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Poonam Pandey: क्या 'एचपीडी' की शिकार हैं पूनम पांडे? लोगों का अटेंशन पाने के अजीबो-गरीब तरीके ने उठाए कई सवाल

Sun, 04 Feb 2024 08:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पूनम पांडे - फोटो : instagram
अपनी ही मौत की झूठी खबरें उड़ाकर सुर्खियां बटोरने वाली अभिनेत्री-मॉडल पूनम पांडे इन दिनों काफी चर्चा में हैं। शुक्रवार को उन्हीं के सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर की गई कि सर्वाइकल कैंसर से पूनम पांड की मौत हो गई, हालांकि अगले ही दिन पूनम ने लाइव आकर बताया कि वह जिंदा हैं। पूनम ने कहा, लोगों में सर्वाइकल कैंसर को लेकर चर्चा हो, इसकी जागरूकता बढे़, इसलिए उन्होंने अपनी ही मौत की झूठी खबर फैलाई थी।

पूनम पांडे के इस 'पब्लिसिटी स्टंट' को लेकर लोगों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया दी हैं। ज्यादातर लोगों का कहना है कि जागरूकता बढ़ाने के लिए इस तरह की खबरें फैलाना 'स्वस्थ तरीका' नहीं माना जा सकता है।

गौरतलब है कि पूनम की मौत की झूठी खबर सामने आने से एक दिन पहले ही एक फरवरी को वित्तमंत्री ने बजट के दौरान सर्वाइकल कैंसर के टीकाकरण को बढ़ाने पर जोर दिया था। सर्वाइकल कैंसर, महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसर में से एक है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है।
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पूनम पांडे - फोटो : अमर उजाला
पहले भी हैरतअंगेज तरीके अपनाती रही हैं पूनम

सुर्खियों में बने रहने के लिए ये कोई पहली बार नहीं है जब पूनम पांडे ने इस तरह के हैरतअंगेज तरीके अपनाए हैं। इससे पहले साल 2011 में आयोजित विश्वकप के दौरान भी पूनम पांडे अपने बयान को लेकर काफी चर्चा में आई थीं। फाइनल मैच के एक दिन पहले पूनम ने वीडियो मैसेज में कहा थी, अगर भारतीय टीम फाइनल जीत जाती है तो मैं कपड़े उतार दूंगी।

अब अपनी ही मौत की खबर फैलाने को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि ये तरीका किसी भी तरह से सही नहीं है।
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पूनम पांडे का पब्लिसिटी स्टंट - फोटो : istock
ये तरीके सामाजिक रूप से ठीक नहीं?

इस तरह के पब्लिसिटी स्टंट का सामाजिक रूप से क्या प्रभाव हो सकता है, इस बारे में जानने के लिए हमने वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से बातचीत की। डॉ सत्यकांत कहते हैं, सोशल मीडिया के इस दौर में लोगों का ध्यान आकर्षित करने और खबरों में बने रहने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं। मेट्रो में बिकनी पहनकर घूमने से लेकर, सोशल मीडिया पर अश्लील और अभद्र कंटेंट प्रस्तुत करके अधिक से अधिक लोगों को इंगेज करने और अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के प्रयास किए जा  रहे हैं। पर पूनम पांड ने जो किया वह मौत जैसे संवेदनशील विषय का मजाक बनाना है।

डॉक्टर कहते हैं, वैसे तो पूनम पांड को लेकर इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकती है, लेकिन लोगों के अटेंशन पाने के इस तरह के तरीके को साइकोलॉजी में हिस्ट्रियॉनिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर के नाम से जाना जाता है।

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मानसिक स्वास्थ्य विकारों की समस्या - फोटो : Pixabay
क्या है हिस्टेरियोनिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर?

हिस्टेरियोनिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर (एचपीडी) मानसिक स्वास्थ्य की समस्या है जिसमें भावनाओं की अस्थिरता, सेल्फ इमेज को लेकर चिंतित रहना और लोगों का ध्यान आकर्षित करने की अत्यधिक इच्छा बनी रहती है। एचपीडी वाले लोग, ध्यान आकर्षित करने के लिए अक्सर नाटकीय या अनुचित व्यवहार करते रहते हैं। हिस्टेरियोनिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर वाले लोगों को अक्सर यह एहसास नहीं होता है कि उनका व्यवहार और सोचने का तरीका समस्याग्रस्त हो सकता है।

एचपीडी की समस्या वैसे तो दुर्लभ विकारों में से एक है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि लगभग 1% लोगों को यह स्थिति हो सकती है।
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हिस्टेरियोनिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर का खतरा - फोटो : Pixabay
एचपीडी की पहचान

हिस्टेरियोनिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर की मुख्य पहचान, अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए अत्यधिक, भावुकता और कामुकता वाले प्रयास करते रहना है। 
  • लोगों का अटेंशन न मिलने पर ऐसे लोग उदास महसूस कर सकते हैं।
  • अक्सर बहुत अधिक नाटकीय और अत्यधिक भावनात्मक व्यवहार करते रहना। 
  • आकर्षक दिखने और लोगों को ध्यान केंद्रित करने के लिए अजीब पहनावा या मेकअप करना। 
डॉक्टर सत्यकांत बताते हैं, एचपीडी जैसी स्थिति आनुवांशिक हो सकती है, बचपन में ट्रॉमा या उपेक्षा के शिकार लोग भी एचपीडी की समस्या विकसित कर सकते हैं। अगर आपके आसपास किसी व्यक्ति में अप्रत्याशित रूप से एचपीडी के लक्षण दिखते हैं तो उसे किसी मनोचिकित्सक के पास जरूर ले जाएं। इलाज और थेरेपी की मदद से एचपीडी के कारण होने वाली जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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