फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

National Cancer Awareness Day: 2040 तक हर साल सामने आ सकते हैं 20 लाख कैंसर रोगी, ये आदतें बढ़ा रही हैं खतरा

Tue, 07 Nov 2023 10:42 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस 2023 - फोटो : istock
वैश्विक स्तर पर कैंसर बड़ा स्वास्थ्य जोखिम है, साल-दर साल इसके रोगियों और मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है। भारत में भी पिछले एक दशक में कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी आई है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी उम्र के लोगों में कैंसर का निदान किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है, जिस तरह से लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के मामले देखे जा रहे हैं, इससे आशंका है कि अगले कुछ सालों में कैंसर रोगियों की संख्या में और उछाल आ सकता है, यह स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा दवाब होगा। इसके जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को कैंसर से बचाव के लिए उपाय करते रहना चाहिए। 

कैंसर के शीघ्र पहचान, रोकथाम और उपचार के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल भारत में 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारत में कैंसर के मामलों की दर पश्चिमी देशों जितनी तेजी से तो नहीं बढ़ी है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि और पहले की तुलना में अब बेहतर निदान के कारण सालाना नए मामलों की संख्या में बढ़ोतरी आई है। 
विज्ञापन

2 of 5
कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
2040 तक हर साल आ सकते हैं 20 लाख मरीज

इंडियन कांग्रेस (आईसीसी) के उद्घाटन के अवसर पर प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में देश में हर साल 1.4 मिलियन (14 लाख) नए कैंसर के मामले सामने आते हैं, वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2040 तक यह बढ़कर 2 मिलियन (20 लाख) हो सकता है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में कैंसर के सबसे अधिक मामले पूर्वोत्तर राज्यों से सामने आ रहे हैं। मिजोरम की राजधानी आइजोल में पुरुषों की प्रति एक लाख जनसंख्या पर कैंसर के करीब 270 मामलों का निदान किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर से बचाव के लिए आवश्यक है कि कम उम्र से ही इसके लिए प्रयास किए जाते रहें। कुछ आदतों से दूरी बनाना बहुत जरूरी है।
विज्ञापन

3 of 5
धुम्रपान से कई प्रकार के रोगों का खतरा - फोटो : Pixabay
शराब-तंबाकू का सेवन बहुत खतरनाक

अध्ययनकर्ताओं ने बताया, जिन आदतों के कारण कैंसर के मामले सबसे अधिक देखे जा रहे हैं, उनमें शराब-तंबाकू का सेवन एक बड़ा कारक है। तम्बाकू, शरीर की सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा कवच को क्षति पहुंचाकर रोग के प्रति आपकी संवेदनशीलता बढ़ा देती है। तम्बाकू और धूम्रपान को सिर-गर्दन, फेफड़े, मूत्राशय और अग्न्याशय के कैंसर सहित 14 प्रकार के कैंसर के विकास वाला पाया गया है। 

इसी तरह शराब के सेवन को ग्रासनली, स्तन और लिवर सहित विभिन्न प्रकार के कैंसर के लिए जोखिम कारक पाया गया है। 

4 of 5
सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के नुकसान - फोटो : istock
शारीरिक निष्क्रियता बड़ा खतरा

गतिहीन जीवनशैली संपूर्ण सेहत के लिए गंभीर समस्याकारक मानी जाती है, इससे कैंसर होने का भी जोखिम बढ़ जाता है। शारीरिक निष्क्रियता के कारण आंत, स्तन और प्रोस्टेट, गर्भाशय और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि नियमित रूप से व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। गड़बड़ आहार और जीवनशैली के परिणामस्वरूप मोटापे के कारण से गर्भाशय, स्तन, अग्न्याशय और पेट के कैंसर का खतरा 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
तनाव और कैंसर का जोखिम - फोटो : Pixabay
तनाव और कैंसर का खतरा

अध्ययनों से पता चलता है कि बहुत अधिक तनाव की स्थिति सीधे तौर पर तो कैंसर का कारण नहीं बनती है, पर आपके जोखिमों को बढ़ाने वाली जरूर हो सकती है। तनाव की स्थिति आपके शरीर में कुछ हार्मोन के स्तर को बढ़ा देती है, जिससे आपमें कैंसर होने का खतरा भी बढ़ सकता है। तनाव के कारण अस्वस्थ व्यवहार जैसे धूम्रपान और भारी शराब की आदत भी सीधे तौर पर कैंसर का कारक मानी जाती है।


--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें