साल 2019 में पहली बार सामने आए नोवेल कोरोना वायरस के अब तक कई वैरिएंट्स का पता चल चुका है, जिसमें लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। कुछ वैरिएंट्स को अत्याधिक संक्रामक पाया गया, वहीं कुछ के कारण लोगों में गंभीर रोग के मामले सामने आए। वैज्ञानिकों ने पिछले कुछ समय से वायरस की प्रकृति में एक बड़े बदलाव को नोटिस किया है। विशेषज्ञों ने पाया कि ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट्स, दो वायरस के संयोजन से उत्पन्न वैरिएंट्स और हाल में सामने आया कोरोना का सबसे संक्रामक माना जा रहा एक्सई वैरिएंट, परीक्षण को चकमा दे सकता है।
कोविड-19 मामलों पर शोधकर्ताओं का कहना है कि हर वैरिएंट का अलग-अलग तरह की जीनोमिक संरचना होती है, इसी के आधार पर यह पता चलता है कि वायरस शरीर के किस हिस्से को ज्यादा प्रभावित कर सकता है और इसके परिणामस्वरूप किस तरह के लक्षणों की आशंका होती है? पर डेल्टा के बाद से सामने आए कई वैरिएंट्स की प्रकृति ऐसी देखी जा रही है, जो इसे आरटी-पीसीआर जांच को चकमा देने में मदद करती है। आइए जानते हैं कि इस स्थिति में संक्रमण का पता कैसे लगाया जा सकता है? साथ ही किन वैरिएंट्स में इस तरह की प्रकृति देखी गई है?