प्रतीकात्मक तस्वीर
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खबरों के मुताबिक, एम्स, अपोलो समेत चुनिंदा अस्पतालों में इन परीक्षणों की तैयारी की जा रही है। कहा जा रहा है कि तीसरे चरण के परीक्षण सफल रहे जो अगले साल की पहली तिमाही में यह दवा बाजार में उपलब्ध होगी। डॉ. विश्वकर्मा के मुताबिक, यह दवा इम्यूनो थेरेपी के रूप में काम करेगी, जो कोरोना के उपचाराधीन मरीज को दी जा सकती है। इसके साथ ही स्वस्थ व्यक्ति को कोरोना से बचाने में भी इस दवा का इस्तेमाल किया जा सकेगा।