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Covid-19: इन तरीकों से जान सकते हैं कहीं आपको लॉन्ग कोविड तो नहीं? ज्यादातर लोगों में देखी जा रही है यह दिक्कतें

Sun, 22 May 2022 02:11 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लॉन्ग कोविड की समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : iStock
कोरोना के नए वैरिएंट्स के कारण वैश्विक स्तर पर बढ़े संक्रमण और संक्रमण से ठीक होने के एक साल बाद तक कई लोगों में देखी जा रही लॉन्ग कोविड की दिक्कतें, मौजूदा समय में महामारी से संबंधित दो बड़ी समस्याएं हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस समय कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट्स के कारण दुनियाभर में संक्रमण के नए मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। वहीं हाल ही में हुए अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लॉन्ग कोविड की जटिलाताओं और लोगों में लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्याओं को लेकर चिंता जताई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी अपने हालिया रिपोर्ट में पोस्ट कोविड जिसे लॉन्ग कोविड के रूप में भी जाना जाता है, इसके बारे में सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने और लक्षणों के नजर आते ही तुरंत डॉक्टरी सहायता लेने की सलाह दी है। शोध से पता चलता है कि कोरोना संक्रमण का शिकार रह चुके 20-30 फीसदी लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्याओं के विकसित होने की आशंका हो सकती है।

लॉन्ग कोविड को लेकर हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि कुछ लोगों में संक्रमण से ठीक होने के एक से दो साल तक भी लक्षणों का अनुभव होता रह सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ज्यादातर लोगों में बिना इलाज के इन समस्याओं के बढ़ने का खतरा देखा गया है, ऐसे में सभी लोगों को अपने लक्षणों पर ध्यान देते हुए डॉक्टर से संपर्क में रहना चाहिए। आइए जानते हैं कि संक्रमण के बाद कैसे जाना जा सकता है कि कहीं आप भी तो लॉन्ग कोविड के शिकार नहीं हैं? 
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लॉन्ग कोविड की समस्याएं - फोटो : iStock
एसिम्टोमैटिक लोगों से भी हो सकता है लॉन्ग कोविड

जामा नेटवर्क ओपन जर्नल में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि जरूरी नहीं है कि संक्रमण के दौरान यदि आप गंभीर रोग के शिकार रहे हो तो ही आपमें लॉन्ग कोविड विकसित हो सकता है। अध्ययन में पाया गया है कि कई लोग, जिनमें संक्रमण के हल्के लक्षण थे उन्हें भी ठीक होने के छह माह से एक साल तक सिरदर्द और थकान जैसी पोस्ट कोविड की समस्याओं का अनुभव हो रहा है।

इस आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन भी लोगों में एक बार संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है उन्हें पोस्ट कोविड की समस्याओं का ध्यान रखना चाहिए।
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लॉन्ग कोविड की समस्या रह सकती है लंबे समय तक - फोटो : Pixabay
लंबे समय तक बनी रह सकती हैं लॉन्ग कोविड की दिक्कतें

अभी तक माना जाता रहा थी कि लॉन्ग कोविड की दिक्कतें सामान्यतौर पर छह माह से एक साल तक बनी रह सकती हैं, हालांकि मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती रहे आधे से अधिक लोगों में दो साल के बाद तक भी कम से कम एक लक्षण बना हुआ है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि बिना प्रभावी उपचार के इन समस्याओं से निजात पाना कठिन हो सकता है। ऐसे में सभी लोगों को रिकवरी के बाद लक्षणों को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। समय रहते लॉन्ग कोविड की समस्या की पहचान कर उसका इलाज शुरू कर दें।
 

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पोस्ट कोविड की जटिलताएं - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड की पहचान कैसे करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण से ठीक होने के हफ्तों बाद भी यदि आप स्वस्थ महसूस नहीं कर रहे हैं तो आपको लॉन्ग कोविड की समस्याओं को लेकर सावधान हो जाना चाहिए। लॉन्ग कोविड के बारे में जानने के लिए वैसे तो कोई विशिष्ट परीक्षण नहीं है, रोगी को अपने लक्षणों पर लगातार निगरानी रखने की सलाह दी जाती है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि आमतौर पर संक्रमण से ठीक होने के तीन महीने बाद इन समस्याओं का निदान किया जाता है। अलग-अलग लोगों में इसके लक्षण भी भिन्न हो सकते हैं। 
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लॉन्ग कोविड में थकान और कमजोरी की समस्या - फोटो : istock
इन लक्षणों को लेकर बरतें सावधानी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लॉन्ग कोविड की स्थिति में ज्यादातर लोगों को थकान, सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द और कमजोरी बनी रह सकती है। अध्ययन में विशेषज्ञ बताते हैं कि ज्यादातर लोगों में थकान या मांसपेशियों में कमजोरी की समस्या लॉन्ग कोविड में सबसे प्रमुख रूप से रिपोर्ट की जा रही है। संक्रमण से ठीक हो चुके 52 फीसदी लोगों में इस तरह की दिक्कत छह महीने, वहीं 30 फीसदी लोगों में यह दो साल से अधिक समय तक देखी जा रही है।


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स्रोत और संदर्भ
Health outcomes in people 2 years after surviving hospitalisation with COVID-19

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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