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सावधान: कहीं आपको भी तो नहीं है प्लांटर फ़ेसियाइटिस की दिक्कत? जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Mon, 09 Aug 2021 05:20 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्लांटर फ़ेसियाइटिस की समस्या को पहचानें (सांकेतिक) - फोटो : social media
Medically Reviewed by-
डॉ जोहैब काज़ी
(फिजियोथेरपिस्ट & कपिंग एकस्पर्ट)
लखनऊ


एड़ियों में दर्द की समस्या कई कारणों से हो सकती है। एड़ी में चोट लगने या फ्रैक्चर के साथ मांसपेशियों में खिंचाव, मोच और डायबिटीज जैसी स्थितियां इस तरह की समस्या को जन्म दे सकती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादातर लोगों में प्लांटर फ़ेसियाइटिस के कारण एड़ियों में दर्द की समस्या की निदान किया जाता है। इस स्थिति में लोगों के एड़ी के बीच में दर्द हो सकती है। प्लांटर फ़ेसियाइटिस एक प्रकार का लिगामेंट होता है जो आपकी एड़ी को पैर के सामने वाले हिस्से से जोड़ता है।
डॉक्टरों के मुताबिक प्लांटर फ़ेसियाइटिस, आर्थोपेडिक की सबसे आम शिकायतों में से एक है। 40 से 70 साल की आयु वाले लोगों में इस समस्या के विकसित होने का खतरा अधिक होता है।पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह दिक्कत अधिक देखने को मिलती है। हालांकि प्लांटर फ़ेसियाइटिस  किन कारणों से होता है, इस बारे में बहुत ज्यादा स्पष्ट नहीं है। यदि आपको सो कर उठने पर पैरों के तले या एड़ी में असहनीय दर्द और जकड़न का अनुभव होता हो तो सावधान हो जाइए, यह प्लांटर फ़ेसियाइटिस  की समस्या के ओर इशारा हो सकता है।
आइए आगे की स्लाइडों में इस समस्या के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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पैर के निचले हिस्से दर्द की समस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
प्लांटर फ़ेसियाइटिस के क्या लक्षण हैं?
अमर उजाला से बातचीत में फिजियोथेरेपिस्ट डॉ जोहैब काजी बताते हैं, प्लांटर फ़ेसियाइटिस के कारण एड़ी के पास पैर के निचले हिस्से में तेज दर्द होता है। सुबह उठने के बाद 4-5 कदम चलते ही आपको तेज दर्द का एहसास हो सकता है। कुछ लोगों में यह लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने के बाद उठने पर भी शुरू हो सकता है। जिन लोगों को प्लांटर फ़ेसियाइटिस की दिक्कत होती है, आमतौर पर दर्द की समस्या काम करने के दौरान नहीं, बल्कि काम के बाद आराम करते समय अधिक होती है। यदि आपको भी इस तरह के लक्षण महसूस हो रहे हों तो इस बारे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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प्लांटर फ़ेसियाइटिस की समस्या कुछ लोगों में हो सकती है अधिक - फोटो : Pixabay
प्लांटर फ़ेसियाइटिस  किन कारणों से होता है?
डॉ जोहैब कहते हैं, प्लांटर फ़ेसियाइटिस के वास्तविक कारणों के बारे में फिलहाल विशेषज्ञों को स्पष्ट जानकारी नहीं है, हालांकि कुछ प्रकार की स्थितियां इस खतरे को बढ़ा सकती हैं। जिन लोगों को वजन अधिक होता है, उनमें इस समस्या के होने का खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा धावकों और बहुत लंबे समय तक खड़े रहकर काम करने वाल लोगों में प्लांटर फ़ेसियाइटिस की शिकायत अधिक देखने को मिल सकती है। 

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फिजियोथेरपी से ठीक हो सकती है प्लांटर फ़ेसियाइटिस की समस्या - फोटो : iStock
प्लांटर फ़ेसियाइटिस का क्या इलाज है?
डॉ जोहैब काजी बताते हैं, जिन लोगों में प्लांटर फ़ेसियाइटिस का निदान होता है, उन्हें प्रारंभिक तौर पर दर्द वाले हिस्से पर आइसिंग करने की सलाह दी जाती है। दर्द को कम करने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट आपके कुछ स्ट्रेचिंग के अभ्यास बता सकते हैं। इसके अलावा एड़ी में सूजन और दर्द को कम करने के लिए एथलेटिक टैपिंग और इलेक्ट्रोथेरेपी मशीन को भी प्रयोग में लाया जा सकता है। कपिंग थेरेपी से भी इस समस्या में काफी आराम मिल सकता है। रोगियों को ज्यादा से ज्यादा आराम करने की सलाह दी जाती है।
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आरामदायक जूते पहनकर रखें - फोटो : istock
प्लांटर फ़ेसियाइटिस  से बचने के क्या तरीके हैं?
डॉ जोहैब बताते हैं, जीवनशैली में कुछ बदलाव करके प्लांटर फ़ेसियाइटिस की समस्या से बचाव किया जा सकता है। हमेशा आरामदायक जूते पहनें और अपने एथलेटिक फुटवियर को नियमित रूप से बदलते रहें। दिनचर्या में हल्के व्यायामों जैसे तैराकी या साइकिलिंग आदि को शामिल करें। प्लांटर फ़ेसियाइटिस से बचे रहने के लिए वजन को नियंत्रित बनाए रखना सबसे अच्छा माना जाता है। आहार में विटामिन सी और डी, कॉपर, ब्रोमलेन जैसे पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थों को जरूर शामिल करें। सबसे खास बात यदि आपको बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं तो समय पर इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।


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नोट: यह लेख डॉ जोहैब काज़ी (फिजियोथेरपिस्ट & कपिंग एकस्पर्ट) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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