फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बड़ा खुलासा: क्यों बढ़ रहे हैं डायबिटीज-कैंसर के मामले? सिंगापुर के शोधकर्ताओं ने पता कर लिया प्रमुख कारण

Sun, 21 Apr 2024 08:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
कैंसर के बढ़ते खतरे को जानिए - फोटो : istock
डायबिटीज से लेकर हृदय रोग और कैंसर जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। कुछ दशकों पहले तक इन रोगों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिक्कतों के रूप में जाना जाता था, हालांकि अब ये बीमारियां कम उम्र वालों को भी अपना शिकार बना रही हैं। अध्ययनों में बढ़ती क्रोनिक बीमारियों के लिए कई प्रकार के जोखिम कारकों को जिम्मेदार माना जाता रहा है।

दुनियाभर में तेजी से बढ़ती इन बीमारियों के बोझ के कारणों के बारे में जानने के लिए शोध कर रही नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (एनयूएस) की टीम ने बड़ा खुलासा किया है। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि कैंसर और मधुमेह के  लिए खराब आहार सबसे बड़ा कारण हो सकता है।

टीम एक शोध के आधार पर इस नतीजे पर पहुंची है कि खराब खान-पान का कैंसर व मधुमेह जैसी बीमारियों से सीधा संबंध है। मोटे तौर पर सेहत संबंधी बड़ी परेशानियां खराब आहार से पैदा होती हैं। अध्ययन की रिपोर्ट सेल जर्नल में प्रकाशित की गई है। 
विज्ञापन

2 of 5
आहार की पौष्टिकता का रखें ध्यान - फोटो : istock
गड़बड़ आहार सेहत के लिए हानिकारक

शोधकर्ता कहते हैं कि हम जिस तरह की चीजों का सेवन करते हैं, उसका हमारी सेहत पर सीधा असर होता है। दुनियाभर में  सोडियम, संतृप्त वसा और शर्करा से भरपूर खान-पान का चलन काफी बढ़ गया है। इसे सीधे तौर पर हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज जैसी क्रोनिक बीमारियों का कारण पाया गया है। स्तन, गर्भाशय और बड़ी आंत के कैंसर के अधिकतर मामलों के लिए भी खान-पान में गड़बड़ी को प्रमुख जोखिम के रूप में देखा जा रहा है। 
विज्ञापन

3 of 5
कैंसर की समस्या - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

एनयूएस में कैंसर साइंस इंस्टीट्यूट ऑफ सिंगापुर (सीएसआई सिंगापुर) के शोधकर्ताओं ने अन्य संगठनों के साथ किए इस अध्ययन में बताया कि कैंसर हमारे जीन और पर्यावरण में मौजूद कारकों जैसे आहार, व्यायाम और प्रदूषण के बीच परस्पर क्रिया के कारण होता है। ऐसे पर्यावरणीय कारक कैंसर के खतरे को कैसे बढ़ाते हैं, यह अभी तक बहुत स्पष्ट नहीं है। यदि हम निवारक उपाय करते हैं तो ये हमें लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करते हैं, इसलिए इस संबंध को समझना महत्वपूर्ण है। 

कैंसर तब उत्पन्न होता है जब हमारी कोशिकाएं ऊर्जा बनाने के लिए ग्लूकोज को तोड़ती हैं और इससे मिथाइलग्लॉक्सल  (एमजीओ) उत्पन्न होता है जोकि मेटाबॉलिक बायो-प्रोडेक्ट है। यह एक प्रतिक्रियाशील यौगिक है जो मधुमेह के जीव विज्ञान में शामिल है। प्रीडायबिटीज और मधुमेह वाले लोगों में मिथाइलग्लॉक्सल का उच्च स्तर आम है और यह मोटापे और खराब आहार के कारण भी हो सकता है।

यह रसायन हमारे डीएनए में दोष पैदा करता है, जो कैंसर के प्रारंभ का संकेत है। जिन रोगियों में मिथाइलग्लॉक्सल का उच्च स्तर होता है उनमें कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है। 

4 of 5
कैंसर के जोखिम कारक - फोटो : istock
मिथाइलग्लॉक्सल को किया जा सकता है कंट्रोल

अध्ययनकर्ताओं ने बताया एचबीए1सी  रक्त परीक्षण के जरिए इसका आसानी से पता चल सकता है। इसके अलावा एमजीओ के स्तर को आमतौर पर नियंत्रित भी किया जा सकता है। जिन लोगों में इस समस्या का निदान होता है उनमें दवाओं और अच्छे आहार की मदद से कैंसर की शुरुआत को रोका जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने कैंसर को रोकने वाले कुछ जीनों के बारे में लंबे समय से चले आ रहे सिद्धांत में भी बदलाव किया। नया बदलाव बताता है कि खराब आहार या अनियंत्रित मधुमेह कैंसर का खतरा बढ़ाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
स्वस्थ चीजों का करें सेवन - फोटो : istock
अध्ययन का निष्कर्ष?

अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया कि अगर हम सभी आहार में सुधार कर लें तो क्रोनिक बीमारियों और कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। मेडिटरेनीयन डाइट को इसमें अच्छा पाया गया है। भोजन में हरी सब्जियों, रंग-बिरंगे फलों को शामिल करना, नमक और चीनी की मात्रा कम रखना और जंक-प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम करना शरीर को स्वस्थ रखने और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाने में मददगार हो सकता है। जिन लोगों को डायबिटीज है उन्हें शुगर के स्तर को कंट्रोल में रखना सबसे जरूरी है। 


--------------
स्रोत और संदर्भ
A glycolytic metabolite bypasses “two-hit” tumor suppression by BRCA2

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें