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Covid-19 Study: इस रोग के शिकार लोगों में रिपोर्ट किए गए संक्रमण से मृत्यु के सबसे अधिक मामले, ICU केस भी बढ़े

Sat, 27 Jan 2024 12:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के कारण गंभीर रोगों का खतरा - फोटो : istock
कोरोनावायरस का संक्रमण वैश्विक स्तर पर जारी है। इन दिनों कई देशों में रिपोर्ट किए जा रहे संक्रमण के मामलों के लिए ओमिक्रॉन के नए सब-वैरिएंट JN.1 को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अध्ययनों में इसकी संक्रामकता दर भी काफी अधिक बताई गई है। कोरोना की इस लहर में कई देशों में मौत के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है।

वैज्ञानिकों ने बताया JN.1 अत्यधिक संक्रामक वैरिएंट जरूर है पर इसके कारण गंभीर रोग विकसित होने या फिर मृत्यु का खतरा उन्हीं लोगों में अधिक हो सकता है जो पहले से ही किसी गंभीर क्रोनिक बीमारी के शिकार रहे हैं, या फिर जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो। 

मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अमेरिका, चीन, सिंगापुर सहित कई देशों में कोरोना की इस लहर के कारण मौत के मामले भी अधिक रिपोर्ट किए जा रहे हैं। भारत में भी संक्रमितों में मृत्यु का खतरा बढ़ा है। कोरोना रोगियों में मौत के बढ़ते मामलों को समझने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि संक्रमण से मरने वालों में सबसे अधिक मामले मधुमेह से संबंधित पाए गए हैं। महिला-युवाओं में मौत का खतरा अधिक देखा गया है।
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डायबिटिक रोगियों में कोविड-19 - फोटो : istock

डायबिटीज और कोविड-19

द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध की रिपोर्ट से पता चलता है कि मधुमेह के रोगियों में कोविड-19 के कारण मौत के मामले बढ़े हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि महामारी ने स्वास्थ्य देखभाल और जीवनशैली में व्यवधान पैदा कर दिया है, जिससे डायबिटीज रोगियों की जटिलताएं बढ़ गई हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित अन्य शोधकर्ताओं की टीम ने इससे संबंधित 138 अध्ययनों की समीझा की, जिसमें पाया गया है कि महामारी के दौरान मधुमेह रोग, कोविड से मृत्यु का एक जोखिम कारक था। जिन डायबिटिक रोगियों को संक्रमण हुआ उनमें समय के साथ जटिलताएं अधिक बढ़ती हुई देखी गईं। 
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युवाओं में बढ़े डायबिटीज के केस - फोटो : Pixabay

महामारी के दौरान बढ़े टाइप 1 डायबिटीज के केस

मौतों में वृद्धि के साथ-साथ, शोधकर्ताओं ने पाया कि आईसीयू में भी मधुमेह रोगियों की भर्ती में चौंकाने वाली वृद्धि हुई है। बच्चों और किशोरों में डायबिटिक केटोएसिडोसिस (डीकेए) के मामले भी बढे़ हैं। डीकेए मधुमेह की एक संभावित गंभीर जटिलता है, जिससे शरीर में विषाक्तता बढ़ने, उल्टी-पेट दर्द, पेशाब से संबंधित समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।  

शोधकर्ताओं ने बताया कि महामारी के दौरान टाइप-1 डायबिटीड के भी उम्मीद से अधिक नए मामले सामने आए हैं। इस प्रकार के मधुमेह वाले लोग महामारी के दौरान अधिक बीमार भी हुए। टाइप-2 डायबिटीज की तुलना टाइप 1 डायबिटीज के केस कम देखे जाते रहे हैं। ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसका आमतौर पर बचपन में निदान किया जाता है।

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कोरोना के नए वैरिएंट्स का जोखिम - फोटो : Pixabay
क्या कहती हैं शोधकर्ता?

अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ताओं में से एक हार्टमैन-बॉयस कहती हैं, महामारी के दौरान किए गए अधिकतर शोध में पाया गया कि क्रोनिक बीमारियों के शिकार लोगों में संक्रमण से गंभीर जटिलताओं और मृत्यु का खतरा अधिक हो सकता है। हम इस बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अन्य किसी महामारी का भी इन रोगियों पर गंभीर असर हो सकता है?

फिलहाल JN.1 जैसे हल्के स्तर वाले वैरिएंट से भी बचाव को लेकर डायबिटीज के शिकार लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी जाती है।
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कोरोना से बचाव जरूरी - फोटो : Pixabay
डायबिटीज रोगी करें बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज की स्थिति शरीर को अंदर ही अंदर कमजोर करती जाती है, इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। यही कारण है कि मधुमेह के शिकार लोगों में कोरोना से मौत का खतरा अधिक देखा जा रहा है। इन दिनों बढ़ रहे कोरोनावायरस से भी क्रोनिक बीमारी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है, क्योंकि वायरस का शरीर पर गंभीर असर होने का खतरा हो सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Excess diabetes mellitus-related deaths during the COVID-19 pandemic in the United States

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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