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बड़ा सवाल: क्या पांच दशक पहले ही ओमिक्रॉन वैरिएंट का चल गया था पता? जानिए क्या है पूरा माजरा

Fri, 03 Dec 2021 03:29 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स - फोटो : iStock
नवंबर के आखिर हफ्तोंं में सामने आए कोरोना के सुपर संक्रामक माने जा रहे ओमिक्रॉन वैरिएंट ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक अब तक यह वैरिएंट दुनिया के करीब 23 देशों में फैल चुका है। इतना ही नहीं बताया जा रहा है कि कोरोना के अन्य वैरिएंट्स को जिस स्तर तक पहुंचने में 100 दिन से अधिक का समय लगा था, वहीं ओमिक्रॉन वैरिएंट को इसके लिए महज 10 दिन का वक्त लगा। इससे स्पष्ट होता है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट काफी अधिक संक्रामक हो सकता है। पर क्या कोरोना के इस वैरिएंट के बारे में दुनिया को करीब पांच दशक पहले ही पता चल गया था?



असर में ट्विटर पर ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर किए जा रहे कुछ ट्वीट्स के चलते लोगों के मन में इस तरह के सवाल आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्टर वायरल हो रहा है जिसमें साल 1963 में आई फिल्म द ओमिक्रॉन का एक पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा है जिसे देखकर लोग इस बात के कयास लगा रहे हैं कि वैज्ञानिकों को वर्षों पहले ही इस वैरिएंट के बारे में पता चल गया था। 
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फिल्म ओमिक्रॉन - फोटो : twitter
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है पोस्टर
असल में सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर का कंटेंट ही कुछ ऐसा है जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है। पोस्टर का टैग लाइन है-  द डे द अर्थ वाज टर्नड इनटू ए सेमेट्री- द कोरोना वैरिएंट, जिसका हिंदी मतलब होता है, वह दिन जब धरती कब्रिस्तान बन जाएगी। मौजूदा हालात का इससे मिलता जुलता लगना स्वाभाविक है। इतना ही नहीं मशहूर फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने भी इस पोस्टर को ट्वीट करते हुए लिखा है कि 'यह फिल्म 1963 में ही आ गई थी, जरा इसका टैगलाइन तो देखिए।'
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फिल्म ओमिक्रॉन - फोटो : twitter
क्या है असलियत?
सोशल मीडिया पर द ओमिक्रॉन नाम से वायरल इस पोस्टर की हकीकत जानने के लिए हमने साल 1963 में आई इस हॉलीवुड फिल्म के बारे में पढ़ना शुरू किया। इस दौरान पता चला कि इस फिल्म का कोरोना वायरस से कोई संबंध ही नहीं है। यह फिल्म दरअसल एक साइंस फिक्शन थी जिसमें एलिएन्स के बारे में दिखाया गया था। 

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कोविड-19 का कहर - फोटो : pixabay
सार्स-सीओवी-2 वायरस का नहीं है इससे संबंध
दिसंबर 2019 में पहली बार चीन के वुहान शहर में सामने आए सार्स-सीओवी-2 वायरस के कारण होने वाली कोविड-19 बीमारी के बारे में पता चला। इससे पहले साल 2003 में सार्स फैमिली के वायरस के कारण ही दुनिया को पहली बार कोरोना का संकट झेलना पड़ा था। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक साल 2003 से पहले कोरोना के बारे में किसी को जानकारी नहीं थी, जबकि सोशल मीडिया पर जिस फिल्म का पोस्टर वायरल है वह 1963 में आई फिल्म थी।
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कोरोना वायरस ने बढ़ाई मुश्किलें - फोटो : istock
कोविड-19 के बारे में जान लीजिए
सबसे पहले 2019 के आखिर में नोवल कोरोना वायरस के मामले दुनिया के सामने आए। कुछ देशों में इसकी दो तो कुछ जगह पर तीन लहरें आ चुकी हैं। आंकड़ों के मुताबिक नोवल कोरोना वायरस से अब तक 26.44 करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 52.52 लाख से अधिक लोगों की इससे मौत हो चुकी है। वहीं भारत में कुल 3.46 करोड़ से अधिक लोग सार्स सीओवी-2 वायरस की चपेट में आ चुके हैं। 



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नोट: यह लेख सोशल मीडिया पर वायरल पोस्टर के फैक्ट चेक आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 
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