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कोरोनाकाल में गर्भवती महिलाएं इस तरह रखें अपनी डाइट, जच्चा-बच्चा दोनों रहेंगे स्वस्थ 

Wed, 12 May 2021 06:34 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कई बार ज्यादातर गलत जानकारी मिलती रहती है - फोटो : Social Media

Medically Reviewed by Dr. kshitij Murdia
डॉ क्षितिज मुर्डिया
स्त्री रोग विशेषज्ञ, को फाउंडर- इंदिरा आईवीएफ
अनुभव- 10 वर्ष

व्यक्ति का स्वास्थ्य उसके आहार को दर्शाता है। वैसे तो सभी का आहार संतुलित और पौष्टिक होना चाहिए, लेकिन गर्भावस्था के दौरान यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है और जब समय कोरोना का चल रहा हो तब तो गर्भवती महिला को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। कई बार इसकी कई अटकलें लगायी जाती हैं, जिससे भ्रम बढ़ता है और कई बार ज्यादातर गलत जानकारी मिलती रहती है। अगली स्लाइड्स से जानिए गर्भवती महिलाओं की व्यवस्थित डाइट के बारे में। 

 

 

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खाना संतुलित होना आवश्यक है - फोटो : Social media

क्या खाना चाहिए?
घर पर पकाया हुआ, ताजा खाना गर्भवती महिला के लिए सबसे सही होता है। फल या कच्ची सब्जियां खाने से पहले उन्हें गुनगुने पानी से अच्छी तरह से साफ करना चाहिए ताकि उन पर लगे हुए हानिकारक केमिकल्स और सूक्ष्मजीवों से बचा जा सकता है। खाना संतुलित होना आवश्यक है। संतुलित आहार में निम्न चीजें पर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए:

 
  • प्रोटीन्स (दालें, अंकुरित अनाज, मांस, मछली)

  • कार्बोहाइड्रेट (चावल, चपाती, रोटी)

  • फैट (तेल, घी)

  • फाइबर (फल, सब्जियां, सलाद)

  • प्रोबायोटिक्स (दही, छाछ, दही)

  • ओमेगा 3 फैटी एसिड (तिल के बीज, अलसी, सालमन)

  • कैल्शियम (डेयरी उत्पाद, टोफू, बादाम, हरी पत्तेदार सब्जियां)

  • विटामिन्स 

  • खनिज पदार्थ

 

 

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ऐसे पदार्थों से दूर ही रहना बेहतर होगा - फोटो : social media

क्या न खाएं?
वातित पेय, डिब्बाबंद पदार्थ और प्रेजरवेटिव्स , रसायनों, कृत्रिम रंगों और सिंथेटिक पदार्थों वाले खाद्य पदार्थों को आपकी किराने की सूची में नहीं होना चाहिए। मादक पेय पदार्थों का सेवन बिलकुल भी नहीं करना है। मिठाई और तले हुए पदार्थ जिनमें कैलोरीज ज्यादा होती हैं ऐसे पदार्थों से दूर ही रहना बेहतर होगा। इन पदार्थों में पोषण मूल्य अधिक नहीं होता, लेकिन उनसे शरीर में फैट्स जमा होते हैं और आगे चलकर जटिलताओं का कारण बन सकते हैं।

 

 

 

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ताजा पकाया हुआ होना चाहिए - फोटो : पिक्साबे

बाहर का खाते वक्त इन बातों का ध्यान रखें 
बाहर का खाना खा रहे हो तो उस खाने को साफ सुथरी जगह पर और स्वच्छता का पालन करते हुए पकाया गया है या नहीं यह देख लेना जरूरी है। यदि मजबूरी में बाहर का खाना खाना ही पड़ रहा है तो ध्यान रखें कि यह ज्यादा तेल वाला, मसालेदार नहीं होना चाहिए। आप जो भी खा रही हैं वो ताजा पकाया हुआ होना चाहिए, जैसे कि गरमागरम इडली, डोसा खा सकती हैं, लेकिन ठंडे सैंडविच बिलकुल भी नहीं। कुछ पदार्थों को खाने की तीव्र इच्छा होना स्वाभाविक है लेकिन उन्हें घर पर पकाकर खाना ही बेहतर है, इससे आप अपने आपको बीमारियों से बचा सकती हैं।

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कैलोरीज की आवश्यकता बढ़ती जाती है - फोटो : social media

कितना खाना और पीना चाहिए?
गर्भवस्था के पहले तीन महीनों में महिला के आहार में उतनी ही कैलोरीज हो सकती हैं जितनी गर्भधारणा के पहले होती थी। धीरे-धीरे कैलोरीज की आवश्यकता बढ़ती जाती है। अगले तीन महीनों में संतुलित आहार में करीबन 340 अतिरिक्त कैलोरीज और आखरी तीन महीनों में 450 अतिरिक्त कैलोरीज होनी चाहिए। दिनभर में 3 से 4 लीटर पानी पीना अत्यंत जरूरी है। जिन्हें चाय या कैफीन की आदत है उनके लिए दिन भर में दो कप तक ही अपने आप को सीमित रखना जरूरी है।

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फल, कच्ची सब्जियां और टोस्ट्स जैसे पदार्थ खा सकती हैं - फोटो : Pixabay

भूख न लगने पर ये करें 
हार्मोनल बदलावों की वजह से गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में भूख न लगना स्वाभाविक है। ऐसे में आपको जो पसंद है वो खाइए। बहुत सारा खाना या एक दिन में तीन बार खाना अगर मुश्किल हो रहा है तो दिनभर में थोड़ा-थोड़ा खाना ज्यादा बार खाइए। मसालों या अन्य किसी भी चीज की तीव्र गंध सही नहीं जा रही हो तो फल, कच्ची सब्जियां और टोस्ट्स जैसे पदार्थ खा सकती हैं। इस दौरान दूध से घृणा हो सकती है, दूध की जगह टोफू और साबुत अनाज खाए जा सकते हैं, उनमें कैल्शियम काफी अधिक होता है।

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शरीर में पोषण की कमी ना हो - फोटो : social media

ऐसा करने से होती है उल्टी
खाना खाने के बाद तुरंत लेटना ठीक नहीं है, क्योंकि हार्मोन प्रोजेस्टेरोन की वजह से भोजन की नली के निचले भाग की मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं, इससे उल्टी हो सकती है। जी मचलना, उल्टी, किसी पदार्थ या गंध से घृणा होना आदि तकलीफें दूसरी तिमाही में कम होती जाती हैं। लेकिन यह अनुभव सभी को नहीं आते, आपका शरीर हार्मोन्स में होने वाले बदलावों को झेलने में कितना सक्षम है, इस पर यह निर्भर करता है। पर्याप्त मात्रा में खाना जारी रखना जरूरी है ताकि माँ के शरीर में पोषण की कमी ना हो।
नोट- यह लेख इंदिरा आईवीएफ के को -फाउंडर डॉ क्षितिज मुर्डिया से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर डॉ क्षितिज मुर्डिया पिछले 10 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। वे अब तक 12.000 से अधिक आईवीएफ प्रक्रियाओं का हिस्सा रह चुके हैं। 
अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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