहली डीएनए वैक्सीन बनी है भारत में
भारत ने कोरोना से मुकाबले के लिए दुनिया की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन विकसित की है। अहमदाबाद स्थित फार्मास्युटिकल प्रमुख कंपनी जायडस कैडिला द्वारा विकसित की जाइकोब-डी डीएनए तकनीक पर आधारित वैक्सीन है। यह एक प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन है जो प्लास्मिड नामक डीएनए अणु के गैर-प्रतिकृति वर्जन का उपयोग करके तैयार की गई है। यह शरीर में सार्स-सीओवी-2 वायरस के मेंब्रेन पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन का एक हानिरहित वर्जन तैयार करने में मदद करेगी, जिससे भविष्य में संक्रमण के खिलाफ आसानी से सुरक्षा प्राप्त की जा सकेगी। कई परीक्षणों में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। ड्रग नियामक की ओर से इस वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है।
 
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बच्चों के लिए टीके - फोटो : पीटीआई
बच्चों के लिए दो वैक्सीन हैं लाइन में
दुनियाभर में बच्चों के लिए कोरोना के टीके फिलहाल सबसे बड़ी मुश्किल बने हुए हैं। जिस तरह के कोरोना के नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं, ऐसे में बच्चों में संक्रमण के ज्यादा खतरे को लेकर विशेषज्ञ आगाह कर रहे हैं। भारत में बच्चों के लिए फिलहाल जाइकोब-डी वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिल चुकी है, वहीं कुछ रिपोर्टस में बताया जा रहा है कि सरकार जल्द ही कोवाक्सिन को भी बच्चों के लिए मंजूरी दे सकती है। फिलहाल इस टीके का ट्रायल चल रहा है।


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नोट: यह लेख एएनआई की ट्वीट और तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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