दुनियाभर में तेजी से बढ़ती नींद विकारों की समस्या के लिए अध्ययनकर्ताओं ने स्क्रीन टाइम बढ़ने को प्रमुख कारक माना है। मोबाइल-लैपटॉप जैसे स्क्रीन्स से निकलने वाली नीली रोशनी को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए हानिकारक माना गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोविड-19 महामारी के बाद से लोगों को स्क्रीन टाइम काफी बढ़ा हुआ देखा गया है, जिसके कई प्रकार के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इससे होने वाले खतरों से बचे रहने के लिए सभी आयु के लोगों को इसे कम करने की दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है।
इसी दिशा में महाराष्ट्र के सांगली जिले के एक गांव के लोगों ने हर शाम "डिजिटल डिटॉक्स" करने का फैसला किया है। शाम के बाद इस गांव के लोग कुछ घंटे के लिए पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दूर रहते हैं। मोबाइल और अन्य प्रकार के स्क्रीन्स के कारण बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार की पहल की गई है।
मोबाइल और इंटरनेट पर बर्बाद होने वाले इस समय को अन्य काम और पढ़ाई आदि में लगाया जा रहा है, साथ ही कुछ घंटे के इस डिजिटल डिटॉक्स से सेहत को भी बेहतर करने की कोशिश है। आइए जानते हैं कि आखिर ये डिजिटल डिटॉक्स क्या है और इसके क्या लाभ हैं?