फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sadhguru Health: ब्रेन में ब्लीडिंग की शिकायत के बाद हुई सर्जरी, जानिए क्यों होता है मस्तिष्क में रक्तस्राव?

Thu, 21 Mar 2024 12:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
सद्गुरु जग्गी वासुदेव - फोटो : ANI
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव की बेहतर सेहत को लेकर देशभर में दुआएं की जा रही हैं। रविवार को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में सद्गुरु की ब्रेन सर्जरी की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सद्गुरु को मस्तिष्क में गंभीर रक्तस्राव की समस्या थी, जिसके जानलेवा दुष्प्रभाव हो सकते थे जिसके कारण आपातकालीन ब्रेन सर्जरी हुई है, फिलहाल उनकी हालत में सुधार हो रहा है। सर्जरी के बाद सोशल मीडिया पर सद्गुरु ने एक वीडियो संदेश में बताया कि वह ठीक हैं।
 

सद्गुरु की बेटी, राधे जग्गी ने पिता के स्वास्थ्य पर अपडेट साझा करते हुए बताया, देशभर में सद्गुरु के जल्द ठीक होने के लिए प्रार्थना की जा रही है, वह ठीक हो रहे हैं। अस्पताल की तरफ से भी जारी रिपोर्ट में बताया गया, सर्जरी के बाद सद्गुरु को वेंटिलेटर से हटा दिया गया, सेहत में लगातार प्रगति हो रही है।

गौरतलब है कि मस्तिष्क में रक्तस्राव के कारण सद्गुरु पिछले चार सप्ताह से गंभीर सिरदर्द से परेशान थे। ऐसे में सवाल उठता है कि ब्रेन में ब्लीडिंग के आखिर क्या कारण हो सकते हैं, क्या इस तरह का खतरा किसी को भी हो सकता है? और इसके जोखिमों से बचाव के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं?
विज्ञापन

2 of 5
ब्रेन में ब्लीडिंग की समस्या - फोटो : Pixabay
सद्गुरु को सबड्यूरल हेमेटोमा की समस्या

अस्पताल की ओर से जारी बयान में न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया, दर्द की गंभीरता के बावजूद सद्गुरु ने अपना सामान्य दैनिक कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियां जारी रखीं। यहां तक कि 8 मार्च को महा शिवरात्रि समारोह भी आयोजित किया। 15 मार्च तक उनकी तबीतय बिगड़ती गई। डॉक्टर्स की टीम को सबड्यूरल हेमेटोमा का संदेह हुआ और तत्काल एमआरआई की सलाह दी गई। जांच में पता चला कि मस्तिष्क की सूजन बढ़ गई थी, बड़े पैमाने पर रक्तस्राव हुआ है।
 

आइए जानते है कि सबड्यूरल हेमेटोमा की समस्या क्या होती है ये कितनी गंभीर हो सकती है?
विज्ञापन

3 of 5
मस्तिष्क में सूजन और रक्तस्राव - फोटो : istock
सबड्यूरल हेमेटोमा और इसके कारण होने वाली समस्या

सबड्यूरल हेमेटोमा, खोपड़ी के नीचे मस्तिष्क की सतह पर खून के एकत्रित होने की समस्या है। इस प्रकार का रक्तस्राव आमतौर पर सिर पर चोट लगने के बाद होता है। कुछ स्थितियों में ये स्थिति अक्यूट या क्रोनिक भी हो सकती है। खोपड़ी और मस्तिष्क की सतह के बीच किसी नस के फट जाने के कारण ये दिक्कत हो सकती है। मस्तिष्क की सतह पर रक्त के थक्के बनने की स्थिति कई प्रकार की गंभीर समस्याओं का भी कारण बन सकती है। 

सबड्यूरल हेमेटोमास की समस्या जानलेवा मानी जाती है, जिसमें आपातकालीन चिकित्सा की जरूरत होती है। 

4 of 5
मस्तिष्क में रक्तस्राव - फोटो : istock
कैसे जानें कहीं मस्तिष्क में हो तो नहीं रही है ब्लीडिंग?

अक्यूट सबड्यूरल हेमेटोमा के लक्षण काफी स्पष्ट होते हैं, इसके कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा रहता है। सबड्यूरल हेमेटोमा के कारण बोलने में कठिनाई होने, चेतना की हानि या कोमा की समस्या, शरीर के एक तरफ लकवा, गंभीर सिरदर्द, कमजोरी, चलने और देखने में समस्या, भ्रम या व्यक्तित्व बदलाव की दिक्कत हो सकती है।  

यदि किसी व्यक्ति में इस तरह के एक से दो लक्षण हों तो तुरंत आपातकालीन विभाग में जाना चाहिए। क्रोनिक सबड्यूरल हेमेटोमा के कारण डिमेंशिया, स्ट्रोक, ट्यूमर या मस्तिष्क में अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मस्तिष्क में रक्तसाव की समस्या से कैसे बचें? - फोटो : Pixabay
किन लोगों में इस तरह का खतरा, कैसे करें बचाव?

सबड्यूरल हेमेटोमा के अधिकतर मामले आमतौर पर मस्तिष्क में चोट के कारण होती है। इसके अलावा भारी मात्रा में शराब पीने वाले लोगों में भी इस गंभीर समस्या का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। सबड्यूरल हेमेटोमा के जोखिमों से बचाव के लिए जरूरी है कि सिर को किसी भी तरह के चोट से बचाएं। मोटरसाइकिल चलाते समय हेलमेट और कार में सीट बेल्ट लगाना महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा रक्त को पतला करने वाली दवाएं किसी चिकित्सक की सलाह पर ही लें, इसके कारण भी जोखिम हो सकता है। शराब पीने वालों में भी ब्रेन ब्लीडिंग का खतरा अधिक हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि शराब से दूरी बनाकर रखें।


--------------
स्रोत और संदर्भ
Important Information on Sadhguru’s Brain Surgery Recovery - Official Update

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें