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सावधान: कम उम्र में ही आपको बहरा बना सकती है यह आदत, लॉकडाउन के दौरान बढ़े मामले

Sat, 07 Aug 2021 07:50 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बहरेपना का कारण बन सकती है ईयरफोन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से दुनियाभर में जारी कोरोना संक्रमण के कारण ज्यादातर लोगों का काम 'वर्क फ्रॉम होम' की स्थिति में चल रहा है। घर से काम करने के चलते लोगों का स्क्रीन टाइम पहली की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है। इसके अलावा बैक-टू-बैक मीटिंग्स, वर्क कॉल्स, संगीत सुनने और फोन पर बातें करने के लिए लोगों को पहले से कहीं ज्यादा ईयरफोन पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अगर आप भी ईयरफोन जैसे उपकरणों का प्रयोग बहुत ज्यादा कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए, यह आपके लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पिछले एक साल में लोगों में कान के संक्रमण और खुजली के साथ बहरापन की समस्या काफी ज्यादा सामने आ रही है। ईयरफोन के इस्तेमाल को इस समस्या के मुख्य कारक के रूप में देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ईयरफोनों के ज्यादा उपयोग के कारण कम उम्र में हो लोगों में कान से संबंधित दिक्कतों का निदान किया जा रहा है। सभी लोगों को इस बारे में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। आइए आगे की स्लाइडों में ईयरफोन के कारण होने वाली समस्या और उसके निजात पाने के तरीकों के बारे में जानते हैं।
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इयरफोन से कानों को हो रहे हैं गंभीर नुकसान - फोटो : iStock
ईयरफ़ोन के ज्यादा इस्तेमाल के कारण बढ़ रही है कान से संबंधित दिक्कतें
डॉक्टर कहते हैं, पहले केवल किशोर और युवा लोग मनोरंजन के लिए ईयरफ़ोन या ईयर प्लग का उपयोग करते थे, अब बच्चों और बुजुर्गों की भी यही आदत बन चुकी है। इस तरह के उपकरण कानों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं, कम उम्र में ही लोगों को कम सुनाई देने और यहां तक कि बहरेपन की दिक्कतें हो रही हैं। तेज आवाज में इयरफ़ोन के लंबे समय तक उपयोग के कारण लोगों में कान से जुड़ी दिक्कतें तेजी से बढ़ती जा रही हैं।
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तेज आवाज वाले ईयरफोन हैं बेहद नुकसानदायक - फोटो : social media
इससे ज्यादा तेज न रखें ईयरफोन की आवाज 
विशेषज्ञों के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी ध्वनि के नियंत्रण को लेकर लोगों को आगाह करता है। डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों के मुताबिक ईयरफोन जैसे उपकरणों की आवाज को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक है। 90 डीबी से ऊपर की आवाज, लॉन में घास काटने की मशीन चलने की आवाज के बराबर होती है। कुछ घंटों तक लगातार इतनी तेज आवाज कान के पर्दों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक इन उपकरणों की ध्वनि का औसत स्तर 80-90 डीबी के बीच ही होना चाहिए। 100 डीबी से ऊपर की आवाज सुनना कानों के लिए गंभीर दिक्कतें पैदा कर सकता है।

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कानों में गंभीर दिक्कतें पैदा कर सकती है ईयरफोन (प्रतीकात्मक) - फोटो : Social media
सावधानी से करें ईयरफोन का इस्तेमाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ईयरफोन के कारण कान में होने वाले नुकसान को कुछ सावधानियां बरतते हुए कम किया जा सकता है। सबसे पहले ध्यान रखें कि ईयरफोन की आवाज बहुत तेज न हो और न ही इसे लंबे समय तक लगाकर रखें। ईयरफोन के रबर को अल्कोहलिक रब से साफ करें और उपयोग करने से पहले उन्हें सुखा लें। अगर कानों में खुजली हो रही है, तो बाहरी हिस्से पर चिकनाई के लिए नारियल का तेल लगाएं, उसे ज्यादा खरोचें यह रगड़ें नहीं। लगातार कानों में ईयरफोन लगाए रहने के गंभीर नुकसान हो सकते हैं, इससे बचने की कोशिश करें। 
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ईयरफोन के इस्तेमाल के समय बरतें सावधानी - फोटो : Social media
इन बातों का रखें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ईयरफोन का इस्तेमाल कम से कम करें। हालांकि यदि आपको इसकी बहुत ज्यादा आवश्यकता रहती है तो ईयर-प्लग की बजाय ओवर-द-हेड ईयरफ़ोन का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। इससे कानों के सूखापन और खुजली की समस्या के साथ संक्रमण के जोखिम को भी कम किया जा सकता है। अच्छी क्वालिटी के  ईयरफोन का इस्तेमाल करना बेहतर होता है, यदि ईयरफोन के आकार या आवाज के कारण कानों में दर्द हो रहा हो तो इसे तुरंत निकाल दें। कानों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।


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नोट: यह लेख विशेषज्ञों का सलाह के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।


 
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